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पेगासस जासूसी केसः निजता नष्ट, अधिकारों पर अटैक…भय-असुरक्षा में खुलकर फोन पर बात भी नहीं कर सकते लोग- बोले कांग्रेसी नेता

विपक्षी नेताओं ने इस मसले को लेकर सवाल उठाया कि क्या भारत "पुलिस स्टेट" बन गया है?

Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: July 19, 2021 12:38 PM

पेगासस जासूसी केस को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने रविवार (18 जुलाई, 2021) को कहा कि ये खुलासे (स्पाइवेयर के निशाने पर भारतीय सेलफोन नंबरों का होना) बेहद गंभीर और चौकाने वाले हैं। एक तरह से यह हमारी निजता और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।

राज्य सभा में कांग्रेस के उप-नेता आनंद शर्मा ने बताया, यह मुद्दा उठाया जाना चाहिए। यह देश की निगरानी की बात है। यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह हमारे संवैधानिक लोकतंत्र की व्यवस्था और लोगों की निजता के साथ समझौता करता है। सरकार यह कह किनारे नहीं हट सकती कि उसे इस मामलों में चीजों को वेरिफाई करना होगा। वे कौन सी ऐजेंसियां हैं, जिन्हें मालवेयर (एक किस्म का कंप्यूटर वायरस) मिला? कौन ऐजेंसियां हैं, जो पेगासस को लेकर आईं? सरकार इस चीज से भाग नहीं सकती। उन्होंने आगे बताया, “विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, संपादकों, सुप्रीम कोर्ट के जजों और जाने-माने कारोबारियों के फोन टैप किए गए। जो सामने आ रहा है वह अतीत में संसद के पटल पर व्यक्त की गई आशंकाओं की पुष्टि है…यह चर्चा या बहस का सवाल नहीं है। इस मामले में खुली जांच की जरूरत है। सरकारी नहीं…और इसके लिए कानून और संविधान के तहत जवाबदेही तय करने की भी जरूरत है…हम इसी के लिए लड़ेंगे।”

बकौल शर्मा, “निजता पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। संवैधानिक अधिकारों पर अटैक हो रहा है। देश में ऐसा भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है, जिसमें लोग खुलकर बात भी नहीं कर सकते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि आपको नहीं मालूम कि कौन आपकी जासूसी कर रहा है…और ऊपर से…अगर आप राजद्रोह और यूएपीए पर सवाल करेंगे, तो धमकाएं जाएंगे। क्या हमारा मुल्क पुलिस स्टेट में बदल रहा है?”

सीपीआई के संसदीय दल के नेता बिनय विस्वम ने कहा कि वह राज्यसभा में नोटिस देंगे, ताकि अन्य चीजों को छोड़कर इस मसले पर चर्चा हो। वहीं, एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी बोले कि सरकार यह खुलासा करे कि क्या उसने एनएसओ की सेवाओं लीं, जिसका पेगासस स्पाइवेयर है। हालांकि, कुछ नेताओं ने कहा कि यह मामला संसद में उठाया जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर सोमवार सुबह अंतिम फैसला लेंगे कि वे इसे मॉनसून सत्र के पहले ही दिन सदन में उठाएंगे या फिर जासूसी के तहत निशाना बनाए गए नेताओं और जजों के नाम सामने आने का इंतजार करेंगे।

क्या है पूरा मामला?: लीक डेटा के आधार पर की गई एक इंटरनेशनल मीडिया एसोसिएशन की जांच के बाद यह साबित करने के लिए और सबूत मिले हैं कि इजराइल में ‘एनएसओ ग्रुप’ के सैन्य दर्जे के मालवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक असंतुष्टों की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है। पेरिस स्थित पत्रकारिता संबंधी गैर-लाभकारी संस्था ‘फॉरबिडन स्टोरीज’ और मानवाधिकार समूह ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ द्वारा हासिल की गई और 16 समाचार संगठनों के साथ शेयर की गई 50,000 से अधिक सेलफोन नंबरों की लिस्ट से पत्रकारों ने 50 देशों में 1,000 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की, जिन्हें एनएसओ के ग्राहकों ने संभावित निगरानी के लिए कथित तौर पर चुना।

वैश्विक मीडिया संघ के सदस्य ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार, जिन लोगों को संभावित निगरानी के लिए चुना गया, उनमें 189 पत्रकार, 600 से अधिक नेता और सरकारी अधिकारी, कम से कम 65 व्यावसायिक अधिकारी, 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। ये पत्रकार द एसोसिएटेड प्रेस, रॉयटर, सीएनएन, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, ले मोंदे और द फाइनेंशियल टाइम्स जैसे संगठनों के लिए काम करते हैं। एमनेस्टी ने भी बताया कि उसके फोरेंसिक अनुसंधानकर्ताओं ने पता लगाया है कि 2018 में इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के ठीक चार दिन बाद उनकी मंगेतर हातिस चंगीज के फोन में एनएसओ समूह के अपना पेगासस स्पाइवेयर सफलतापूर्वक डाला गया था। कंपनी को पहले खशोगी पर एक अन्य जासूसी मामले में आरोपी बनाया गया था।

हालांकि, एनएसओ ग्रुप ने समाचार एजेंसी एपी के सवालों का ईमेल के जरिए जवाब देते हुए इस बात से इनकार किया कि उसने “संभावित, पिछले या मौजूदा लक्ष्यों की कोई सूची” बना रखी है। एनएसओ ने एक अन्य बयान में ‘फारबिडन स्टोरीज’ की रिपोर्ट को “गलत धारणाओं और अपुष्ट सिद्धांतों से पूर्ण’’ बताया। कंपनी ने अपने दावे को दोहराया कि वह केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों को ‘‘आतंकवादियों और प्रमुख अपराधियों’’ के खिलाफ इस्तेमाल के लिए प्रौद्योगिकी बेचती है, लेकिन उसके आलोचकों का कहना है कि कंपनी के ये दावे झूठे हैं। उनका कहना है कि पेगासस स्पाइवेयर का बार-बार दुरुपयोग निजी वैश्विक निगरानी उद्योग के विनियमन के पूर्ण अभाव को उजागर करता है।

फिर चर्चा में पेगाससः दरअसल, पेगासस इजरायली स्वाइवेयर है। इसे वहां की साइबर सिक्योरिटी कंपनी एनएसओ ने बनाया है। भारत में यह फिर से सुर्खियों में है। कारण- दावा है कि इसके जरिए भारतीय नेताओं और पत्रकारों की जासूसी की गई। बताया गया कि विश्व भर में सैकड़ों जर्नलिस्ट्स और अन्य चर्चित हस्तियों के फोन टैप किए गए। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट “द वायर” के अनुसार, डेटाबेस में 40 पत्रकार, तीन विपक्षी नेता, एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति, मोदी सरकार के दो मंत्री व सुरक्षा एजेंसियों के वर्तमान और पूर्व चीफ के अलावा कुछ कारोबारी भी शामिल हैं। इनके नाम डेटा में होगा, इस ओर संकेत करता है कि ये जासूसी का निशाना थे। हालांकि, इनके फोन हैक हुए या नहीं? यह फोन की फॉरेंसिक जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।

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