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पटना हाई कोर्ट का 100 साल पुराना मूल वास्तु डिजाइन गायब

पटना हाई कोर्ट का 100 साल पुराना मूल वास्तु डिजाइन गायब हो गया है। यह डिजाइन इलाहाबाद हाई कोर्ट की इमारत की योजना से प्रेरित था।
Author पटना | March 14, 2016 03:45 am
पटना हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट का 100 साल पुराना मूल वास्तु डिजाइन गायब हो गया है। यह डिजाइन इलाहाबाद हाई कोर्ट की इमारत की योजना से प्रेरित था। पैलाडियन डिजाइन पर आधारित नियो क्लासिकल शैली में बनी इस शानदार इमारत का उद्घाटन एक रंगारंग समारोह में तीन फरवरी, 1916 को किया गया था।

साल भर से इस न्यायिक संस्थान का शताब्दी समारोह मनाया जा रहा था। शनिवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके समापन समारोह में शामिल हुए। 18 अप्रैल 2015 को शताब्दी समारोह की शुरुआत के मौके पर अदालत की पुरानी दुर्लभ तस्वीरें जारी की गई थीं। इन तस्वीरों में इमारत की आधारशिला रखने की तस्वीरें शामिल थीं। लेकिन उनमें इमारत की वास्तु योजना के रिकार्ड की कोई भी तस्वीर नहीं थी।

पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल विनोद कुमार सिन्हा ने कहा, ‘हां यह शताब्दी समारोह का समय है और हम चाहते थे कि लोग इस संस्थान के गौरवपूर्ण इतिहास के बारे में जानें लेकिन दुख की बात है कि हम अदालत की इमारत की मूल योजना का पता नहीं कर पाए।’ शताब्दी समारोह समिति ने अदालत के ऐतिहासिक 100 सालों के सफर पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का निर्माण भी कराया। डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन करने वाले स्थानीय फिल्मकार राजेश भूषण ने कहा कि सब ने इमारत के मूल डिजाइन का पता लगाने के लिए ‘एड़ी चोट का जोर लगाया’ लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

उन्होंने कहा, ‘यह फिल्म करीब 20 मिनट की है और अदालत की स्थापना, इमारत का वास्तु और इतिहास की किताबों में बंद ऐतिहासिक मामलों सहित उसकी कहानी बयां करती है।’ शहर के ऐतिहासिक बेली रोड पर स्थित इस ऐतिहासिक इमारत को जेएफ मुनिंग्स ने डिजाइन किया था जिसमें एएम मिलवुड ने उनकी मदद की थी। इसे मार्टिन एंड कंपनी ने बनाया था जिसके मालिक सर आरएन मुखर्जी 1916 में हुए उद्घाटन समारोह में शामिल भी हुए थे।

