पेट्रोल-डीजल की कीमतें कर सकती हैं और परेशान, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े कच्चे तेल के दाम

ओपेक ने सितंबर के लिए अपनी मासिक तेल बाजार रिपोर्ट में 2021 के लिए विश्व तेल मांग में प्रति दिन 6.0 मिलियन बैरल की वृद्धि का पूर्वानुमान बनाए रखा है।

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महामारी के बीच ईंधन की बढ़ी कीमतें आम आदमी की कमर तोड़ रही हैं। (एक्सप्रेस फोटो)।

सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं। माना जा रहा है कि तेल कंपनियों को ज्यादा मार्जिन हासिल नहीं हो रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 12 दिनों से कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय दर में उछाल दबाव बढ़ा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतें अगस्त के दौरान औसत कीमतों की तुलना में लगभग 4-6 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल अधिक हैं। सूत्रों ने कहा, हालांकि अब तक तेल कंपनियों द्वारा रिटेल कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गयी है।

उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें इस स्तर पर बनी रहती हैं, तो ऑइल मार्केटिंग कंपनी को पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में वृद्धि करनी होगी। पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में पिछली बार क्रमश: 17 जुलाई और 15 जुलाई को वृद्धि की गई थी।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत फिलहाल 101.19 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 88.62 रुपये प्रति लीटर है। अगस्त में औसत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 3 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक की गिरावट आई थी। ऐसा अमेरिका और चीन के मिलेजुले आर्थिक आंकड़ों की पृष्ठभूमि के विपरीत हुआ था। इस बीच तेजी से फैल रहे डेल्टा वैरिएंट के चलते एशियाई देशों में लग रहे प्रतिबंध चिंता का सबब बने हुए हैं।

इससे पहले दिल्ली के बाजार में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में 18 जुलाई से ऑइल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा क्रमश: 0.65 रुपये प्रति लीटर और 1.25 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई थी। पिछला डाउनवर्ड रिवीजन 5 सितंबर को किया गया था।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ताजा घटनाक्रम के साथ कच्चे तेल की कीमतों में अगस्त के अंतिम सप्ताह से लगातार उछाल आना शुरू हो गया है। मेक्सिको के ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर आग लगने से उत्तरी अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन ठप हो गया है और यूएस गल्फ कोस्ट पर तूफान इडा के कारण आई रुकावटों ने तेल की कीमतों में भारी वृद्धि की है।

आईईए के अनुसार, 2005 में कैटरीना और रीटा तूफान के बाद से अमेरिका के खाड़ी तट पर आने वाले सबसे भीषण तूफान इडा के चलते कच्चे तेल की कुल आपूर्ति में 30 मिलियन बैरल तक का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी कच्चे तेल की सूची में गिरावट और मांग में सुधार की उम्मीदों ने भी कीमतों में हालिया तेजी में योगदान दिया है।

ओपेक ने सितंबर के लिए अपनी मासिक तेल बाजार रिपोर्ट में 2021 के लिए विश्व तेल मांग में प्रति दिन 6.0 मिलियन बैरल की वृद्धि का पूर्वानुमान बनाए रखा है। ओपेक के अनुसार, टीकाकरण दरों में वृद्धि और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में स्थिर आर्थिक विकास से कच्चे तेल की मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

2021 की चौथी तिमाही के लिए, विश्व तेल की मांग तीसरी तिमाही के मुकाबले 1.24 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ने की उम्मीद है। 2022 के लिए, ओपेक ने तेल की मांग को 100.8 mb/d तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। सूत्रों ने कहा कि आईईए टीकाकरण दरों में वृद्धि और मांग के दृष्टिकोण में संभावित सुधार के चलते आशावादी है।

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