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सेना में फंड की कमी, टीए/डीए बिल पास करने पर अस्थाई रोक

सभी अधिकारियों, जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) और जवानों के कुल परिवहन और अन्य खर्चों के लिए प्रति वर्ष लगभग 4,000 करोड़ रुपए का खर्च आता है। मगर PCDA सिर्फ 3,200 करोड़ रुपए दिए गए, जो चालू वित्त वर्ष में समाप्त हो गए हैं।

indian armyतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

एक अधिसूचना जारी होने के बाद सोमवार (4 फरवरी, 2019) सशस्त्र बलों में खूब हंगामा हुआ। दरअसल प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑप डिफेंस अकाउंट (PCDA) ने घोषणा की कि धन की कमी के चलते बीट, असाइनमेंट और पोस्टिंग पर जाने वाले सैन्य अधिकारियों की प्रक्रिया पर दावा अब और मान्य नहीं होगा। PCDA (अधिकारियों) ने कहा कि धन की कमी के चलते अस्थाई ड्यूटी और स्थाई ड्यूटी के अधिकारियों को टीए/डीए (यात्रा भत्ता), एडवांस और क्लेम को संबंधित प्रमुखों के तहत पर्याप्त धन प्राप्त होने तक संसाधित नहीं किया जा सकता। PCDA रक्षा मंत्रालय के तहत आता है।

जानना चाहिए की अधिसूचना जारी होने से सेना में खासी नाराजगी बढ़ गई, जिसमें करीब 42,000 अधिकारियों के अलावा 12 लाख जवाब तैनात हैं। मामले में एक सैन्य अधिकारी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘ये संभावित रूप से सेना के दिन प्रतिदिन के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए किसी भी समय अस्थाई ड्यूटी पर 50 फीसदी से अधिक अधिकारियों को बीट में जाने का काम सौंपा गया है।’

जानना चाहिए कि सभी अधिकारियों, जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) और जवानों के कुल परिवहन और अन्य खर्चों के लिए प्रति वर्ष लगभग 4,000 करोड़ रुपए का खर्च आता है। मगर PCDA सिर्फ 3,200 करोड़ रुपए दिए गए, जो चालू वित्त वर्ष में समाप्त हो गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि तत्काल संकट से निपटने के लिए कुछ धन आवंटित किया जा रहा है। मगर सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए और धन की जरुरत होगी। हालांकि संयोग से, पीसीडीए ने सशस्त्र बलों में हंगामे के बाद सोमवार शाम तक अपनी वेबसाइट से अधिसूचना को हटा दिया।

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