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बीजेपी सांसद की अध्‍यक्षता वाली संसदीय समिति ने CBI को लेकर मोदी सरकार को लगाई फटकार

सीबीआई में विभिन्न स्तरों पर कर्मियों की कमी एक बारहमासी समस्या के तौर पर देखी जा रही है। समिति ने कहा कि वह कई मौकों पर इस बारे में अपनी चिंता व्यक्त कर चुकी है। समिति ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सरकार को सीबीआई को लेकर फटकार लगाई है। संसदीय समिति ने सरकार से एजेंसी के खाली पड़े शीर्ष पदों के लिए सवाल किया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक समिति ने कहा कि सरकार सुनिश्चित करे कि एंजेसी में स्टाफ की कमी न रहे। समिति ने सीबीआई में फोरेंसिक साइंस के इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को लेकर धीमी भी आपत्ति जताई जिसे अभी तक गृह मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली है। सीबीआई में विभिन्न स्तरों पर कर्मियों की कमी एक बारहमासी समस्या के तौर पर देखी जा रही है। समिति ने कहा कि वह कई मौकों पर इस बारे में अपनी चिंता व्यक्त कर चुकी है। समिति ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा, ”किसी संस्थान में पहले से भर्तियों के लिए अनुमान लगाया जा सकता है और समय पर रिक्तियों को भरने के लिए आवश्यक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सक्रिय प्रयासों की शुरुआत की जानी चाहिए। ऐसी स्थिति का अनुमान लगाने में सीबीआई विफल रही है।” समिति के मुताबिक उसे आशा है कि भर्ती नियमों के अनुपालन से खाली जगहों को समय पर भरने में देरी नहीं होती है।

रिपोर्ट कहा गया, ”यदि हां, तो नियमों को संशोधित किया जा सकता है, ताकि देरी को खत्म किया जा सके। इसे देखते हुए, समिति ने दोहराती है कि सरकार को पहले से ही रिक्तियों को अच्छी तरह से भरने में सक्रिय कदम उठाने चाहिए, ताकि सीबीआई जैसी प्रमुख संस्था में स्टाफ की कमी न रहे, जो निश्चित रूप से इसके प्रदर्शन पर असर डालता है।” बता दें कि सीबीआई बिना किसी नियमित प्रमुख के काम कर रही। पिछले दिनों एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। दोनों शीर्ष अधिकारियों को सरकार ने लंबी छुट्टियों पर भेज दिया था।

समिति ने पाया है कि कार्यकारी रैंक के पदों, कानून अधिकारियों और तकनीकि अधिकारियों के पदों पर क्रमश: 16, 28 और 56 फीसदी स्टाफ की कमी है। रिपोर्ट में कहा गया, ”स्पेशल डायरेक्टर, एडीशनल डायरेक्टर के शीर्ष स्तर के चार पदों में से तीन खाली हैं। सीबीआई ने अपनी प्रस्तुति में कहा है कि वे जांच के बढ़ते बोझ के कारण रिक्तियों के प्रभाव को महसूस कर रहे हैं। समिति विभिन्न कारणों से सीबीआई में रिक्तियों के बारे में गहराई से चिंतित है।”

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