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पठानकोट हमला: पाकिस्तान जांच दल पहली बार आएगा भारत, गवाहों से मिलने की दी जाएगी इजाजत

सूत्रों ने बताया कि भारत पाकिस्तान से अनुरोध कर सकता है कि बाद में भारतीय जांच दल को वहां जांच करने की अनुमति दी जाए।

Author नई दिल्ली | March 26, 2016 10:41 PM
बीते 26 अप्रैल को पाकिस्तान के विदेश सचिव ऐजाज अहमद चौधरी से मुलाकात के दौरान जयशंकर ने पठानकोट हमले की जांच की समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया था।

भारत पठानकोट आतंकवादी हमला मामले के सभी गवाहों से पाकिस्तानी जांच दल को मिलने की इजाजत देगा लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड या बीएसएफ कर्मियों से मिलने की इजाजत नहीं देगा। पाकिस्तान के संयुक्त जांच दल के भारत आगमन की पूर्व संध्या पर आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि भारत अपने जांच दल को भी पाकिस्तान जाकर वहां जांच करने की अनुमति देने के लिए दबाव बनाएगा। सूत्रों ने कहा कि पंजाब के आतंकवाद निरोधक विभाग के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक मोहम्मद ताहिर राय के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को पठानकोट हवाई ठिकाने तक पूरी पहुंच मुहैया नहीं कराई जाएगी बल्कि उस सीमित क्षेत्र तक पहुंच मुहैया कराई जाएगी जहां जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के साथ सुरक्षा बलों की 80 घंटे तक मुठभेड़ चली थी।

पाकिस्तानी टीम में लाहौर के खुफिया ब्यूरो के उप महानिदेशक अजीम अरशद, आईएसआई के लेफ्टिनेंट कर्नल तनवीर अहमद, सैन्य खुफिया के लेफ्टिनेंट कर्नल इरफान मिर्जा और गुजरांवाला सीटीडी जांच अधिकारी शाहिद तनवीर को 29 मार्च को विशेष विमान से हवाई ठिकाने लाया जाएगा। हवाई ठिकाने को एनआईए विजुअली बैरिकेड करेगी ताकि महत्वपूर्ण क्षेत्रों को किसी भी तरीके से देखने से रोका जा सके।

सूत्रों ने बताया कि टीम को 28 मार्च को एनआईए मुख्यालय पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसमें मामले में अब तक की गई जांच पर 90 मिनट का प्रजेंटेशन भी शामिल होगा। यह पहली बार होगा जब पाकिस्तानी खुफिया और पुलिस अधिकारी आतंकवादी हमला मामले की जांच के लिए भारत आएंगे। पाकिस्तानी जांच दल के लिए एनएसजी, बीएसएफ और वायु सेना के गरुड़ कमांडो के कर्मियों को छोड़कर शेष गवाहों को तैयार रखा गया है। गवाहों में पंजाब पुलिस के पुलिस अधीक्षक सलविंदर सिंह, उनके जौहरी मित्र राजेश वर्मा और रसोइये मदन गोपाल और 17 घायल लोग शामिल हैं।

तीनों का आतंकवादियों ने 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरम्यानी रात को भारतीय वायु सेना के ठिकाने में घुसने से पहले अपहरण कर लिया गया था। एनआईए चार आतंकवादियों के बारे में ब्योरा भी साझा करेगी। इसमें उनके पैतृक गांव, जिन लोगों ने उनके साथ सहयोग किया था और भारत-पाक सीमा पर बामियाल गांव के जरिए भारत में प्रवेश में उनकी मदद की थी उनके बारे में जानकारी शामिल है। उन्होंने बताया कि ऐसा समझा जाता है कि आत्मघाती हमला करने से पहले आतंकवादियों ने एनर्जी ड्रिंक पी थी। उसका डीएनए नमूना लिया गया है।

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी टीम को उस स्थान पर भी ले जाया जाएगा जहां से जैश के आतंकवादी भारत में घुसे थे। सूत्रों ने बताया कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह जांच में सहयोग करेगा बशर्ते पाकिस्तान भी उसी तरह से सहयोग करे।

पाकिस्तानी पक्ष से कुछ ब्योरे के बारे में भी पूछा जाएगा जो भारत ने उनसे मांगा है। इसमें कुछ फोन नंबर, जैश प्रमुख मसूद अजहर के भाई समेत शामिल लोगों और आतंकवादियों को जो पैक्ड भोज्य पदार्थ दिए गए थे उन कंपनियों का ब्योरा भी शामिल है। सूत्रों ने बताया कि भारत पाकिस्तान से अनुरोध कर सकता है कि बाद में भारतीय जांच दल को वहां जांच करने की अनुमति दी जाए।

भारत पठानकोट हमला और पिछले साल सांबा और कठुआ में हुए हमलों के बीच समानता का भी हवाला देगा जिसमें उसी तरह के जीपीएस और वायरलेस सेटों, कार का अपहरण करने के तौर-तरीके, एनर्जी ड्रिंक रेड बुल (सभी हमलों में समान), तार काटने वाले समान उपकरण और अफ-पाक क्षेत्र में उपलब्ध पूर्वी यूरोप, रूस और चीन के बने हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल शामिल है।

एक जनवरी की दरम्यानी रात से दो जनवरी तक आतंकवादियों की वायु सेना के ठिकाने में सुरक्षा बलों के साथ 80 घंटे तक मुठभेड़ चली थी। उस मुठभेड़ में सात सुरक्षाकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे जबकि जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादियों के शव बरामद किए गए। इस बात पर भ्रम अब भी है कि हमले में क्या दो और आतंकवादी शामिल थे। एनआईए अब कुछ मानव अवशेषों के नमूने दूसरे सीएफएसएल प्रयोगशाला को भेजने पर विचार कर रही है। एनआईए पाकिस्तानी अदालत से अनुरोध पत्र मिलने की अब भी प्रतीक्षा कर रही है ताकि जांच के दौरान एकत्र साक्ष्य को जेआईटी को कानूनन सौंपा जा सके।

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