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बीजेपी ने छ‍िपा लीं ये पांच बड़ी बातें, ज‍िनका पेट्रोल महंगा होने से है सीधा वास्‍ता

देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में केंद्र में सत्‍तारूढ़ बीजेपी ने पेट्रोलियम उत्‍पादों का एक ग्राफिक्‍स जारी किया है, जिसको लेकर पार्टी खुद ही निशाने पर आ गई है।

Author नई दिल्‍ली | September 11, 2018 4:51 PM
बीजेपी ने एक ग्राफिक्‍स जारी की है, जिसमें मई, 2014 की तुलना में पेट्रोल की कीमतों में 13 फीसद तक की गिरावट आने की बात कही गई है। (फोटो सोर्स: बीजेपी के ट्विटर अकाउंट से)

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आलोचनाओं के केंद्र में है। विपक्षी दलों के साथ ही आमलोग भी सत्‍ता में आने से पहले मनमोहन सिंह की सरकार के समय मोदी द्वारा पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर दिए गए बयानों को सोशल मीडिया में शेयर कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने पेट्रोलियम उत्‍पादों के दाम में वृद्धि और बढ़ती महंगाई के खिलाफ 10 सितंबर को भारत बंद किया था, जिसका कई राज्‍यों में व्‍यापक असर देखा गया। लगातार हो रही आलोचना के बाद केंद्र में सत्‍तारूढ़ बीजेपी ने तेल की कीमतों में वृद्धि (5 साल के अंतराल पर) को लेकर एक ग्राफिक्‍स जारी किया, जिसमें पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की दर मनमोहन सरकार के मुकाबले 6 गुना (पेट्रोल) से लेकर 3 गुना (डीजल) तक कम दिखाई गई है। सोशल मीडिया में इसको लेकर बीजेपी की खिंचाई शुरू हो गई है।

बीजेपी की ओर से जारी ग्राफिक्‍स में कई अहम पहलुओं को छोड़ दिया गया, जिसके कारण कच्‍चे तेल की कीमतों में अपेक्षाकृ‍त कम वृद्धि के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। बीजेपी ने सिर्फ कीमत वृद्धि में गिरावट की जानकारी दी और अन्‍य तथ्‍यों को नजरअंदाज कर दिया, जिसके कारण पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े हैं। फरवरी, 2016 में तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में दिलचस्‍प आंकड़ा पेश किया था। उन्‍होंने बताया था कि मई, 2014 में अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमत 106.85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था। उस समय भारत में लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 71 रुपये देना पड़ रहा था। बता दें कि मौजूदा समय में अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 77.48 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल है, जबकि पेट्रोल 80.87 रुपये प्रति लीटर (दिल्‍ली) के हिसाब बिक रहा है।

एक्‍साइज ड्यूटी का बोझ: केंद्र सरकार के लिए पेट्रोल और डीजल राजस्‍व अर्जित करने के सबसे बड़े साधनों में से एक है। केंद्र इन पर एक्‍साइज ड्यूटी लगाता है। एक उपभोक्‍ता को एक लीटर पेट्रोल के लिए 19.48 रुपये बतौर उत्‍पाद शुल्‍क चुकाना होता है। वहीं, प्रति लीटर डीजल के लिए 15.33 रुपये का भुगतान करना होता है। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल के दाम में गिरावट हुुई तो सरकार ने इसका फायदा जनता को देने के बजाय, इससे राजस्‍व बढ़ाने के मकसद से यह टैक्‍स बढ़ा द‍िया। ज्‍यादा राजस्‍व जुटाने के लिए केंद्र ने नवंबर, 2014 से जनवरी, 2016 के बीच एक्‍साइज ड्यूटी को रिकॉर्ड 9 बार बढ़ाया। इन 15 महीनों में एक्‍साइज ड्यूटी के तौर पर 2,42,000 करोड़ रुपये जुटाए।

डायनामिक फ्यूल प्रा‍इसिंग का मकसद फेल: मोदी सरकार ने पिछले साल डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग मेथड लागू की थी। इसका मकसद था क‍ि ग्राहकों को हर पल अंतरराष्‍ट्रीय कीमतों का फायदा द‍िया जाए और उसी के मुताब‍िक पेट्रोल-डीजल सस्‍ता या महंगा हो। पहले तेल कीमतों की समीक्षा 15 द‍िन पर होती थी। नई व्‍यवस्‍था के बाद प्रत‍ि द‍िन कीमतें बदलने लगीं। पर कीमतें ग‍िरने का फायदा ग्राहकों को कम ही म‍िला। कीमत निर्धारण की नई व्‍यवस्‍था को 1 मई, 2017 से चंडीगढ़, जमशेदपुर, पुडुचेरी, उदयपुर और विशाखापट्टनम में पायलट स्‍कीम के तौर पर लागू किया गया था। 16 जून, 2017 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया।

VAT की मार: केंद्र के एक्‍साइज ड्यूटी के अलावा विभिन्‍न राज्‍यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर VAT (मूल्‍य संवर्धित कर) भी लगाया जाता है। राज्‍यों में VAT की दर अलग-अलग होने के कारण हर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी भिन्‍न होती हैं। जैसे केंद्र प्रशासित प्रदेश अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में VAT की दर सबसे कम 6 फीसद है, जबकि मुंबई में सबसे ज्‍यादा 39.12 फीसद है। वहीं, तेलंगाना में डीजल पर 26 फीसद तक VAT देना पड़ता है। दिल्‍ली में पेट्रोल पर 27 और डीजल पर 17.24 फीसद VAT चुकाना होता है। बीजेपी या सहयोगी दलों की 19 राज्‍यों में सरकार है, लेकिन एक-दो राज्‍यों को छोड़ कर किसी ने VAT कम नहीं किया।

पेट्रोल-डीजल पर रोड-इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेस: एक्‍साइज ड्यूटी और VAT के बाद पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर के हिसाब से सेस (उपकर) भी लगाए जाते हैं। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इस बार के बजट में पेट्रोलियम पदार्थां पर लगने वाले उत्‍पाद शुल्‍क में कटौत करने की घोषणा की थी, लेकिन लगे हाथ 8 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से रोड-इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेस लगा दिया। ICRA कॉरपोरेट रेटिंग्‍स की ओर से किए गए आकलन की मानें तो इसके जरिये 1,13,000 करोड़ रुपये अतिरिक्‍त जुटाए जा सकेंगे। इसके अलावा पेट्रोल पंप डीलर (दिल्‍ली के अनुसार) भी कमीशन (पेट्रोल पर 3.63 और डीजल पर 2.53 रुपये) लेता है।

GST में शामिल न करने का खामियाजा: मोदी सरकार ने ‘वन नेशन, वन टैक्‍स’ की तर्ज पर GST को अमल में लाने की पुरजोर वकालत की थी। नई कर प्रणाली को 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया। लेकिन, पेट्रोल और डीजल को इसके दायरे में अभी तक नहीं लाया गया है। GST के 28% वाले स्‍लैब में शामिल करने पर भी मौजूदा स्थितियों में पेट्रोल की कीमत 43.44 रुपये प्रति लीटर तक ही होगा।

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