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विश्वेश तीर्थ स्वामी थे उदार संत जो करते थे इफ्तार का आयोजन, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उनका बेहद सम्मान करता था।

Author बेंगलुरू | Updated: December 29, 2019 6:23 PM
पीएम मोदी के साथ विश्वेशा तीर्थ स्वामी जी। (फाइल फोटो)

पेजावर मठ के विश्वेश तीर्थ स्वामीजी एक हिंदू संत थे जिन्होंने उन्होंने अपना पूरा जीवन हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार में लगा दिया, लेकिन खुद को एक उदारवादी चेहरे के तौर पर पेश किया। स्वामीजी का रविवार को निधन हो गया। हिंदूवादी धार्मिक कार्यों जैसे गोरक्षा में उनकी गहरी आस्था थी और रामजन्मभूमि आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।

विश्वेश तीर्थ स्वामीजी उडुपी के श्रीकृष्ण मठ परिसर में हाल तक रमजान के दौरान मुस्लिमों के लिए इफ्तार का आयोजन भी किया करते थे। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे स्वामी जी का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह सामाजिक रूप से सक्रिय थे और अपने आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ साथ दलितों की कॉलोनियों में जाकर उनसे मिलते थे।

अपने समावेशी दृष्टिकोण के कारण आठ दशक के अपने जीवनकाल में स्वामी जी लाखों श्रद्धालुओं के प्रिय बने। स्वामी जी विश्व हिंदू परिषद से भी करीब से जुड़े थे। इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उनका बेहद सम्मान करता था। भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने 1992 में उनसे संन्यास दीक्षा ली थी।

स्वामीजी के बाद उनके कनिष्ठ विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी के उनका स्थान लेने की संभावना है। विश्वेश तीर्थ स्वामी का आज उडुप्पी स्थित श्रीकृष्ण मठ में निधन हो गया था। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को विमान द्वारा उडुप्पी से बेंगलुरू लाया गया। बेंगलुरू में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान राज्य के सीएम बीएस येदियुरप्पा भी मौजूद रहे।

पीएम मोदी ने भी विश्वेश तीर्थ स्वामी के निधन पर ट्वीट कर शोक जताया। पीएम मोदी ने लिखा कि “मैं सौभाग्यशाली रहा, जो मुझे श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी से सीखने का मौका मिला। हाल ही में गुरू पूर्णिमा के पवित्र मौके पर हमारी मुलाकात हुई थी, जो काफी यादगार रही। उनका ज्ञान सबसे अलग था। उनके असंख्य अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।”

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