Dattatreya Hosabale On Sanatan Dharma: आरएसएस के दूसरे सबसे बड़े नेता दत्तात्रेय होसबले ने मंगलवार को डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन पर हमला करते हुए सनातन धर्म की तुलना बरगद के पेड़ से की। उन्होंने कहा कि सनातन शाश्वत है और इसे खत्म करने की मांग करने वाले राजनीतिक बयानों से मिटाया नहीं जा सकता।

पीटीआई को दिए गए एक इंटरव्यू में दत्तात्रेय होसबले ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि मुझे लगता है कि प्रकाश नहीं होना चाहिए या मुझे लगता है कि परछाई नहीं होनी चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि वे गायब हो जाएंगी।” उन्होंने कहा, “सनातन इस राष्ट्र की आत्मा है। यह कोई धार्मिक प्रथा नहीं, बल्कि एक मूल्य और एक विश्वदृष्टि है।”

लोगों ने चुनाव में उन्हें जवाब दिया- आरएसएस नेता

आरएसएस नेता ने कहा, “यह उनकी राय है और लोगों ने चुनाव में इसका जवाब दिया है, लेकिन एक बात देखिए, सनातन धर्म खत्म नहीं होगा।” उन्होंने कहा, “सनातन वह है जो शाश्वत रूप से विद्यमान है। शाश्वतता ही सनातन है। यह एक वृक्ष की तरह है, एक बरगद के वृक्ष की तरह। 100 या 200 साल बाद भी बरगद का वृक्ष वहीं खड़ा रहता है।”

होसबले ने कहा कि यह पौधा पुराना हो सकता है, क्योंकि इसका तना पुराना है, लेकिन हर मौसम में इसमें नए पत्ते और फूल उगते हैं। उन्होंने कहा, “तो वह वृक्ष ताजा है, सदा ताजा। सनातन का अर्थ यही है। यही ‘नित्य नूतन और चिर प्राचीन’ है। यानी, यह सदा ताजा और सदा प्राचीन है। तो यह एक अद्भुत संयोजन है। यही हमारी सभ्यता है।”

हमारी सभ्यता की यादें हजारों साल पुरानी- दत्तात्रेय होसबले

दत्तात्रेय होसबले ने कहा, “हमारी सभ्यता की यादें हजारों साल पुरानी हैं, सहस्राब्दियों पुरानी हैं। सभ्यता की यादें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम एआई और अन्य तकनीकी प्रगति जैसी आधुनिकता को स्वीकार नहीं करते या उसका स्वागत नहीं करते।” उन्होंने कहा, “हम नई तकनीक का स्वागत करते हैं, हम उसे संजोते हैं, हम उसका आनंद लेते हैं, हम उसका जश्न मनाते हैं।” उन्होंने उदयनिधि के बारे में कहा, “एक तरह से, यह सज्जन भी सनातन धर्म का पालन कर रहे हैं, लेकिन शायद वे सोचते हैं कि सनातन धर्म ऊंची जाति का है।”

तमिलनाडु के पूर्व डिप्टी सीएम ने क्या कहा था?

तमिलनाडु विधानसभा में पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को सनातन धर्म के उन्मूलन की मांग वाले अपने बयान को दोहराया।
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि ने कहा कि विपक्ष तमिल गीत “तमिल थाई वझथु” को हाशिए पर धकेलने के किसी भी प्रयास की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने कहा, “सनातन धर्म, जो लोगों को विभाजित करता है, उसे निश्चित रूप से खत्म कर देना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुई ऐसी घटना एक गलती थी और आपको इस विधानसभा में इसे दोबारा होने नहीं देना चाहिए। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उदयनिधि स्टालिन ने आगे कहा कि न केवल विधानसभा में, बल्कि तमिलनाडु में आयोजित किसी भी सरकारी कार्यक्रम या आयोजन में, “तमिल थाई वझथु” को हमेशा प्राथमिक स्थान दिया जाना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…