देश में सड़कों पर सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन चालक और राहगीर सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। शुरुआती नकदी रहित उपचार योजना (कैशलेस) के तहत दी गई स्वास्थ्य सेवाओं के आंकड़ों से यह रपट सामने आई है।
यह रपट केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन चालकों की दी गई आपात सेवाओं के आधार पर तैयार की है। रपट में बताया है कि शुरुआती योजना को 6 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों में शुरू किया गया था। इसके तहत कुल 6833 उपचार के अनुरोध आए थे, जिसमें से 5480 पीड़ित ही पात्र पाए गए थे।
रपट में ही बीते पांच सालों में हुए हादसों की श्रेणियां दर्ज की गई है। इन श्रेणियों में सबसे अधिक हादसे दुपहिया वाहन चालक और पैदल यात्रियों के साथ सड़क मार्ग पर हुए हैं और बीते पांच साल के अंदर दोनों ही श्रेणी में हर साल इस संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। वर्ष 2024 के वर्ष में कुल 94780 यात्री सड़क हादसे के शिकार हुए थे, जबकि वर्ष 2023 में ऐसे यात्रियों की संख्या 94446 दर्ज की गई थी।
इसी प्रकार सड़कों पर दुपहिया चालक वर्ष 2024 में 223446 थे, जो कि वर्ष 2023 में 231160 दर्ज किए गए थे। जो कि सड़क दुर्घटना के मामलों में बढ़ोतरी के स्पष्ट संकेत है। इन दोनों श्रेणी के बाद सबसे अधिक हादसे कार- टैक्सी जैसे हलके वाहनों के साथ दर्ज किए गए है। योजना का शुरुआती चरण चंडीगढ़, असम, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और पुडुचेरी में किया गया था।
दुर्घटना की तारीख से सात दिन तक उपचार दिया जा सकेगा
योजना के तहत किसी भी सड़क दुर्घटना की स्थिति में प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से सात दिन तक उपचार दिया जा सकेगा। इन सात दिन में पीड़ित के लिए डेढ़ लाख रुपए तक की नकदी रहित उपचार सेवा दी जाएगी। जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामले में अधिकतम 24 घंटे और जीवन के लिए घातक मामलों में 48 घंटे तक मरीज के स्थिर होने तक उपचार दिया जाएगा।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, चोटों और मौतों के मामले पर चिंता को कम करने के लिए हादसों का एकीकृत डेटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पीएम गतिशक्ति योजना में एकीकरण योजना और डिजाइन चरण में संभावित क्षेत्रों को चिहिन्त कर रही है।
नकदी रहित उपचार योजना (कैशलेस) के तहत दी गई स्वास्थ्य सेवाओं के आंकड़ों से यह रपट सामने आई है। यह रपट केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन चालकों की दी गई आपात सेवाओं के आधार पर तैयार की है। रपट में बताया है कि शुरुआती योजना को 6 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों में शुरू किया गया था। इसके तहत कुल 6833 उपचार के अनुरोध आए थे, जिसमें से 5480 पीड़ित ही पात्र पाए गए थे।
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भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2019 और 2020 में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में कुछ कमी आई थी, लेकिन उसके बाद से लगातार ये संख्या बढ़ती गई है। 2022 में तो इस देश में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुईं और इजाफा 11.9 प्रतिशत का था। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
