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पेगासस जासूसीः CBI के पूर्व चीफ का नाम भी लिस्ट में, अनिल अंबानी की भी हुई निगरानी

द वायर के मुताबिक CBI के पूर्व चीफ आलोक वर्मा को बर्खास्त करने के कुछ ही घंटों बाद उनके फोन नंबर इजरायली स्पाइवेयर पेगासस की निगरानी लक्ष्यों की सूची में जोड़ दिए गए थे।

दुनिया में कई देशों द्वारा Pegasus Spyware का इस्तेमाल किया जा रहा है (फोटोः द इंडियन एक्सप्रेस)

पेगासस स्पाईवेयर विवाद में पता चला है कि अक्टूबर 2018 में सीबीआई प्रमुख के पद से हटाए जाने के बाद तत्कालीन सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के फोन नंबर भी पेगासस की संभावित निगरानी सूची में जोड़ दिए गए थे। उनके अलावा उद्योगपति अनिल अंबानी और दलाई लामा के करीबियों की भी जासूसी हुई।

द वायर के मुताबिक CBI के पूर्व चीफ आलोक वर्मा को बर्खास्त करने के कुछ ही घंटों बाद उनके फोन नंबर इजरायली स्पाइवेयर पेगासस की निगरानी लक्ष्यों की सूची में जोड़ दिए गए थे। हालांकि, नंबरों को शामिल करने का मतलब यह नहीं हो सकता कि उनका फोन पेगासस से संक्रमित था। इसकी पुष्टि केवल फोरेंसिक विश्लेषण के माध्यम से की जा सकती है। वर्मा को सरकार के साथ विवाद के बाद 2018 में बेवजह पद से हटा दिया गय था।

उधर, इजरायली कंपनी NSO ने कहा है कि वह अपने स्पाइवेयर को केवल सरकारों को बेचता है। उसने रिपोर्टों को गलत बताते हुए खारिज कर दिया है।

पेगासस जासूसी मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी के साथ एडीए समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन भी हैक होने की आशंका जतायी गयी है। द वायर कहता है कि जिस फोन नंबरों का अनिल अंबानी और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के एक अन्य अधिकारी ने उपयोग किया, वे नवंबर उस लीक सूची में शामिल है, जिसका विश्लेषण पेगासस परियोजना समूह के मीडिया भागीदारों ने किया था।

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