प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (7 अप्रैल 2026) को भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का ऐलान किया। पीएम ने कहा कि तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित स्वदेशी रूप से विकसित ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (पीएफबीआर) ने ‘क्रिटिकल’ अवस्था हासिल कर ली है। उन्होंने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने इस उपलब्धि को देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिये एक ‘नए युग की शुरुआत’ बताया। आखिर यह PFBR है क्या और इसमें किस खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि क्यों देश के लिए यह PFBR महत्वपूर्ण है…
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे सफलतापूर्वक ‘फर्स्ट क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली। यह उपलब्धि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वदेशी परमाणु तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।
क्या होती है ‘फर्स्ट क्रिटिकलिटी’
‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र है जो बिजली उत्पादन के दौरान खपत होने वाले परमाणु ईंधन की तुलना में ज्यादा परमाणु ईंधन उत्पन्न करने के लिए तीव्र न्यूट्रॉन का इस्तेमाल करता है। ‘फर्स्ट क्रिटिकलिटी’ का मतलब है कि रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु विखंडन (nuclear fission) की श्रृंखला प्रतिक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हो गई। यानी अब रिएक्टर ऊर्जा पैदा करने के लिए सक्रिय हो गया है।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों की मौजूदगी में हासिल हुई सफलता
यह उपलब्धि डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग और चेयरमैन, परमाणु ऊर्जा आयोग), श्रीकुमार जी पिल्लई (निदेशक, IGCAR), अल्लू अनंत (सीएमडी-इन-चार्ज, BHAVINI) और के.वी. सुरेश कुमार की उपस्थिति में हासिल की गई।
यह सफलता सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद मिली जिसे परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने कड़ी समीक्षा के बाद मंजूरी दी।

Fast Breeder Reactor क्या होता है?
यह सामान्य ट्रेडिशनल परमाणु रिएक्टर से अलग होता है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की लॉन्ग-टर्म परमाणु रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
-यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा नया ईंधन पैदा कर सकता है
-इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम (MOX fuel) का उपयोग होता है
-यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदलकर नया ईंधन बनाता है
आसान भाषा में कहें तो यह ऊर्जा पैदा करने के साथ-साथ ईंधन भी बनाता है।
स्वेदेशी टेक्नोलॉजी से विकसित रिएक्टर
PFBR को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इसका निर्माण और संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) ने किया है जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत एक सार्वजनिक उपक्रम है।
थोरियम आधारित ऊर्जा का रास्ता
यह रिएक्टर भविष्य में थोरियम-232 के उपयोग के लिए भी डिजाइन किया गया है जिसे यूरेनियम-233 में बदला जा सकता है। इससे भारत के तीन-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे स्टेज को रफ्तार मिलेगी।
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार हैं। यह टेक्नोलॉजी सीमित यूरेनियम संसाधनों से अधिक ऊर्जा निकालने और थोरियम आधारित रिएक्टरों के विस्तार का रास्ता खोलती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है PFBR?
इस रिएक्टर से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। भारत के पास यूरेनियम सीमित है लेकिन इस टेक्नोलॉजी के जरिए उसी ईंधन से ज्यादा ऊर्जा निकाली जा सकती है।
भारत के 3-स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम में बड़ा कदम
पहला: PHWR रिएक्टर
दूसरा: Fast Breeder Reactor (PFBR)
तीसरा: थोरियम आधारित रिएक्टर
फर्स्ट क्रिटिकलिटी के साथ भारत अपने तीन-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम के लक्ष्य के करीब पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर तकनीक मौजूदा PHWR रिएक्टरों और भविष्य के थोरियम बेस्ड सिस्टम के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।

किन मॉडर्न टेक्नोलॉजी का किया गया है इस्तेमाल
PFBR में कई आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है:
-एडवांस्ड सिक्यॉरिटी सिस्टम
-लिक्विड सोडियम कूलिंग सिस्टम
-क्लोज्ड फ्यूल साइकिल (ईंधन का पुनः उपयोग)
-कम रेडियोधर्मी कचरा
-ज्यादा एनर्जी एफिशिएंसी
यह उपलब्धि वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग भागीदारों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इसमें अधिकतर तकनीक और उपकरण स्वदेशी हैं, जो “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को मजबूत करते हैं।
रणनीतिक और तकनीकी क्षमता में वृद्धि
फास्ट ब्रीडर कार्यक्रम से भारत की क्षमताएं कई क्षेत्रों में बढ़ती हैं:
न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल
एडवांस्ड मटेरियल
रिएक्टर फिजिक्स
बड़े स्तर की इंजीनियरिंग
यह भविष्य की परमाणु तकनीकों के विकास में भी सहायक होगा।
स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में कदम
भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अहम भूमिका निभाएंगे। ये रिएक्टर कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। लगातार (base-load) बिजली ऑफर करते हैं। ज्यादा एफिशिएंसी से ऊर्जा उत्पादन करते हैं।
PFBR की फर्स्ट क्रिटिकलिटी सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि भारत के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी प्रगति की दिशा में बड़ा मील का पत्थर है।
