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लोकसभा: शीतकालीन सत्र चलाने में करदाताओं के 144 करोड़ बर्बाद, अगले साल दोगुने हो सकते हैं सांसदों के वेतन-भत्‍ते

हर लोकसभा सांसद पर करीब 2,70,000 रुपए का मासिक खर्च बैठता है।

शीतकालीन सत्र में लोकसभा की कार्यवाही की तस्‍वीर। (FILE PHOTO: PTI)

लोकसभा के शीतकालीन सत्र के पूरी तरह बर्बाद होने के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस सत्र में लोकसभा की कार्यवाही के 92 घंटे बर्बाद हुए। 2014 के बाद से संसद के इस शीतकालीन सत्र में सबसे कम काम हुआ है। लोकसभा द्वारा जारी डाटा के अनुसार पिछले वित्‍तीय वर्ष (अप्रैल 2015 से मार्च 2015) तक 545 लोकसभा सांसदों के वेतन व भत्‍ते पर जनता की गाढ़ी कमाई के 177 करोड़ लुटाए गए। इसमें राज्‍यसभा सांसदों के 78 करोड़ रुपए के वेतन-भत्‍ते अलग हैं। इसमें जून 2015 में अनुमोदित किया गया यात्रा और दैनिक भत्‍ता शामिल नहीं है। साथ ही इस रकम में कैबिनेट मंत्रियों का हिस्‍सा भी नहीं है क्‍योंकि उन्‍हें उनके मंत्रालय भुगतान करते हैं। इस लिहाज से देखें तो हर लोकसभा सांसद पर करीब 2,70,000 रुपए का मासिक खर्च बैठता है। सांसदों को सत्र के दौरान 2000 रुपए का दैनिक भत्‍ता मिलता है। इसमें बतौर सांसद मिलने वाली अन्‍य सुविधाएं जैसे- मुफ्त आवास, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं और टेलीकॉम सेवाएं शामिल नहीं हैं।

वेतन भत्‍तों और संसद को चलाने के खर्च के आधार पर इंडियास्‍पेंड ने गणना कर बताया है क‍ि वर्तमान लोकसभा के 10 सत्र (शीतकालीन सत्र, 2016) में हंगामे के बीच करीब 144 करोड़ रुपए (सदन चलाने पर 138 करोड़ और वेतन, भत्‍तों पर 6 करोड़ रुपए) का खर्च हुआ है। विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर, 2016 को 500, 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने के फैसले के खिलाफ लगातार हंगामा जारी रखा।

सांसदों को हर महीने वेतन के तौर पर 50,000 रुपए, संसदीय क्षेत्र भत्‍ते के तौर पर 45 हजार, कार्यालय के खर्च हेतु 15 हजार और सचिवालयी सहायता के लिए 30 हजार रुपए मिलते हैं। यह सब कुल मिलाकर 1,40,000 रुपए बैठता है। सांसदों को साल भर में आधिकारिक कार्यों पर 34 फ्लाइट ट्रिप्‍स और असीमित रेल तथा रोड यात्रा की प्रतिपूर्ति की जाती है।

संसद के बार-बार ठप होने से नाराज होकर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी से कड़े शब्‍दों में सांसदों से कहा था, ‘भगवान के लिए, अपना काम कीजिए।’ 16वीं लोकसभा का गठन मई, 2014 में हुआ था। अब तक 10 सत्रों में करीब 1,066 घंटे (लगभग 133 दिन) काम हुआ है। 10वें सत्र में सबसे कम, सिर्फ 19 घंटे और 26 मिनट ही काम हो सका।

केंद्र सरकार ने सांसदों का वेतन बढ़ाने का प्रस्‍ताव दिया है। इसके मुताबिक, सांसदों का वेतन 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपए, संसदीय क्षेत्र भत्‍ता 45 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपए, सचिवालयी तथा कार्यालय भत्‍ता 45 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपए हो जाएंगे। यानी प्रति सांसद वेतन-भत्‍तों पर होने वाला मासिक खर्च वर्तमान के 1,40,000 से बढ़कर 2,80,000 रुपए हो जाएगा।

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