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अमदाबाद से उठी आवाज, 2017 में नहीं खिलेगा कमल

गुजरात में ओबीसी कोटे के अंतर्गत आरक्षण की मांग के समर्थन में पटेल समुदाय ने आज इसके मुख्य संयोजक हार्दिक पटेल के नेतृत्व में विशाल क्रांति रैली का आयोजन किया...

Author August 26, 2015 8:51 AM
ओबीसी कोटा देने की मांग के समर्थन में अहमदाबाद में रैली करता पटेल समुदाय। (पीटीआई फोटो)

गुजरात में 2017 के चुनाव में ‘कमल’ फिर नहीं खिलेगा, अगर पटेल समुदाय की मांग न मानी गई तो। यह चेतावनी मंगलवार को आरक्षण के लिए ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर आयोजित की गई विशाल रैली में पटेल समुदाय ने गुजरात की भाजपा सरकार को दी। इस समुदाय ने कहा कि उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई तो 2017 के चुनावों में सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक 22 वर्षीय हार्दिक पटेल ने रैली में यह चेतावनी दी। हालांकि शहर के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन के दौरान संघर्ष की खबर भी है जिसमें पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

रैली के बाद पटेल ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल उनसे ज्ञापन लेने के लिए यहां नहीं आतीं, तब तक वह यहीं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। गुजरात में संख्या बल और आर्थिक रूप से मजबूत पटेल समुदाय यहां रैली में शिरकत करने के लिए बड़ी संख्या में जुटे जिससे शहर जाम हो गया।

पटेल समुदाय के महीने भर से चल रहे आंदोलन के बाद ‘महाक्रांति’ रैली हुई। हार्दिक ने उपस्थित लोगों से कहा, ‘अगर आप हमारा अधिकार (आरक्षण) नहीं देंगे तो हम इसे छीन लेंगे। जो भी पटेल समुदाय के हित की बात करेगा वहीं पटेलों पर राज करेगा।’ राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, ‘1985 में हमने गुजरात से कांग्रेस को उखाड़ फेंका, आज यहां भाजपा है। 2017 (राज्य में चुनाव) आ रहा है… कीचड़ में कमल नहीं खिलेगा, यह कभी नहीं खिलेगा। अगर आप हमारे हित की बात करते हैं तभी आपका कमल खिलेगा।’

मुख्यमंत्री द्वारा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने में असमर्थता जताने के बावजूद पटेलों ने अपनी मांग नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री ने नेताओं से आंदोलन खत्म कर वार्ता के लिए आगे आने को कहा था। मुख्यमंत्री ने पटेल समुदाय को ओबीसी में शामिल नहीं करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों और फैसले का हवाला दिया।

हार्दिक पटेल ने कहा, ‘कुछ पार्टियां कहती हैं कि हमें सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों (आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा) का पता नहीं, यह नहीं हो सकता। अगर सुप्रीम कोर्ट एक आतंकवादी पर सुनवाई सुबह 3:30 बजे कर सकता है तो फिर युवाओं के लिए क्यों नहीं, जो इस देश का भविष्य हैं?’ उन्होंने कहा, ‘अगर देश के युवक अपने अधिकारों की मांग के लिए सड़कों पर उतरते हैं और अगर उन्हें वे अधिकार नहीं मिलते हैं तो उनमें से कुछ नक्सलवादी बन जाएंगे और कुछ आतंकवादी हो जाएंगे।’

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