people who give triple divorce - Jansatta
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तीन तलाक लेने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

तलाक के बारे में शरीयत का रुख एकदम साफ है कि बगैर किसी वजह के तलाक देने की घोषणा करना और एक ही बार में तीन बार तलाक देना तलाक का सही तरीका नहीं है।

Author नई दिल्ली | May 23, 2017 1:11 AM
प्रतिकात्‍मक तस्वीर।

आल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि विवाह विच्छेद के लिए तीन तलाक का सहारा लेने वाले मुसलमानों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। साथ ही काजियों को एक मशविरा जारी किया जाएगा कि वे दूल्हे से कहें कि वह तलाक के लिए इस स्वरूप का अनुसरण नहीं करेंगे। मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक को शरीयत में या इस्लामिक कानून में ‘अवांछनीय परंपरा’ करार दिया और कहा कि पति-पत्नी के बीच विवाद को परस्पर बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए और इस संबंध में उसने शरीयत के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए एक आचार संहिता भी जारी की है। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि तलाक देने के एक स्वरूप के रूप में तीन तलाक की परंपरा को हतोत्साहित करने के इरादे से फैसला किया गया है कि एक बार में तीन बार तलाक देने का रास्ता अपनाने वाले मुसलमानों का ‘सामाजिक बहिष्कार’ किया जाए और इस तरह के तलाक की घटनाओं को कम किया जाए।

मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हलफनामे में कहा है कि उसने 15-16 अप्रैल को अपनी कार्यसमिति की बैठक में तीन तलाक की परंपरा के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित पर किया है। हलफनामे में यह भी कहा गया है, ‘तलाक के बारे में शरीयत का रुख एकदम साफ है कि बगैर किसी वजह के तलाक देने की घोषणा करना और एक ही बार में तीन बार तलाक देना तलाक का सही तरीका नहीं है।’ बोर्ड ने कहा है कि उसने अपनी वेबसाइट, प्रकाशनों और सोशल मीडिया के माध्यम से काजियों को यह मशविरा देने का निर्णय किया है कि निकाहनामा पर हस्ताक्षर करते समय दूल्हे से कहा जाए कि मतभेद होने की स्थिति में वह एक ही बार में तीन तलाक देने का रास्ता नहीं अपनाएगा क्योंकि शरीयत में यह ‘अवांछनीय परंपरा’ है। हलफनामे के सचिव मोहम्मद फजर्लुरहीम के अनुसार, ‘‘निकाह कराते वक्त, निकाह कराने वाला व्यक्ति दूल्हा और दुल्हन दोनों को निकाहनामे में यह शर्त शामिल करने की सलाह देगा कि उसके पति द्वारा एक ही बार में तीन तलाक की परंपरा को अलग रखा जाएगा।’

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हलफनामे का अवलोकन करेगा। इस संविधान पीठ ने 18 मई को ही तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई पूरी की है। मुसलिम समाज में प्रचलित तीन तलाक की परपंरा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संविधान पीठ ने केंद्र सरकार, आल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड और आल इंडिया मुसलिम वुमेन पर्सनल ला बोर्ड व अन्य पक्षों की दलीलों को ग्रीष्मावकाश के दौरान छह दिन सुना था। अब इस मामले में न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा है।

 

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