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जिन्हें वीर सावरकर पर भरोसा नहीं, उनकी सरेआम पिटाई हो: उद्धव ठाकरे

शुक्रवार (23 अगस्त, 2019) को उन्होंने अपने इस बयान के पीछे की वजह बताते हुए पत्रकारों से कहा- ऐसा इसलिए होना चाहिए, क्यों वे (भरोसा न करने वाले) भारत की आजादी में सावरकर के संघर्ष और महत्व को नहीं समझते हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: August 23, 2019 6:57 PM
शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः दीपक जोशी)

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जिन्हें वीर सावरकर पर भरोसा नहीं है, उनकी खुलेआम पिटाई होनी चाहिए। शुक्रवार (23 अगस्त, 2019) को उन्होंने अपने इस बयान के पीछे की वजह बताते हुए पत्रकारों से कहा- ऐसा इसलिए होना चाहिए, क्यों वे (भरोसा न करने वाले) भारत की आजादी में सावरकर के संघर्ष और महत्व को नहीं समझते हैं। यहां तक कि राहुल गांधी ने भी पूर्व में सावरकर का अपमान किया था।

शिवसेना चीफ का यह बयान तब आया है, जब कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने एक दिन पहले दावा किया था कि उसने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में सावरकर की प्रतिमा पर कालिख पोत दी है। ताजा मामले में ठाकरे आगे बोले- सावरकर का अपमान करने वाले लोगों की सार्वजनिक पिटाई से उन्हें आजादी की कीमत पता चलेगी। महाराष्ट्र में सावरकर को काफी सम्मान प्राप्त है।

मीडिया से उन्होंने कहा, “जो लोग सावरकर का सम्मान नहीं करते उन्हें बीच चौराहे पर सबके सामने पीटा जाना चाहिए। ऐसा करने से ही उन्हें अहसास होगा कि देश को आजादी दिलाने के लिए किसने कितनी मेहनत की थी। जिन लोगों ने सावरकर का अपमान किया है वे तब तक आजादी की कीमत नहीं समझेंगे। राहुल गांधी ने भी सावरकर का अपमान किया था।”

CM फडणवीस बोले- मामले पर हो ऐक्शनः स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर के परिवार का बलिदान ‘‘अतुलनीय’’ था और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। यह बात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कही है। फडणवीस बोले- मामले में कड़ी कार्रवाई होगी और किसी को भी कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “स्वातंर्त्यवीर सावरकर कई क्रांतिकारियों के गुरु थे। सावरकर के परिवार ने देश के लिए जो कुर्बानियां दी हैं वे अतुलनीय हैं। इसलिए मेरा मानना है कि उनका सम्मान किया जाना चाहिए।”

बकौल सीएम, “अगर कहीं कुछ हुआ है तो कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह मेरा विचार है कि किसी को भी इस तरह से भड़काना या व्यवहार करना नहीं चाहिए जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो।” (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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