Petrol Diesel Rules Change: देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की स्थिति में सुधार को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। आगामी 1 जुलाई से वाणिज्यिक और औद्योगिक ग्राहकों को पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर लगी सभी पाबंदियां समाप्त हो जाएंगी। इसके साथ ही आम पेट्रोल पंपों पर प्रति गाड़ी डीजल बिक्री की तय सीमा को भी हटा लिया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 जून को एक नया आदेश जारी कर अपने 12 जून के पुराने निर्देश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह कदम देश में ईंधन की सुचारू उपलब्धता को दर्शाता है।
डीजल की तय सीमा हटी, अब गाड़ियों को मिलेगा मनमुताबिक ईंधन
मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के बाद अब पेट्रोल पंपों पर एक दिन में एक गाड़ी को बेचे जाने वाले डीजल की मात्रा पर लगी सीमा खत्म हो जाएगी। इससे पहले 12 जून के आदेश में सरकार ने नियम बनाया था कि कोई भी पेट्रोल पंप किसी वाहन या ग्राहक को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दे सकता है। साथ ही, डीजल सिर्फ गाड़ी के टैंक या पीईएसओ से मान्यता प्राप्त कंटेनर में ही भरने की अनुमति थी, जिसे अब वापस ले लिया गया है।
थोक ग्राहकों को मिली राहत, अब रिटेल पंपों से खरीद सकेंगे तेल
पुराने नियमों के तहत औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत ग्राहकों के पेट्रोल पंप से ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी गई थी। इन ग्राहकों को केवल उनके लिए निर्धारित ‘कंज्यूमर पंप’ से ही तेल लेने का निर्देश था। लेकिन नए आदेश के बाद अब ये बड़े कमर्शियल ग्राहक (जैसे दूरसंचार टावर, बिजली बनाने वाले उद्योग, ट्रक और सरकारी बस संचालक) भी 1 जुलाई से सामान्य पेट्रोल पंपों से तेल खरीद सकेंगे।
“अब अस्थायी उपायों की जरूरत नहीं”
पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “देश में पेट्रोलियम उत्पादों की मौजूदा आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार इस बात से संतुष्ट है कि जनहित में 12 जून के आदेश को जारी रखना अब जरूरी नहीं है। ग्राहकों के हित में ये अस्थायी उपाय तब बेहद जरूरी और उचित माने गए थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इसलिए ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल आदेश, 2026’ के तहत 12 जून, 2026 के आदेश को 1 जुलाई, 2026 से वापस लिया जाता है।”
क्यों लगाई गई थीं ये पाबंदियां?
पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो गई थी। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल पंपों पर कीमतें नहीं बढ़ाईं।
नतीजतन, रिटेल और थोक कीमतों में भारी अंतर आ गया। उदाहरण के लिए, दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल ₹95.20 प्रति लीटर था, जबकि थोक बिक्री की कीमत ₹134.50 प्रति लीटर पहुंच गई थी। करीब ₹40 प्रति लीटर के इस अंतर के कारण थोक ग्राहकों ने भारी बचत के लिए सामान्य पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदना शुरू कर दिया, जिससे कुछ इलाकों में डीजल की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई थी। इसी कालाबाजारी, जमाखोरी और किल्लत को रोकने के लिए सरकार ने 90 दिनों के लिए ये आपातकालीन प्रतिबंध लगाए थे।
खाड़ी देशों से आपूर्ति सुधरी, तनाव हुआ कम
सरकार ने साफ किया है कि यह राहत खाड़ी देशों से कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई में सुधार होने के बाद दी गई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से ऊर्जा का निर्यात फिर से सुचारू रूप से शुरू हो चुका है।
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केंद्र सरकार ने हाल ही में 22% से 30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22-E30) को केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) से छूट दे दी है। इससे इन ईंधनों का टैक्स ट्रीटमेंट मौजूदा 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के बराबर हो गया है, जो फिलहाल पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है। पढ़िए पूरी खबर…
