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जम्मू-कश्मीर में पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी, झारखंड में भाजपा बनाएगी सरकार

जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आया है, जिसमें पीडीपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है और सरकार बनाने की बहुत सी संभावनाएं खुली हैं, जबकि झारखंड में भाजपा अपने सहयोगी दल आजसू के साथ मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में है। पीडीपी 28 सीटों के साथ सरकार बनाने की होड़ […]
Author December 23, 2014 20:10 pm
भाजपा ने जम्मू में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है जबकि झारखंड में अपने सहयोगी दल आजसू के साथ मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में है। (फ़ोटो-पीटीआई)

जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आया है, जिसमें पीडीपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है और सरकार बनाने की बहुत सी संभावनाएं खुली हैं, जबकि झारखंड में भाजपा अपने सहयोगी दल आजसू के साथ मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में है।

पीडीपी 28 सीटों के साथ सरकार बनाने की होड़ में सबसे आगे है और ऐसा लगता है कि पार्टी सभी विकल्प खुले रखे हुए है। कमोवेश यही स्थिति भाजपा की है, जिसे 25 सीटें मिली हैं, जो सभी जम्मू क्षेत्र से हैं। पार्टी ने राज्य में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत और उसके बाद महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा में जीत के बाद झारखंड की इस जीत ने भाजपा के विजय इतिहास में एक और सफा जोड़ दिया है।

जम्मू कश्मीर की 87 सदस्यीय विधानसभा के लिए भाजपा ने मिशन 44प्लस को लेकर ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वहां जमकर प्रचार किया, लेकिन घाटी और लद्दाख के मतदाताओं को लुभाने में नाकाम रहे, जहां की 50 सीटों पर पार्टी के हाथ कुछ नहीं लगा।

पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन का विकल्प खुला: भाजपा

हालांकि पार्टी ने 2008 की 11 सीटों के मुकाबले 25 सीटें जीतीं और उसके लिए सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने की संभावनाएं खुली हैं। पीडीपी की सीटों की संख्या 21 से बढ़कर 28 हो गई।

सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस को चुनाव परिणामों से तगड़ा झटका लगा। पार्टी को पिछले चुनाव में 28 सीटें मिली थीं, जो घटकर 19 रह गईं। मुख्यमंत्री और एनसी के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला सोनावार सीट से चुनाव हार गए और बीरवाह सीट जैसे तैसे बचाने में कामयाब रहे उन्हें 1000 से कुछ अधिक वोट से जीत मिली।

जम्मू कश्मीर में एनसी के साथ सत्ता में भागीदार कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर सरक गई है। पार्टी के पास पिछली विधानसभा में 17 सीटें थीं। पूर्व पृथकतावादी सज्जाद लोन की जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस ने दो सीटें जीती हैं, जबकि जेकेपीडीएफ (सेक्यूलर) और सीपीआईएम को एक एक सीट मिली है। निर्दलीय उम्मीदवार तीन स्थानों पर विजयी रहे हैं।

नतीजों के बाद विभिन्न दलों की स्थिति साफ हो गई है और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि उनकी पार्टी के लिए सभी तीनों विकल्प खुले हैं। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ‘‘सरकार बनाने का विकल्प, सरकार को समर्थन देने का विकल्प और सरकार में शामिल होने का विकल्प, सभी खुले हैं।’’

पीडीपी से गठबंधन के लिए तैयार है कांग्रेस

अन्य सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि अब यह कयास मीडिया को लगाना है कि भाजपा क्या करेगी। स्थिति पर विचार के लिए पार्टी के संसदीय बोर्ड की कल बैठक होगी।

श्रीनगर में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी सबको अटकलों के बीच छोड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता जोड़ तोड़ करके सरकार बनाना नहीं है। संभावनाओं का पता लगाने और सरकार बनाने में समय लगेगा ताकि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके। यह कहना मुश्किल है कि ऐसा कब होगा।’’

उमर अब्दुल्ला सोनवार से हारे, बीरवाह सीट से जीते

निवर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपने पत्ते नहीं खोले और सिर्फ इतना दावा किया कि मौजूदा हालात में नेशनल कांफ्रेंस की अनदेखी नहीं की जा सकती। आने वाले कुछ दिनों में जम्मू और कश्मीर में जो कुछ भी होगा एनसी उसमें एक बड़ी खिलाड़ी होगी।

यह जानना दिलचस्प होगा कि जम्मू और कश्मीर में वोटों के बंटवारे के लिहाज से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। घाटी और लद्दाख में भले ही पार्टी का खाता नहीं खुल पाया, लेकिन पार्टी 23 प्रतिशत वोट लेकर सबसे आगे रही। पीडीपी को 22.7 प्रतिशत, नेशनल कांफ्रेंस को 20.8 प्रतिशत और कांग्रेस को 18 प्रतिशत वोट मिले।

‘पीडीपी के लिए कांग्रेस से गठबंधन आसान’

14 वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए राज्य झारखंड को पहली स्थायी सरकार मिली है क्योंकि भाजपा और आजसू के गठबंधन को 42 सीटें मिल चुकी हैं और बहुमत के लिए 41 सीटों की जरूरत थी। इसमें आजसू की पांच सीटें हैं।

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 18 सीटें जीती हैं और वह एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सरकार में उसकी भागीदार कांग्रेस को चार सीटें हासिल हुई हैं और पार्टी दो सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

भाजपा ने जहां 2009 में मिली 18 सीटों को 37 तक पहुंचाया वहीं जेएमएम की सरकार भले ही चली गई, लेकिन उसकी सीटें 18 से बढ़कर 19 हो गईं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बरहेट से 24,087 वोट से जीते, जबकि दुमका में उन्हें 5,262 वोट से हार का मुंह देखना पड़ा।

पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी के नेतृत्व वाला जेवीएम :पी: सात सीटें जीत चुका है और एक पर बढ़त बनाए हुए है। मोर्चे ने पिछले चुनाव में 11 सीटों पर विजय हासिल की थी।

भाजपा वोट बंटवारे में भी अव्वल रही। उसे कुल 31.4 प्रतिशत वोट मिले, जबकि जेएमएम को 20.5 प्रतिशत, कांग्रेस को 10.3 प्रतिशत और जेवीएम (पी) को 10 प्रतिशत वोट मिले।

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