कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से असम पुलिस क्राइम ब्रांच ने करीब 11 घंटे तक पूछताछ की है। यह पूछताछ उस FIR के सिलसिले में हुई जो असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी।
बता दें कि पवन खेड़ा को इससे पहले 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। उन्होंने गुवाहटी हाई कोर्ट के 24 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय खेरा को जांच में सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया था।
बुधवार को पवन खेड़ा सुबह करीब 10:30 बजे गुवाहाटी स्थित क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन पहुंचे जहां उनसे पूछताछ की गई।
क्राइम ब्रांच पहुंचने से पहले पवन खेड़ा ने पत्रकारों से कहा, ”मुझे समन भेजा गया था इसलिए मैं कानून के अनुसार यहां आया हूं क्योंकि मैं न्यायपालिका और कानून का सम्मान करता हूं।”
आज फिर होगी पूछताछ
पूछताछ बुधवार रात तक जारी रही और पवन खेरा रात करीब 9:15 बजे पुलिस स्टेशन से बाहर निकले। उनके वकीलों ने इसकी पुष्टि इंडियन एक्सप्रेस से की।
कांग्रेस नेता और अधिवक्ता अमन वदूद ने बताया कि खेरा को गुरुवार सुबह फिर से पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया है।
रिनिकी भुइयां पर पवन खेड़ा के आरोप
5 अप्रैल को पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास तीन पासपोर्ट हैं।
खेड़ा ने कुछ कथित दस्तावेजों की तस्वीरें भी साझा की थीं जिनमें दावा किया गया था कि UAE में उनके नाम पर संपत्तियां और अमेरिका में पंजीकृत एक कंपनी है। खेड़ा का आरोप था कि इन जानकारियों का खुलासा हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था।
इसके बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने पवन खेरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जिसमें कहा गया कि लगाए गए आरोप झूठे हैं और दिखाए गए दस्तावेज फर्जी हैं।
शिकायत के आधार पर असम पुलिस ने FIR दर्ज की। इस शिकायत में चुनाव से जुड़े गलत बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी से संबंधित विभिन्न धाराएं, आपराधिक धमकी, शांति भंग करने की नीयत से अपमान, मानहानि और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल किए गए।
दस्तावेजों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सर्वोच्च अदालत में पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके द्वारा निवास प्रमाण के तौर पर लगाए गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब पते को लेकर स्पष्टता नहीं है तो तेलंगाना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका क्यों दाखिल की गई।
