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PDP नेता ने मांगी एक राज्य से दूसरे राज्य जाने की इजाजत, सुप्रीम कोर्ट ने बता दिया खतरनाक आदमी, जानें क्या है मामला

बेंगलुरु में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट केस में आरोपी है मदनी, सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में मामले की सुनवाई के दौरान उसे सशर्त जमानत दी थी, हालांकि उसके बेंगलुरु से बाहर जाने पर रोक लगा दी थी।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र बेंगलुरु | Updated: April 5, 2021 11:47 PM
crime, Supreme Courtसुप्रीम कोर्ट। (Indian Express)।

सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे, केरल के पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता अब्दुल नजीर मदनी को सोमवार को एक खतरनाक आदमी करार दिया। चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने मदनी की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीडीपी नेता ने केरल जाने देने और मामले में सुनवाई पूरी होने तक वहीं रहने की अनुमति मांगी थी।

पीठ ने जमानत की शर्तों में ढील देने का अनुरोध करने वाली मदनी की याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘आप एक खतरनाक आदमी हैं।’’ पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल हैं। जुलाई 2008 में बेंगलुरु को दहला देने वाले सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मामले में मदनी एक आरोपी है। इस घटना में दो लोग मारे गये थे और 20 अन्य घायल हो गये थे। पीठ ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए निर्धारित कर दी।

पीडीपी नेता ने कहा कि जुलाई 2014 में उन्हें इस शर्त के साथ जमानत मिली थी कि वह अदालत की अनुमति के बगैर बेंगलुरु से बाहर नहीं जाएंगे। मदनी ने अपनी नयी याचिका में कहा है कि मामले में सुनवाई अब तक पूरी नहीं हुई है। साथ ही, पीडीपी नेता ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए केरल जाने देने तथा वहीं रहने देने की अनुमति मांगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में मामले की सुनवाई के दौरान उसे सशर्त जमानत दी थी। अदालत ने मदनी के बेंगलुरु के बाहर जाने पर भी रोक लगा दी थी। मदनी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि छह साल बाद भी मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है। साथ ही मौजूदा परिस्थिति में अभी निकट भविष्य में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोई संभावना नहीं दिख रही है। याचिका में मदनी ने कहा है कि अदालत में इस मामले की सुनवाई बहुत सुस्त गति से चल रही है। इसके अलावा कोई भी पीठासीन अधिकारी भी नहीं है। समय पर गवाह नहीं आने से भी कई बार सुनवाई टली और ट्रायल में देरी हुई है।

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