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संसदीय समिति ने कहा : सभी ग्राम पंचायतो में अगस्त 2021 तक BharatNet लागू होने पर अनिश्चितता

संसद की एक समिति ने ग्रामीण ब्रॉडबैंड परियोजना BharatNet के शीघ्र क्रियान्वयन के उद्देश्य से सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने के लिए कैबिनेट नोट तैयार करने में विलंब होने पर निराशा जताई है।

Edited By subodh gargya नई दिल्ली | February 9, 2021 2:41 PM
सभी ग्राम पंचायतो में BharatNet लागू होने पर अनिश्चितता बनी हुई है। (Indian Express)

संसद की एक समिति ने ग्रामीण ब्रॉडबैंड परियोजना BharatNet के शीघ्र क्रियान्वयन के उद्देश्य से सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने के लिए कैबिनेट नोट तैयार करने में विलंब होने पर निराशा जताई है। साथ ही समिति ने इस बात को लेकर भी अनिश्चितता जताई है कि देश के सभी ढाई लाख गांवों में BharatNet परियोजना के तहत अगस्त 2021 तक तीव्र ब्रॉडबैंड सुविधा पहुंच पाएगी।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी संबंधित, संसद की स्थायी समिति द्वारा सोमवार को लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। BharatNet परियोजना के तहत तीव्र गति वाले ब्रॉडब्रैंड की सुविधा सभी ढाई लाख पंचायतों तक पहुंचाने का लक्ष्य था और इसे मार्च 2019 तक पूरा कर लिया जाना था। यद्यपि इसके तहत मात्र 1.18 लाख पंचायतों में यह सुविधा पहुंचाई जा सकी है।

दूरसंचार विभाग के शीर्ष निर्णय निकाय डिजिटल संचार आयोग ने पिछले साल अपनी एक बैठक में BharatNet के शीघ्र क्रियान्वयन के मकसद से पीपीपी को सैद्धांतिक अनुमति प्रदान की थी। आयोग की अनुमति के बाद दूरसंचार विभाग को कैबिनेट नोट तैयार करना था।

दूरसंचार विभाग ने समिति को बताया कि कैबिनेट नोट का मसौदा तैयार किया जा रहा है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘बहरहाल, समिति इस बात को जानकर निराश हुई है कि कैबिनेट के लिए नोट का मसौदा अभी तैयार ही किया जा रहा है।’’

समिति ने महसूस किया कि गुजरात को छोड़कर राज्य नीत मॉडल अनुमानित गति से प्रगति नहीं कर पाया है। केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यम नीत मॉडल के मामले में बीएसएनएल क्षमताओं की बाधाओं का सामना कर रहा है जिसका कारण उसकी खस्ता आर्थिक हालत है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि क्या विभाग अगस्त 2021 तक संपर्क उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहेगा।’’

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति ने नक्सल प्रभावित इलाकों में मोबाइल नेटवर्क के लिए दूसरा चरण शुरू करने के काम में सरकारी कंपनी बीएसएनएल को बाहर रखने पर भी सवाल उठाए हैं।

समिति को सूचित किया गया कि वाम चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों में बीएसएनएल ने 2,345 टॉवर स्थापित कर पहले चरण को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया। यद्यपि 2,217 स्थानों पर 3214.64 करोड़ रुपये की लागत से दूरसंचार टॉवर स्थापित करने का दूसरा चरण बीएसएनएल को नहीं दिया गया क्योंकि इसकी माली हालत खस्ता है।

समिति ने कहा कि वह चाहती है कि दूरसंचार विभाग इस बात के लिए गंभीर प्रयास करे कि वाम चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों में बीएसएनएल को दूसरा चरण क्रियान्वित करने का काम आवंटित हो।

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