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  1. S
    shivraj
    Aug 29, 2014 at 8:03 pm
    प्रश्न आपके लिए है की आप आज कल इतना परेशान क्यों रहते है . इन "छोटी- मोटी" बातों यथा लव-जेहाद या राम जन्म भूमि पर इतना समय क्यों व्यर्थ करते है. अब जाने दीजिये काहे चिढ़े जा रहे है इतना. कोई बात नहीं, हो जाता है कभी कभी . अब आप सभी "काफिरो" को दोजख की आग मे तो जला नहीं सकते. रही बात धर्मांतरण की तो मैं अगर यज़ीदी समुदाय का हूँ तो मेरा ही कसूर है वर्ना इस्लाम और धर्मांतरण, तौबा- तौबा.
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    1. M
      monish
      Sep 1, 2014 at 4:01 pm
      इस्लाम को ा सावित करने की कोशिश की जा रही है और इस पर राजनितिक रोटियां सेंकी जा रही हैं.हिन्दू-मुस्लिम सभी को मिलकर एक बेहतर भारत का निर्माण करना चाहिए.ये छोटी- मोटी घटनाये होती ही रहेंगी.लव जिहाद का इस्लाम से कोई लेना देना नहीं हैं.इसके द्यारा व्यक्तिगत और धार्मिक आज़ादी को छीनने की कोशिश की जा रही हैं.इसका भारत के विकास और पहचान पर ा प्रभाव पड़ेगा.
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      1. Nadeem Athar
        Aug 30, 2014 at 6:45 am
        T
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        1. Harendra Prasad
          Aug 30, 2014 at 10:17 pm
          राम जन्मभूमि के मसले की कलई उतरने के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक ऐसा मुद्दा तलाश लिया है, जो दीर्घ-स्थायी है। आने वाले चुनावों में मुसलमानों को हिंदू लड़कियों के अपहर्ता के रूप में चित्रित करके हिंदुओं के भीतर मुसलिम-द्वेष को स्थायी करने की रणनीति कारगर हो सकती है। प्रश्न है किसके लिए?
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          1. Harendra Prasad
            Aug 31, 2014 at 3:43 pm
            राम जन्मभूमि के मसले की कलई उतरने के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक ऐसा मुद्दा तलाश लिया है, जो दीर्घ-स्थायी है। आने वाले चुनावों में मुसलमानों को हिंदू लड़कियों के अपहर्ता के रूप में चित्रित करके हिंदुओं के भीतर मुसलिम-द्वेष को स्थायी करने की रणनीति कारगर हो सकती है। प्रश्न है किसके लिए? ----------------बेहतरीन
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            1. शाहीन सुमन
              Sep 11, 2014 at 7:35 pm
              जिहाद और लव का संम्बध इसलाम में दूर-दूर से भी नहीं है . इसलाम में नामहरम लड़का या लड़की के मिलने-जुलने को ही अवैध करार देता है . लवजिहाद का शोशा तो एक राजनितिक स्टंट है ताकि लोगों के अंदर नफरत के बीज बोकर अपनी राजनितिक फसल काटी जा सके . पश्चमी संस्कृति और स्वछंदता के काऱण हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही अभिभावक परेशान हैं अत: जरूरत है भारतीय संस्कार को बढ़ावा देने और पश्चमी उपभोकतावादी संस्कृति को रोकने की और इसके लिए दोनो ही समुदाय को आगे आना चाहिये !
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              1. शाहीन सुमन
                Sep 11, 2014 at 7:23 pm
                पश्चिमी सभ्यता और स्वछंदता के कारण उपजे प्रेम-विवाह से हिन्दु-मुस्लिम दोनो ही समुदाय के अभिभावक परिशान हैं जहां तक लवजिहाद का सवाल है यह एक भ्रमजाल है लोगों के बीच नफरत पैदा कर अपना उल्लू सीधा करने हेतु ! इसलाम लड़का-लड़की के स्वछंदता को ही नकारता है किसी ना महरम लड़का -लड़की से मेल-जोल को अवैध करार देता है तो फिर ........! समाजिक कुरितीयों को मिटाना हिन्दू-मुसलमान दोनों का फ़र्ज है !
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                1. S
                  suresh k
                  Aug 30, 2014 at 4:57 am
                  अपूर्वानन्दजी नादिरशाह, औरंगजेब,लादेन, हाफिज, कसाब, ये सब एक ही वर्ग विशेष में पैदा क्यों होते है ? अपनी बहिन -बेटी को गुंडों से बचाना अधर्म है, तो सरे धर्म निरपेछ अपनी बेटिओं को आतंकीको को सौप दे , कौन सा ऐसा परिवार,समाज, जाति, है जिसकी कमजोरी गिनाई नहीं जा सकती? आपने दूसरो के बारे में ये सब लिखा होता तो बोटी -बोटी अलग करने का फतवा जारी हो जाता ,आपको गांधी पढ़ना चाहिए जो हिन्दू धर्म को मानव धर्म मान कर सर्वे श्रेष्ठ कहते है |
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