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SUPRME COURT में वकील की कुर्सी के लिए होने लगी बहस! अटॉर्नी जनरल ने किया GAME OF THRONES का जिक्र

संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के केन्द्र के निर्णय को सबसे पहले शीर्ष अदालत में चुनौती देने वाले अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा पहली कतार मे विराजमान थे। वह इस मामले में बहस करने वाले अधिवक्ता के लिये कुर्सी छोड़ने के इच्छुक नहीं थे।

Author नई दिल्ली | Published on: December 11, 2019 7:28 AM
सुप्रीम कोर्ट, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स -ANI)

उच्चतम न्यायालय में मंगलवार (10 दिसंबर, 2019) को कश्मीर प्रकरण पर सुनवाई के दौरान उस समय विचित्र नजारा देखने को मिला जब पहली कतार में बहस करने वाले अधिवक्ता के निमित्त कुर्सी पर एक अन्य वकील ने बैठने पर जोर दिया। संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के केन्द्र के निर्णय को सबसे पहले शीर्ष अदालत में चुनौती देने वाले अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा पहली कतार मे विराजमान थे। वह इस मामले में बहस करने वाले अधिवक्ता के लिये कुर्सी छोड़ने के इच्छुक नहीं थे। शर्मा के इस आचरण से न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ बेहद नाराज हुयी।

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत शामिल हैं। संविधान पीठ ने शर्मा से कहा, ‘‘आप मामले में बहस नहीं कर रहे हैं। कृपया उन्हें (वरिष्ठ अधिवक्ता) आने दीजिये। आप कुर्सी पर कब्जा किये हुए हैं।’’ शर्मा याचिकाकर्ताओं के लिये लगी कुर्सियों की पहली कतार में बैठै थे। वह खड़े हुये और कहा कि उन्होंने पहले ही कुर्सी छोड़ दी है।

शर्मा ने कहा, ‘‘यदि न्यायालय कहेगा, मैं न्यायालय कक्ष से भी चला जाऊंगा।’’ इस पर पीठ ने कहा, ‘‘यह आपकी मर्जी है। वरिष्ठ अधिवक्ता के प्रति थोड़ा तो सम्मान रखिये।’’ शर्मा ने जब कुछ कहने का प्रयास किया तो पीठ ने कहा, ‘‘कृप्या अब और नहीं।’’ हालांकि, अन्य अधिवक्ताओं की ओर इशारा करते हुये उन्होंने कहा, ‘‘हर कोई बोल रहा है क्योंकि एम एल शर्मा यहां हैं।’’ पीठ ने स्पष्ट किया कि बहस शुरू करने वाले अधिवक्ता को उनकी मदद कर रहे वकीलों के साथ पहली कतार में आना चाहिए। न्यायालय में मौजूद अटार्नी जनरल ने इस पर कहा कि एक ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ था और एक यह ‘गेम आफ चेयर्स’ है।

जम्मू कश्मीर प्रशासन का प्रतिनिधित्व कर रहे सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शर्मा की याचिका में कोई प्लीडिंग्स नहीं है और न्यायालय को पहले इसका ही निस्तारण कर देना चाहिए। एक अन्य याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्त राजीव धवन ने पीठ से कहा कि न्यायालय ने शर्मा से पहले अपनी याचिका में बदलाव करने के लिये कहा था। इस पर शर्मा ने कहा, ‘‘मैंने अपनी याचिका मे बदलाव कर लिये हैं। मैं अंत में बहस करूंगा। मैं एक ओर बैठा हूं। मुख्य कुर्सी पर बहस करने वाले अधिवक्ता को आसीन होने दिया जाये।

इससे पहले, संविधान पीठ के सदस्यों के न्यायालय में एकत्र होते ही शर्मा ने कहा कि इस मामले की शीर्ष अदालत के सबसे बड़े कक्ष में सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि स्थान के अभाव की वजह से अनेक वकील इस कक्ष में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने इस कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने का भी अनुरोध किया और कहा कि यह बहुत बड़ा मामला है। इस पर पीठ ने कहा, ‘‘क्या खुले मैदान में सुनवाई करना ठीक रहेगा?’’ साथ ही पीठ ने कहा, ‘‘कृप्या इसे अब यहीं खत्म कीजिये।’’

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