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पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच मूडीज ने जारी किया परेशानी बढ़ाने वाला आंकड़ा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से मोदी सरकार पर दाम करने का दबाव बढ़ने लगा है। ऐसे में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने सरकार को सवाधान किया है। एजेंसी का कहना है कि सब्सिडी देने से सरकार के खजाने पर 53,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार पर कीमतों को नियंत्रित करने का दबाव बढ़ने लगा है। साथ ही सब्सिडी देने का मामला भी जोर पकड़ता जा रहा है। ऐसे में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने नया आंकड़ा जारी किया है। एजेंसी ने सब्सिडी को लेकर सरकार को सावधान किया है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का कहना है कि 2018-19 के वित्त वर्ष में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 60-80 डॉलर प्रति बैरल (4097.70-5463.60 रुपये) होने की स्थिति में सरकार पर 350 अरब से 530 अरब रुपये (35,000-53,000 करोड़ रुपये) का वित्तीय बोझ पड़ेगा। पिछले तीन वर्षों में यह सबसे ज्यादा होगा। ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ के अनुसार, केंद्र सरकार ने मौजूद वित्तीय वर्ष के लिए महज 250 अरब रुपये का प्रावधान किया है। मूडीज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा होने पर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाने को कहा जा सकता है।

कीमतों पर दोबारा नियंत्रण की संभावना कम: केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों को वैश्विक स्तर के अनुकूल बनाने के लिए इसे नियंत्रण से मुक्त कर दिया था। बढ़ती कीमतों से पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की चर्चा जोरों पर है। हालांकि, मूडीज का मानना है कि सरकार द्वारा मौजूदा व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव करने की संभावना बेहद कम है। बता दें कि ऑयल सेक्टर को नियंत्रण मुक्त करने के कारण देश में तेल के दाम अंतररष्ट्रीय स्तर पर आने वाले बदलावों के साथ ज्यादा या कम होता रहता है। एलपीजी और केरोसीन तेल को छोड़कर सभी पेट्रोलियम उत्पाद बाजार भाव पर बिकते हैं। बता दें कि अमेरिका के ईरान करार से बाहर होने और तेल उत्पादक देशों द्वारा तेल उत्पादन को नियंत्रित करने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, भारत में तेल की कीमत पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा हो गया है। कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बाद तेल की कीमतों में वृद्धि शुरू हो गई थी। इस साल भाजपा शासित तीन बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

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