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पेट्रोलियम मंत्री ने वित्‍त मंत्री से मांगे 15000 करोड़, इमरजेंसी के लिए रिजर्व तेल का करेंगे इंतजाम

सरकार विशाखापट्टनम, मंगलोर और पडूर (उडुपि के पास) में तीन स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्‍स बना रही है। इनमें 50 लाख मीट्रिक टन कच्‍चा तेल रखा जा सकेगा।
Author नईदिल्ली | February 4, 2016 17:02 pm
भारत में कुल मांग का 80 फीसदी से ज्‍यादा तेल आयातित होता है।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वित्‍त मंत्रालय से 15000 करोड़ रुपए मांगे हैं। इस रकम से वह पेट्रोलियम पदार्थों का रणनीतिक आरक्षित भंडार (स्‍ट्रैटेजिक स्‍टोरेज रिजर्व्‍स) तैयार करने का दूसरे चरण का काम पूरा करेंगे। स्‍ट्रैटेजिक स्‍टोरेज रिजर्व्‍स जमीन के अंदर बनाए जाते हैं। इनमें पेट्रोलियम पदार्थ आपात स्थिति में इस्‍तेमाल के लिए रखा जाता है। यानी जब किसी वजह से देश में पेट्रोल की सप्‍लाई नहीं हो, तब इस भंडार का उपयोग किया जाता है।

सरकार विशाखापट्टनम, मंगलोर और पडूर (उडुपि के पास) में तीन स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्‍स बना रही है। इनमें 50 लाख मीट्रिक टन कच्‍चा तेल रखा जा सकेगा। इनका निर्माण Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) की देख-रेख में हो रहा है। सरकार 390 लाख बैरल कच्‍चा तेल रिजर्व्‍स में रखना चाहती है। यह दस दिन के आयात के बराबर है। पर 2020 विजन के मुताबिक सरकार को 90 दिन के आयात के बराबर कच्‍चा तेल रिजर्व रखना होगा। यानी करीब 3600 लाख बैरल। इस लिहाज से भी इन स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्‍स का निर्माण अहम है। अभी भारत के पास इतना तेल रखने की क्षमता भी नहीं है।

स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्‍स बनाने की बात 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने शुरू की थी। भारत में रोज करीब 38 लाख बैरल तेल की खपत है। इसमें से 80 फीसदी से ज्‍यादा आयातित होता है। तेल की खपत में भारत दुनिया में चौथे नंबर पर है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुमान के मुताबिक भारत 2020 तक दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश होगा। इसलिए सप्‍लाई पूरी तरह बाधित होने की स्थिति में तेल की किल्‍लत से बचने के लिए स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्‍स की काफी अहमियत है।

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