ताज़ा खबर
 

पीडीपी सांसद ने पार्टी और लोकसभा से दिया इस्‍तीफा, कहा- बहुत पहले ही टूट जाना चाहिए था भाजपा के साथ गठबंधन

हामिद कारा 2002 में मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार में वित्त मंत्री रह थे।उन्होंने राज्य की वर्तमान सरकार पर घाटी में जारी हिंसा से निपटने में पूरी तरह असफल रहने का आरोप लगाया है।
Author श्रीनगर | September 15, 2016 17:43 pm
पीडीपी सांसद तारिक हामिद कारा ने पार्टी और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। (Photo: ANI)

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद हामिद कारा ने गुरूवार को पार्टी और लोकसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया। हामिद कारा 2002 में मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार में वित्त मंत्री रह थे। हामिद कारा ने आरोप लगाया है कि राज्य की वर्तमान पीडीपी बीजेपी गठबंधन सरकार घाटी में जारी हिंसा से निपटने में पूरी तरह असफल रही है। उन्होंने कश्मीर में भारी हिंसा और सूबे में सरकार की नाकामी की वजह से पद और पार्टी से इस्तीफा दिया है। इससे पहले हामिद ने राज्य में सरकार गठन के लिए पीडीपी-बीजेपी गठबंधन का भी विरोध किया था।

वहीं, पीडीपी में बगावत से बीजेपी ने खुद को किनारे कर लिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये पीडीपी का अंदरुनी मामला है और इससे बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है, उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी के बीच विकास के एजेंडे को लेकर गठबंधन हुआ है। पीडीपी सांसद कारा का ये कदम सीएम महबूबा मुफ्ती पर बीजेपी से गठबंधन पर फिर से विचार करने को लेकर दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

तारिक कारा ने मीडिया से बातचीत में कहा,’पीडीपी राष्ट्रीय स्वयं संघ द्वारा संचालित फासिस्ट पार्टी बीजेपी की सहयोगी बन गई है।’ कारा 2014 के लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर के श्रीनगर संसदीय सीट पर जीत दर्ज लोकसभा पहुंचे थे। वह दिवंगत नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के बहुत नजदीक थे। कारा पीडीपी के फाउंडर मेम्बर रहे हैं। कारा ने शुरू में ही पीडीपी बीजेपी गठबंधन का विरोध किया था और कश्मीर में जारी हिंसा पर सरकार द्वारा लिए गए एक्शन पर अपना विरोध दर्ज कराया था। गौरतलब है कि कश्मीर में 8 जून को सेना के साथ मुठभेड़ में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में अब तक 80 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 10 हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

Read Also: SP में नेताजी के फैसले को काटने की किसी में नहीं हैसियतः शिवपाल

कारा का जन्म 28 जून 1955 में हुआ था। वह जम्मू कश्मीर के सबसे युवा वित्त मंत्री रह चुके हैं। कारा 2004 में श्रीनगर के बाटामालू सीट से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इससे पहले 2003 में वह विधान परिषद् सदस्य रह चुके थे। कारा ने 1979 में कश्मीर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने 1999 में पीडीपी की स्थापना के साथ ही सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।

Read Also: मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस MLA ने छोड़ी अपनी सीट

तारिक हामिद कारा को अपने चाचा से राजनीति की ट्रेनिंग 15 साल की उम्र में ही मिलनी शुरू हो गई थी। उनके चाचा ख्वाजा गुलाम मोही उद दीन कारा जम्मू कश्मीर की राजनीति में बड़ा नाम हुआ करते थे। एक उत्साही राजनीतिज्ञ और काबिल प्रशासक के रूप में कारा ने 2005 में राज्य के शहरी विकास मंत्री एवं वन मंत्री के रूप में कैबिनेट में अपनी जगह बनाई। पद संभालने के मात्र 10 महीने के बाद ही कारा उनके बेहतरीन काम को देखकर उन्हें वित्त और कानून मंत्रालय का प्रभार सौंप दिया गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. Mahendra Sharma
    Sep 16, 2016 at 2:44 am
    BJP apni hi sahayogi party ki kalahe ko nahi nipta.pa Rahi hai.to Kashmir ki samasya kaise niptayegi? BJP ke karyakarta aur.pravakta dono ko baat Karne me to U.S.A.ki certificate mili hai.jaise ki modi ko.bjp walon sambhaal Jao.aur sudhar Jao.desh ko chalane ke liay bahot balidaan karna padta hai.aur tum logon ko o ata nahi.kyu ki kabhi tum logon ne Kuch balidaan Kiya hi nahi hai.shikho .jara Congress se.jisne 1nahi?2 nahi?3 nahi.4/4 kurvaniya ki hain.aise hi nahi bharat desh aajka mahan Bharat
    (0)(0)
    Reply