सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जालसाजी और मानहानि मामले में बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (anticipatory bail) दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच जारी रह सकती है लेकिन गिरफ्तारी की आवश्यकता पर संतुलन बनाए रखना होगा। इस फैसले से फिलहाल खेड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ जालसाजी और मानहानि का मामला दर्ज किया था। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

असम पुलिस की ओर से दर्ज मामले में पवन खेड़ा पर कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान और दस्तावेजों से जुड़ी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।

अग्रिम जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से प्रभावित लगता है और ऐसे मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पलटा हाई कोर्ट का आदेश

गुवाहाटी हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।

राजनीतिक टकराव

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोप और उनके जवाब में दिए गए सार्वजनिक बयान यह संकेत देते हैं कि विवाद में राजनीतिक तत्व सबसे अहम है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल ‘राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के औज़ार’ के रूप में नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को बिना ठोस आधार के खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने यह भी जोड़ा कि गिरफ्तारी कोई अनिवार्य कदम नहीं, बल्कि अंतिम विकल्प होना चाहिए।

कस्टोडियल जांच की जरूरत नहीं

अदालत ने माना कि मामला मुख्यतः दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है, जो पहले से जांच एजेंसी के पास हैं। ऐसे में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं बनती। आदेश में यह भी कहा गया कि आरोपी की मौजूदगी बिना हिरासत के भी सुनिश्चित की जा सकती है।

गंभीर धाराओं का प्रथम दृष्टया अभाव

न्यायालय ने पाया कि आरोपित धाराओं में से अधिकांश जमानती हैं और गैर-जमानती धाराओं के तहत अपराध का प्रथम दृष्टया ठोस आधार स्पष्ट नहीं है। इस आधार पर भी अदालत ने गिरफ्तारी की आवश्यकता पर सवाल उठाया।

फरार होने या साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खेड़ा के भागने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की संभावना का कोई ठोस संकेत नहीं है। उन्होंने जांच में सहयोग करने की इच्छा भी जताई है।

जमानत के साथ सख्त शर्तें

-जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा

-पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित होना अनिवार्य

-साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे

-बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे

-ट्रायल कोर्ट आवश्यकतानुसार अतिरिक्त शर्तें लगा सकता है

जांच प्रभावित नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा। जांच एजेंसी को निष्पक्ष और निर्बाध तरीके से अपनी कार्रवाई जारी रखने की छूट दी गई है।

अदालत ने कहा कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत तक सीमित हैं। मामले के मेरिट पर ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से फैसला ल

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असम पुलिस द्वारा कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज FIR में मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित BNS की 14 धाराओं के तहत आरोप शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर…