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अपनी गिरती साख के लिए बीजेपी को जिम्मेदार मान रही है पीडीपी, गठबंधन पर सस्पेंस जारी

मोहम्मद सईद के जनाजे में चार हजार से भी कम लोगों के शामिल होना पार्टी के लिए चिंता का कारण बन गया है। एक साल में लोकप्रियता में आई गिरावट के लिए पार्टी भाजपा के साथ बेमेल गठबंधन को जिम्मेदार मान रही है।

पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

पीडीपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के जनाजे में चार हजार से भी कम लोगों के शामिल होना पार्टी के लिए चिंता का कारण बन गया है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पीडीपी ने कश्मीर घाटी में  28 में से 26 सीटें जीती थी। एक साल में लोकप्रियता में आई गिरावट के लिए पार्टी भाजपा के साथ बेमेल गठबंधन को जिम्मेदार मान रही है।

शेर ए कश्मीर स्टेडियम से शुरू हुई अंतिम यात्रा मुफ्ती के होमटॉउन बिजबेहरा से होकर गुजरी, हैरत की बात यह है कि अंतिम यात्रा के समय बिजबेहरा के लोगों ने अपनी दुकानें तक मुफ्ती के सम्मान में बंद नहीं की। पार्टी में कई लोगों के विचार है कि लोगों ने उन्हें भाजपा से हाथ मिलाने पर माफ नहीं किया है। एक पीडीपी नेता ने इस बात को स्वीकारते हुए कहा कि शायद हमने सरकार बनाने में जल्दबाजी कर दी। महबूबा मुफ्ती ने अपने विधायकों से बात करते हुए कहा कि, ” भाजपा के साथ सरकार बनाने का उनके पिता का एक बहादुरी से भरा लेकिन अलोकप्रिय फैसला था” उन्होंने भाजपा से दोनों पार्टियों द्वारा बनाये गये सरकार के एजंडे और कॉमन मीनिमम प्रोग्राम के आधार पर ही आगे बढ़ने का आश्वासन मांगा है।

बारामुल्ला में पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद शाफी का कहना है कि, ” भाजपा के साथ जाने का फैसला ठीक प्रकार से वोटरों के बीच में नहीं गया । हमने यह सोचकर यह जोखिम भरा फैसला लिया था कि सरकार का एजंडे के आधार पर काम हो पायेगा लेकिन दुर्भाग्य से हमें विवादों के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला। अगले चुनाव में हम निश्चित ही घाटी में हर जगह लोगों की नराजगी का सामना करेंगे” पार्टी के एक दूसरे नेता का कहना है कि कश्मीर में भयंकर बाढ़ आई थी हमें आर्थिक मदद चाहिए थी। कांग्रेस के साथ जाकर हमें क्या मिलता और जम्मू ने एक तरफा भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। हम जम्मू के जनमत के निर्णय को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकते थे”

पार्टी नेता राजा अज़ज अली का कहना है कि, “मुफ्ती साहब राज्य के तीनों क्षेत्रों को साथ-साथ लेकर चलना चाहते थे। भाजपा के साथ जाना बेहद जोखिम भरा फैसला था। मुफ्ती साहब को आशा थी कि विकास और शांति के बल पर यह बेमेल गठबंधन शायद लोगों को पसंद आ जाये। उनके पास विजन था और उन्हें केंद्र की सरकार पर बेहद भरोसा था” उन्होंने आगे कहा कि, “दुर्भाग्यवश जो सोच कर गठबंधन किया गया था वैसा नहीं हुआ। पावर प्रोजेक्ट को केंद्र से राज्य में लाने के अपने वादे से जब बिजली मंत्री पीयूष गोयल पलट गये तो इसे पीडीपी नेताओं ने विश्वासघात माना। शासन के एजंडे में पाकिस्तान से बातचीत जारी रखने को भी शामिल किया था लेकिन पठानकोट हमले के बाद उसे भी रोक दिया गया”

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