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सांसदों के वेतन-भत्ते में सौ फीसद इजाफे की सिफारिश

जहां एक ओर सांसद तक लोगों को एलपीजी पर मिल रही सब्सिडी छोड़ने के लिए कह रहे हैं, वहीं वे अपनी सैलरी और भत्तों में बेतहाशा इजाफा कर लेना चाहते हैं।

Updated: July 3, 2015 9:52 AM

एक संसदीय समिति ने सांसदों के वेतन और दैनिक भत्तों में 100 फीसद जबकि पूर्व सांसदों की पेंशन में 75 फीसद इजाफे की सिफारिश की है। इसके अलावा, समिति ने पूर्व सांसदों के ‘पति या पत्नी’ की जगह उनके ‘साथियों’ के लिए सुविधाओं की भी वकालत की है।

दूरगामी सिफारिशें करते हुए भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली समिति ने सांसदों के मौजूदा वेतन, 50,000 रुपए, को बढ़ाकर दोगुना करने को कहा है और पूर्व सांसदों की पेंशन 20,000 रुपए से बढ़ाकर 35,000 रुपए करने की वकालत की है। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि संसद सत्रों के दौरान सदन में मौजूदगी के लिए सांसदों को मिलने वाले दैनिक भत्ते को 2,000 रुपए से बढ़ाकर 4,000 रुपए किया जाए।

ऐसा समझा जाता है कि समिति के समक्ष पेश हुए कुछ पूर्व सांसदों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ट्रेन में यात्रा के लिए प्रथम श्रेणी का टिकट तो दिया जाता है लेकिन उनके साथ चलने वाले, भले ही उनके पति या पत्नी ही क्यों न हो, को द्वितीय श्रेणी का ही टिकट दिया जाता है। समिति ने यह सिफारिश भी की है कि पूर्व सांसद और उनके ‘साथ चलने वाले’ को प्रथम श्रेणी का टिकट दिया जाए।

इसके अलावा, समिति का मानना है कि पूर्व सांसदों को साल में पांच बार इकनॉमी क्लास में हवाई यात्रा करने की इजाजत दी जानी चाहिए। सांसदों को एक साल में करीब 36 बार एग्जक्यूटिव क्लास में यात्रा की इजाजत दी जाती है।

समिति ने यह भी कहा कि चूंकि सांसदों को कैबिनेट सचिव की रैंक से ऊपर माना जाता है, इसलिए उनकी सुविधाएं भी उसी दर्जे से मेल खानी चाहिए। समिति ने सांसदों के शादीशुदा बच्चों को स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं देने की भी सिफारिश की।
सूत्रों ने कहा कि समिति की बैठक के ब्योरे में दर्ज इनमें से कुछ सिफारिशें पहले ही संसदीय कार्य मंत्रालय को सौंपी जा चुकी हैं, जबकि कुछ अन्य को 13 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में अंतिम रूप दे दिया जाएगा। सांसदों के वेतन और भत्तों का पुनरीक्षण अंतिम बार 2010 में किया गया था। मौजूदा समिति की ओर से एक बार सिफारिशें सौंप दिए जाने के बाद अगला पुनरीक्षण पांच साल बाद किया जाएगा।

बहरहाल, माकपा के सदस्य केएन बालागोपाल ने सुझाव दिया कि सांसदों को अपने वेतन-भत्ते खुद ही तय नहीं करने चाहिए और इसके लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था की जानी चाहिए। समिति में जद (एकी) के प्रतिनिधि और राज्यसभा सदस्य केसी त्यागी ने भी कहा कि वेतन-भत्तों के पुनरीक्षण के लिए गठित किए जाने वाले विभिन्न बोर्ड और आयोगों के मद्देनजर सांसदों के वेतन-भत्ते तय करने के लिए एक स्वतंत्र निकाय गठित किया जाना चाहिए।

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समिति के कुछ सदस्यों ने कहा कि चूंकि भारत राष्ट्रमंडल देशों के समूह का सदस्य है, ऐसे में इसके सांसदों के वेतन-भत्ते समूह के अन्य सदस्य देशों के समकक्ष होने चाहिए। ‘जीवनसाथी’ की जगह ‘साथी’ शब्द के इस्तेमाल का कारण यह बताया गया कि कई सांसद या तो अविवाहित हैं या किसी अन्य वजह से उनके पति या पत्नी नहीं हैं।

नियमों के मुताबिक, सांसदों को ट्रेनों में प्रथम श्रेणी में यात्रा करने की अनुमति होती है और वे वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के एक टिकट की कीमत के बराबर यात्रा भत्ता, महंगाई भत्ता प्राप्त करते हैं। समिति के सदस्यों का मानना था कि चूंकि अब ट्रेनों में प्रथम श्रेणी नहीं है, इसलिए उन्हें भत्ते के तौर पर एसी प्रथम श्रेणी का किराया मिलना चाहिए।

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