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सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्षी दलों ने जताई सरकार को घेरने की मंशा

सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं क्योंकि कई विपक्षी दलों ने बीमा विधेयक का विरोध करने और कालेधन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की मंशा स्पष्ट कर दी है। शीतकालीन सत्र की पूर्वसंध्या पर रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया […]

Author November 24, 2014 9:09 AM
कई विपक्षी दलों ने बीमा विधेयक का विरोध करने और कालेधन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की मंशा स्पष्ट कर दी है।

सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं क्योंकि कई विपक्षी दलों ने बीमा विधेयक का विरोध करने और कालेधन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की मंशा स्पष्ट कर दी है। शीतकालीन सत्र की पूर्वसंध्या पर रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में कहा कि सभी अहम मुद्दों पर मिलजुल कर संसद में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महीने भर चलने वाला यह सत्र भी बजट सत्र की भांति ