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कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों पर नहीं हुआ था पतंजलि की दवा का ट्रायल

रिपोर्ट में कहा गया है कि पतंजलि की इस दवाई को कोरोना वायरस से पीड़ित किसी गंभीर मरीज पर नहीं परखा गया है, सिर्फ उन लोगों पर टेस्ट किया गया है कि जिनमें कोरोना वायरस के काफी कम लक्षण थे।

हल्के लक्षण वाले मरीजों पर हुआ था कोरोनिल का ट्रायल।

पूरे विश्व में कोरोना का कहर है। रोजाना हजारों की संख्या में लोग संक्रमित पाये जा रहे हैं और इसके संक्रामण से अबतक लाखों की मौत भी हो चुकी है। इस महामारी से ठीक होने की अबतक कोई वैक्सीन या दावा नहीं बनी है। ऐसे में योग गुरु बाबा रामदेव की संस्था पतंजलि ने मंगलवार को कोरोना की दवा बनाने का दावा किया था। जिसके बाद आयुष मंत्रालय ने इसकी जानकारी मागी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय को दी गई जानकारी में पतंजलि ने बताया है कि पतंजलि की दवा का ट्रायल कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों पर नहीं किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पतंजलि की इस दवाई को कोरोना वायरस से पीड़ित किसी गंभीर मरीज पर नहीं परखा गया है, सिर्फ उन लोगों पर टेस्ट किया गया है कि जिनमें कोरोना वायरस के काफी कम लक्षण थे। आयुष मंत्रालय में पतंजलि की ओर से जो रिसर्च पेपर दाखिल किया गया है, उसके अनुसार कोरोनिल का क्लीनिकल टेस्ट केवल 15 – 80 वर्ष की आयु समूह के बीच 120 असिम्प्टोमटिक लोगों या हल्के लक्षण वाले लोगों पर किया गया था।

पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से मंत्रालय को बताया गया कि ये क्लीनिकल ट्रायल जयपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च में किया गया था। दावा किया गया कि उन्होंने हर नियम का पालन किया है, साथ ही आयुर्वेदिक साइंस सेंट्रल काउंसिल के डीजी को लूप में रखा था। पंतजलि के दावे के अनुसार, इस दवाई का पहला क्लीनिकल ट्रायल एक मरीज पर 29 मई को किया गया। इसमें 69 फीसदी रिकवरी शुरुआती तीन दिन और 100 फीसदी रिकवरी सात दिनों में किए जाने का दावा है. जल्द ही इसके पूरे रिजल्ट को जारी किया जाएगा।

बता दें पतंजलि आयुर्वेद की ‘दिव्‍य कोरोना किट’ के विज्ञापन पर आयुष मंत्रालय ने रोक लगा दी है। मंत्रालय ने रामदेव की कंपनी से दवा के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा थे। मंत्रालय ने पूछा था कि उस अस्‍पताल और साइट के बारे में भी बताएं, जहां इसकी रिसर्च हुई थी। वहीं आयुष विभाग के लाइसेंस अधिकारी ने कहा है कि पतंजलि को सिर्फ इम्युनिटी बूस्टर तैयार करने का लाइसेंस दिया गया था। इसके अलावा बुखार और खांसी की दवाओं के लिए लाइसेंस दिया था। हम उन्हें नोटिस जारी कर पूछेंगे कि आखिर उन्हें कोरोना के लिए किट बनाने की अनुमति कहां से मिली।

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