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पेगासस फोन टेप कांड, यानी सरकार का सर्विलांस इंडिया

आज से करीब 47 वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने विरोधी दल की बैठक का फोन टेप कराया था और जिसके कारण उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस घटना को आज भी 'वॉटरगेट कांड' के नाम से जाना जाता है।

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में nso ग्रुप के अधिकारी पेगासस के बारे में सफाई देते। फोटोः रायटर)

विपक्ष या मीडिया कुछ भी कर ले, सरकार पर लाख आरोप-प्रत्यारोप लगा दे, लेकिन उसकी दाल गलने वाली नहीं है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल की चमड़ी बहुत मोटी और काफी मजबूत है। जो एक दीवार की तरह हर तरह के आरोपों को काट/झुठला देती है। सच है कि साधु भी आसानी से अपनी कमियां नहीं स्वीकारता, क्योंकि उसे साख खोने का डर सताता है। जबकि उसे यह भी पता होता है कि उसकी गलती/कमी/कमजोरियां कभी न कभी सार्वजनिक जरूर होंगी। लेकिन तात्कालिक लाभ के लिए हर कोई झूठ का सहारा जरूर लेता है। तभी वह कोई रक्षा कवच तैयार करने के बाद ही किसी अवैधानिक कार्य को करने की योजना बनाता है।

इजराइल की कंपनी एनएसओ का कहना है कि वह जासूसी करने वाली अपनी सॉफ्टवेयर पेगासस केवल सरकार को ही बेचती है। पेगासस स्पाइवेयर… यह नाम पहले वर्ष 2019 में पहली बार उस समय चर्चा में आया था, जब कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप से डाटा चोरी होने की रिपोर्ट सामने आई थी। हमारा भारत अमेरिका नहीं है, जहां आज से करीब 47 वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने विरोधी दल की बैठक का फोन टेप कराया था और जिसके कारण उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस घटना को आज भी ‘वॉटरगेट कांड’ के नाम से जाना जाता है।

अभी हाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर होने वाले पूर्व आईटी मंत्री एवं एक बार फिर अपने लिए सरकार में जमीन तलाशते भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद और स्तरहीन करार दिया है। उन्होंने भाजपा सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि कांग्रेस पंजाब और राजस्थान में अंदरूनी संकट से जूझ रही है, इसलिए वह सरकार पर आधारहीन फोन टेप करने का आरोप लगा रही है। यहां तक कि स्वयं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री तथा वर्तमान आईटी मंत्री अश्वनी वैष्णव सब इस बात से इंकार करते हुए कहते हैं कि फोन टेप या जासूसी कांड का आरोप भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने का प्रयास है, जो कांग्रेस के कार्यकाल में ही होता था।

ज्ञात हो कि पेगासस टेप कांड की तथाकथित सूची में आईटी मंत्री अश्वनी वैष्णव का भी नाम शामिल है। गृहमंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि विपक्ष का रुख लोकतंत्र की गरिमा के कतई अनुकूल नहीं है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष के तर्क को काटते हुए कई तर्क दिए और यहां तक कहा कि सभी सांसदों, राजनीतिक दलों से तीखे से तीखे सवाल पूछने का आग्रह करता हूं, पर सौहाद्रपूर्ण वातावरण में सरकार को जवाब देने का वह अवसर दें। ऐसा इसलिए, क्योंकि जनता तक पूर्ण सत्य पहुंचना चाहिए। इससे लोकतंत्र मजबूत होता है। उसे ताकत मिलती है। सरकार पर जनता का विश्वास बढ़ता है और देश के विकास को गति मिलती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी कोमा में चली गई है और भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने को पचा नहीं पा रही है। इजराइली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने इस आरोप को गलत और गुमराह करने वाला बताया कि पेगासस स्पाइवेयर के जरिये कई भारतीय पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, न्यायाधीशों के फोन टेप किए गए। कंपनी ने कहा कि वह मानहानि का मुकदमा दाखिल करने पर विचार कर रही है।

इधर, नई दिल्ली स्थित कांग्रेस पार्टी कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी और रणदीप सुरजेवाला ने सत्तारूढ़ दल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए गृहमंत्री से इस्तीफा मांग लिया और कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यह मामला कांग्रेस सदन में भी उठाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। यह तो सर्विलांस इंडिया हो गया है। साथ ही नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का नाम अब भारतीय जासूस पार्टी कर दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी इसके माध्यम से आपके घर पहुंच गई है और आपकी बेटी—बहुओं की बात से लेकर हर चीज पर सरकार की निगाह है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार का यह कृत्य देशद्रोह के तहत आता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बार—बार कहा है कि देश के किसी भी नागरिक की निजता का हनन नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह उसका संविधानप्रदत्त मौलिक अधिकार है। लेकिन, सरकार पर इसका कोई असर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना है कि इसके लिए केवल केंद्रीय मुख्य गृह सचिव की स्वीकृति के बाद ही किसी का फोन टेप किया जा सकता है। विशेष परिस्थिति में केवल उनका ही फोन टेप किया जा सकता है जिन पर किसी गंभीर अपराध में मामला दर्ज हो या जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा हो। लेकिन, यहां तो फोन टेपिंग के रोज तीन सौ आदेश दिए जाते हैं। यह कोई भारतीय मीडिया द्वारा निर्मित मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा भारत सरकार का पर्दाफाश किया गया है।

कहा तो यह भी जा रहा है कि अभी कम से कम दस दिनों तक इस विषय में खुलासा होता रहेगा। पेगासस स्पाइवेयर मामले को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि पेगासस स्पाइवेयर एक कमर्शियल कंपनी है जो पेड कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करती है। ऐसे में भारतीय ‘ऑपरेशन’ को अंजाम देने के लिए अगर केंद्र नहीं तो किसने उस कंपनी को पैसे दिए थे?

अब सभी सत्तारूढ़ दल से मामले की संसदीय जांच कमेटी अथवा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से जांच कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि सच सामने आ सके। लेकिन, सत्तारूढ़ दल इस बात का विरोध करता है कि संसद में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षमंत्री ने जो कहा, वही सच है और इस मुद्दे की जांच करने का कोई औचित्य नहीं है। अब देखना है कि यह पेगासस फोन टेप कांड कब तक गरम रहता है और विपक्ष इसके कारण कितने दिनों तक संसद के मानसून सत्र को बाधित रखता है।

वैसे, विपक्ष की आवाज को दबाना देश की जनता में एक संदेह भी पैदा करता है, क्योंकि देश की जनता पूर्णरूप से सरकार की ‘गुलाम’ होती है, जिसे सबने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में देखा। उसी ‘गुलामी’ का परिणाम है कि पूर्ण बहुमत से सरकार का गठन हुआ। अब जनता के उस विश्वास को यदि ठेस पहुंचाया गया तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सरकार के अड़ियलपन का उत्तर जनता जरूर देगी। मुद्दा यही रहेगा… सरकार किसी की सुनती नहीं। स्वाभाविक तौर पर विपक्ष इसका भरपूर लाभ उठाएगा। ऐसे में बेहतर है कि सरकार इस पूरे प्रकरण की जांच जरूर कराए, ताकि सांप भी मर जाए और…।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। 

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