पहलगाम आतंकी हमले की जांच में पता चला है कि आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दो सेलफोन में से एक 2021 में पाकिस्तान में इंपोर्ट किए गए एक कंसाइनमेंट से जुड़ा था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इसे कराची के एक बैंक ने फाइनेंस किया था, जो पहले भी आतंकी जांच के निशाने पर रहा है। पहले आरोप था कि बैंक प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और कुवैत के एक फाउंडेशन लजनत-अल-दावा के फंड से जुड़ा है, जिसके अल-कायदा से कथित तौर पर संबंध हैं।

पहलगाम हमले से पहले तक इस्तेमाल नहीं हुए थे फोन

साथ ही सूत्रों ने कहा कि दोनों सेलफोन 2021 और 2023 में इंपोर्ट किए गए थे और 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले से पहले तक इस्तेमाल नहीं किए गए थे। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच के मुताबिक, पहलगाम के हमलावरों के पास रेडमी सीरीज़ के दो शाओमी सेलफोन थे। इसमें एक 9T (ऑरेंज) जिसे 2021 में इंपोर्ट किया गया था और एक नोट 12 (Black) जिसे 2023 में इंपोर्ट किया गया था। ये फोन तीन हमलावरों (फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिबरान और हमजा अफगानी) से बरामद किए गए थे, जब वे 28 जुलाई, 2025 को जम्मू-कश्मीर के दाचीगाम जंगल में मुलनार महादेव में एक एनकाउंटर में मारे गए थे।

शाओमी ने क्या बताया?

सूत्रों ने बताया कि शाओमी ग्लोबल से पूछताछ के बाद पता चला कि रेडमी 9T एक कंसाइनमेंट का हिस्सा था जिसे पाकिस्तान की कंपनी, टेक सिरत प्राइवेट लिमिटेड ने इंपोर्ट किया था। इसका ऑफिस कराची में क्लिफ्टन रोड पर है। Xiaomi की दी गई जानकारी के मुताबिक यह कंसाइनमेंट 1 जनवरी, 2021 को पाकिस्तान में डिलीवर किया गया था। कंसाइनमेंट के लिए लिस्टेड लॉजिस्टिक्स कंपनी Faysal Bank थी, जबकि डिलीवरी का पता St/02, Faysal House, Main Branch, Shahrah-e-Faisal, Karachi, Pakistan दर्ज किया गया था।

यह पाकिस्तान के एक बड़े इस्लामिक बैंक Faysal Bank Ltd का अधिकारिक पता है। सूत्रों ने कहा कि ऐसा लगता है कि बैंक ने Tech Sirat के ज़रिए इंपोर्ट के लिए फाइनेंस दिया था। यह एक नॉर्मल बिज़नेस प्रैक्टिस है जहां बैंक बड़े कंसाइनमेंट के इंपोर्टर्स को लेटर ऑफ क्रेडिट देते हैं।

जांच की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, “यह कंसाइनमेंट टेक सिरत को मिला होगा, लेकिन डॉक्यूमेंट्स में डिलीवरी बैंक को दिखाई गई है क्योंकि उसने इसे फाइनेंस किया था। पहलगाम हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किया गया फोन इसी कंसाइनमेंट से स्मगल किया गया लगता है और LeT तक पहुंचा। खास बात यह है कि 2021 में इंपोर्ट के बाद से पहलगाम हमले तक फोन कभी चालू नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि इसे कंसाइनमेंट से ठीक उसी मकसद से निकाला गया था ताकि इसे किसी आतंकवादी को सौंपा जा सके।”

पहले भी आतंकी जांच से जुड़ा रहा बैंक का नाम

हालांकि फैसल बैंक के पहलगाम हमले से सीधे जुड़े होने का कोई सबूत नहीं है, लेकिन बैंक का नाम पहले भी आतंकी जांच से जुड़ा रहा है। 2007 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 9/11 हमलों के बाद कोर्ट में लाए गए केस दिखाते हैं कि पाकिस्तान में दो कट्टरपंथी ग्रुप, जिन्हें अमेरिका ने आतंक को समर्थन करने के लिए डेजिग्नेट किया है, उसने फैसल बैंक लिमिटेड में डिपॉजिट अकाउंट बनाए हुए थे। इनमें एक है लश्कर ए-तैयबा, जो भारत से लड़ने वाला एक आतंकी संगठन है और दूसरा लजनत अल-दावा, जो कुवैत का एक फाउंडेशन है जिसके अल-कायदा से लिंक हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैंक की होल्डिंग कंपनी के वकील ने आतंकी संगठन के साथ किसी भी तरह के लिंक से इनकार किया था और कहा था कि जैसे ही क्लाइंट को डेजिग्नेटेड लिस्ट में डाला गया या पाकिस्तान में बैन किया गया और अकाउंट फ्रीज कर दिए गए थे। पाकिस्तानी डेली डॉन की 2002 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिसका ज़िक्र साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) ने उस समय की अपनी मासिक सिक्योरिटी ब्रीफ में किया था, 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने LeT, सिपह-ए-सहाबा पाकिस्तान (SSP), हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM), अल-रशीद ट्रस्ट (ART), अल-बद्र, सैफ-उल-मुजाहिदीन, तहरीक-ए-जाफरिया पाकिस्तान (TJP) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के अकाउंट्स की डिटेल्स इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। इसमें कहा गया कि सोर्स ने बताया कि हर बैन ग्रुप ने हबीब बैंक, नेशनल बैंक, एलाइड बैंक, मुस्लिम कमर्शियल बैंक और फैसल बैंक समेत अलग-अलग नेशनलाइज्ड और कमर्शियल बैंकों में कई लोकल और फॉरेन करेंसी अकाउंट्स मेंटेन किए हुए थे।

फ़ोन से नहीं मिल सका कम्युनिकेशन डेटा

पहलगाम हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किया गया दूसरा फोन RedMi Note 12, एयर लिंक कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा इंपोर्ट किया गया था, जिसका ऑफिस लाहौर के न्यू गार्डन टाउन में है। सूत्रों ने बताया कि यह फ़ोन भी पहलगाम हमले से पहले तक कभी चालू नहीं हुआ था। सूत्रों के मुताबिक इन फ़ोन से कोई कम्युनिकेशन डेटा नहीं मिल सका क्योंकि आतंकवादी लॉन्ग रेंज रेडियो कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे थे, जो सेलुलर नेटवर्क या इंटरनेट पर निर्भर हुए बिना लंबी दूरी तक सुरक्षित रूप से बातचीत करने में मदद करती है।

हालांकि जांच करने वालों को दोनों फ़ोन से कुछ तस्वीरें और मैप मिले हैं, जिनमें पहलगाम में बैसरन मीडोज और आस-पास के इलाकों के नक्शे भी शामिल हैं। एक तस्वीर एक टेंट की है जिसे आतंकवादियों ने 30 मार्च, 2025 को हमले से कुछ हफ़्ते पहले लगाया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। टेंट के किनारे एक स्टोव दिख रहा है और ऊंचाई पर लगा हुआ लगता है, जिससे आतंकवादियों को सुरक्षा बलों की आवाजाही के मुकाबले फ़ायदा होता है।

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पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को साफ और सख्त संदेश दिया – नया भारत अब बर्दाश्त नहीं, जवाबी कार्रवाई करेगा। हालांकि हमले की कीमत आज भी जम्मू-कश्मीर के पुंछ के रहने वाले कुछ परिवार चुका रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर