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औद्योगिक महानगर में घर-घर से कूड़ा उठाने वालों के साथ कबाड़ियों के गिरोह ने गुपचुप समझौता कर लिया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने की जद्दोजहद में लगे नोएडा की मुहिम को अपने निजी फायदे के लिए कबाड़ियों का गिरोह बिगाड़ने में लगा है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: January 18, 2021 10:48 AM
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निजी फायदा

खासतौर पर शहर के गांवों के आसपास बने हजारों की संख्या में बने बहुमंजिला फ्लैटों में रहने वाले इस गिरोह की चपेट में आ रहे हैं। इन कबाड़ियों के गिरोह ने घर-घर कूड़ा उठाने के लिए पहुंचने वाली गाड़ियों को चलाने वालों से सौदा कर लिया है। सर्दी में बहुमंजिला फ्लैटों तक पहुंचने वाली कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां कभी सुबह सवेरे 7:30-8:00 बजे के बीच पहुंच रही हैं। तो कभी दोपहर में दो बजे के बाद ये गाड़ियां पहुंच रही हैं। तय समय नहीं होने की वजह से फ्लैटों में रहने वाले चाह कर भी इन गाड़ियों को घर से रोजाना निकलने वाले कचरे को नहीं दे पा रहे हैं।

इससे परेशान होकर वे फ्लैट वाले इलाकों में आने वाले उन लोगों को कूड़ा देने पर मजबूर हो रहे हैं, जो रोजाना तकरीबन 10-11 बजे के बीच वहां रिक्शा लेकर पहुंचते हैं। बकायदा सभी फ्लैटों की घंटी बजाकर घरों से कूड़ा उठाते हैं। जानकारों के मुताबिक रिक्शा लेकर कूड़ा उठाने वाला गिरोह इलाके के कबाड़ियों ने तैयार किया है। इन्हीं लोगों ने प्राधिकरण के सहयोग से घर- घर जाकर कूड़ा उठाने वालों से गुपचुप समझौता कर लोगों को उनके बजाए रिक्शा लेकर आने वालों को कूड़ा देने के लिए बाध्य किया है।

शिरकत का शिकंजा

कई बार विरोध-प्रदर्शनों, आंदोलनों में बढ़चढ़ कर शिरकत करना भी मुसीबत का कारण बन जाता है। खासकर तब जब आंदोलन सत्ता के खिलाफ हो। बीते दिनों यह बात किसान आंदोलन में भी कमोवेश सच होती दिखी। दरअसल हुआ यों कि सिख सियासत में दमखम रखने वाले कई सिख नेताओं को केंद्रीय जांच एजंसी नोटिस भेजकर उनसे उनके पैसों का हिसाब भी मांग रही है।

अब मामला चाहे जो हो लेकिन उनके गले में पड़े नए शिकंजे का तार किसान आंदोलन से जुड़ रहे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि आंदोलनरत किसानों को लंगर मुहैया कराने और कृषि कानूनों की वापसी की मांग ‘नेताजी’ को मंहगी पड़ गई। किसी ने ठीक ही कहा-सरकार से पंगा लेंगे तो ऐसा ही होगा। बहरहाल इन दिनों नेताजी किसानों की बात कम कोर्ट कचहरी की बात ज्यादा कर रहे हैं।

नेता ने काटा फीता

भाजपा के नए-नए प्रभारी इस बार अपने एक कार्यक्रम का फीता ही काटने से चूक गए। पार्टी ने हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में बतौर प्रभारी को मुख्य अतिथि आना था और फीता भी काटना था। लेकिन जब प्रभारी फीता काटने नहीं आए। तो पार्टी के नेता जी ने ही फीता काट दिया और कार्यक्रम की शुरुआत कर दी।

ज्यादा इंतजार

दिल्ली भाजपा में होने वाले कार्यक्रम लेटलतीफी से चल रहे हैं। जहां-जहां पार्टी के अध्यक्ष को आना होता है, वहां पर कार्यकर्ता इंतजार करते नजर आते हैं। निगम चुनाव नजदीक है और पार्टी में नए-नए चेहरों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हाल ही में जब पार्टी ने दूसरी पार्टी के कुछ सक्रिय नेताओं को पार्टी में शामिल होने का न्यौता दिया तो उन्हें भी लंबा इंतजार करना पड़ा। इस पर तपाक से पार्टी के सक्रिय नेता चुटकी लेते नजर आए कि नए वाले नेता जी तो पुराने वालों से भी ज्यादा इंतजार कराते हैं।

टीकाकरण की जल्दी

दिल्ली में कोविड टीकाकरण का दौर शुरू हो गया है। टीका स्वास्थ्यकर्मियों को लगना शुरू हुआ तो दूसरे तथाकथित कोरोना योद्धा भी अपनी बारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि क्यों नहीं सबसे पहले कोरोना योद्धा उन्हें घोषित कर टीका दे दिया जाए। बेदिल को इसी प्रकार के एक योद्धा मिले तो हालचाल पूछने के बाद छूटते कहा कि पहले तो सुरक्षा के बाबत हम लोग पहले पायदान पर थे लेकिन अब पता नहीं हमारी बारी कब आएगी। हमें जल्दी मिल जाए तो काम में मन लगाएं। अन्यथा दिन रात ऊहापोह लगा रहता है और डर अलग से।

बदलती राह

एक वक्त ऐसा भी था जब देश की सबसे पुरानी पार्टी ने भगवान राम को काल्पनिक कहा था। पर कहते हैं ना कि वक्त बदलते देर नहीं लगती। आज वही पार्टी भगवान राम के अन्नय और परम भक्त हनुमान को लेकर राजनीति करने में तुली है। यही नहीं आज विपक्ष की अन्य पार्टियों से भी एक कदम आगे निकल कर पुरानी पार्टी के नेताओं ने चांदनी चौक में उस स्थान पर हनुमान चालीसा का पाठ किया, जहां हनुमान का मंदिर यह कह कर हटा दिया गया कि मंदिर अवैध कब्जे का हिस्सा है। इसी वजह से कहा जाता है कि राजनीति क्या से क्या ना करवा दे।

साथ ही मंदिर पुननिर्माण को लेकर पार्टी बीते कई दिनों से आंदोलनरत भी है और मांग कर रही है कि राम के परम भक्त हुनमान का मंदिर निष्ठा और श्रद्धा के साथ बनवाया जाए। वहीं, विपक्ष के नेता ने इस मुद्दे पर चुटकी लेते हुए यह कहते नहीं थक रहे हैं कि जो पार्टी कभी भगवान राम के अस्तित्व को ही नहीं स्वीकार रही थी। आज दौर बदला है। आज वही पार्टी भगवान राम के परम भक्त के मंदिर पूननिर्माण की मांग कर रही है।
-बेदिल

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