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IRCTC: छठ पर बिहार जाने की तैयारी कर रहे लोग ध्‍यान दें, सारी सीटें हो चुकी हैं फुल

IRCTC Train Ticket Booking Reservation Online, Chhath Puja 2018: इस बार के छठ पर्व पर बिहार जाने की तैयारी कर रहे लोगों को यह जान लेना चाहिए कि अगर वे ट्रेन से यात्रा करने की सोच रहे हैं तो 4 महीने पहले ही स्लीपर क्लास की सारी सीटें फुल हो चुकी हैं और टिकट वेटिंग में मिलेगा।

इस फोटो का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

IRCTC Train Ticket Booking Reservation Online, Chhath Puja 2018: इस बार के छठ पर्व पर बिहार जाने की तैयारी कर रहे लोगों को यह जान लेना चाहिए कि अगर वे ट्रेन से यात्रा करने की सोच रहे हैं तो 4 महीने पहले ही स्लीपर क्लास की सारी सीटें फुल हो चुकी हैं और टिकट वेटिंग में मिलेगा। रेलवे के नियमानुसार ट्रेनों में रिजर्वेशन अब 4 महीने पहले तक कराया जा सकता है लेकिन बुधवार (11 जुलाई) को जैसे ही छठ के करीब की तारीख खुली तो कुछ ही देर में सारी सीटें बुक हो गईं। इंटरनेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार छठ दिवाली से करीब हफ्ते भर में पढ़ेगा। दिवाली 7 नवंबर की है और छठ 13 नवंबर को। खबर लिखे जाने के वक्त आइआरसीटीसी की वेबसाइट पर ट्रेन सर्च करने पर 9 नवंबर को पटना जाने वाली सभी ट्रेनों की सीटें भरी नजर आईं। गरीब रथ में 70 वेटिंग, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में 331, ब्रह्मपुत्र मेल में 107, मगध एक्सप्रेस में 128, विक्रमशिला एक्सप्रेस में 299, महानंदा एक्सप्रेस में 30, श्रमजीवी में 194, फरख्खा में 36 और तूफान एक्सप्रेस में 12 वेटिंग दिखाई दे रही है। वहीं दिल्ली से पाटलिपुत्र जाने वाली ट्रेनों में नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में 85 और सीमांचल एक्सप्रेस में 102 वेटिंग दिखाई दे रही है।

राजधानी ट्रेनों में भी वेटिंग की लिस्ट लंबी है। हो सकता है कि त्योहार के करीब यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए रेलवे की तरफ से कुछ विशेष ट्रेनें चलाई जाएं। बता दें कि हिंदू तिथि के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्यत: पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

इस त्योहार पर लोग गंगा आदि नदी और तालाब में के पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करते हैं। छठ पूजा की पूरी प्रक्रिया तीन दिन चलती है। इस दौरान व्रत रखने का विधान है। कहा जाता है कि यह पूर्वांचल का सबसे बड़े त्योहार है।

 

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