कर्नाटक के हावेरी जिले में सरकारी अस्पताल का शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां बेहतर इलाज और दवाइयां देने का भरोसा देकर दो मरीजों से अस्पताल परिसर में बह रहे सीवेज और मानव मल को हाथ से साफ करवाने का आरोप लगा है। घटना के वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर और वरिष्ठ नर्स को निलंबित कर दिया।
कर्नाटक के हावेरी जिले के सवानूर तालुक अस्पताल में मरीजों से कथित तौर पर मैनुअल स्कैवेंजिंग करवाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में सीवेज का गड्ढा (सेसपिट) भर जाने के बाद दो मरीजों को उसे हाथ से साफ करने के लिए मजबूर किया गया।
मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए डॉक्टर डॉ. शंकर वाई. हिरेगोवदार और वरिष्ठ नर्स वनिता को निलंबित कर दिया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नागराज से घटना की रिपोर्ट भी मांगी है। पुलिस ने भी मामले में केस दर्ज किया है।
अस्पताल में भर गया था सीवेज का गड्ढा
पुलिस के मुताबिक, अस्पताल परिसर में मौजूद सेसपिट कुछ दिनों से ओवरफ्लो हो रहा था। अस्पताल के डॉक्टर डॉ. हिरेगोवदार ने 27 अगस्त को इस समस्या के समाधान के लिए नगर निकाय को पत्र भी लिखा था। हालांकि, कथित तौर पर वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे दो ग्रामीणों से ही गड्ढे की सफाई करवाने का आरोप है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां उपलब्ध कराने का भरोसा देकर सीवेज साफ करने के लिए तैयार किया गया।
मरीजों के हाथ में थमा दी बाल्टियां
मामले के अनुसार, शिग्गांव तालुक के दो ग्रामीण इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने वरिष्ठ नर्स वनिता से संपर्क किया। आरोप है कि वनिता ने उन्हें बाढ़ जैसे हालात वाले शौचालय की जांच करने और समस्या का कारण पता लगाने के लिए कहा।
इसके बाद दोनों मरीजों ने सेसपिट खोला तो वह सीवेज से पूरी तरह भरा हुआ था। आरोप है कि अस्पताल की ओर से उन्हें बाल्टियां दी गईं और उन्हीं बाल्टियों से मानव मल और गंदगी बाहर निकालने को कहा गया।
वीडियो वायरल होने के बाद खुला मामला
28 अगस्त को अस्पताल परिसर में मरीजों को बाल्टियों में मानव मल ले जाते हुए स्थानीय लोगों ने देखा। लोगों ने इस पूरी घटना के फोटो और वीडियो बना लिए, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। स्थानीय लोगों ने जब अस्पताल के कर्मचारियों से इस बारे में सवाल किया तो आरोप है कि डॉ. हिरेगोवदार ने मामले से बचने की कोशिश की और नगर निकाय की गाड़ी भेजकर गड्ढे की सफाई कराने की बात कही।
मैनुअल स्कैवेंजिंग कानून के तहत कार्रवाई
30 अगस्त को तहसीलदार रविकुमार नागप्पा कोरावर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है, जो दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित हैं।
इसके अलावा ‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013’ के तहत भी प्रावधान लगाए गए हैं। इनमें अस्वच्छ शौचालयों, सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
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