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हेलिकॉप्टर का मलबा मिला, पर पायलटों का सुराग नहीं

मुंबई तट के पास अरब सागर में एक पवन हंस हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्र्रस्त होने के एक दिन बाद भी नौसेना और तटरक्षक बल को खराब दृश्यता के कारण तलाश और बचाव.

Author मुंबई | November 6, 2015 12:16 AM
पवन हंस हेलीकॉप्टर (फाइल फोटो)

मुंबई तट के पास अरब सागर में एक पवन हंस हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्र्रस्त होने के एक दिन बाद भी नौसेना और तटरक्षक बल को खराब दृश्यता के कारण तलाश और बचाव अभियान में बाधा उत्पन्न होने की वजह से दो लापता चालकों का पता लगाने में कामयाबी नहीं मिली।

रक्षा प्रवक्ता ने गुरुवार को यहां कहा-‘हमें दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर में सवार दो पायलटों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन हमें हेलिकॉप्टर का दरवाजा और कुछ मलबा मिला है।’ सुबह धुंध छाई रहने की वजह से खराब दृश्यता के कारण तलाशी अभियान बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है।

रात में कार्य करने में सक्षम सीकिंग 42 सी हेलीकॉप्टर को दुर्घटना के बाद सेवा में लगाया गया था, लेकिन वह बिना किसी परिणाम के गुरुवार सुबह लौट आया। पायलटों की पहचान कैप्टन ई सैमुएल और टीके गुहा के तौर पर हुई है।

वर्ष 2001 में बना 14 सीटों वाला वीटीपीडब्लूएफ डाउफिन हेलिकॉप्टर बुधवार शाम सात बज कर 12 मिनट पर ओएनजीसी के एक प्रतिष्ठान से रवाना हुआ था और आठ मिनट बाद ही इसका संपर्क टूट गया। दुर्घटना रात को हेलिकॉप्टर को लैंड करने के अभ्यास के दौरान हुई।

लापता पायलटों व मलबे का पता लगाने के लिए खोज एवं बचाव अभियान में जुटी नौसेना और तटरक्षक बल ने बुधवार रात हेलिकॉप्टर का एक दरवाजा देखा था। दक्षिण मुंबई तट से 82 समुद्री मील की दूरी पर स्थित दुर्घटनास्थल पर नौसेना के दो ‘इमीजिएट सपोर्ट वेसल’ और ओएनजीसी के पोत सेवा में लगाए गए हैं।

हेलिकॉप्टर किसी क्रू ड्यूटी पर नहीं था, इसलिए उसमें कोई यात्री नहीं था। ओएनजीसी अपने अधिकारियों को मुंबई से तटीय तेल क्षेत्र लाने-ले जाने के लिए इन हेलिकॉप्टरों को किराए पर लेता है। तलाश व बचाव अभियान में मदद करने के लिए ‘डिस्ट्रॉयर आईएनएस मुंबई’ को भी सेवा में लगाया गया है।

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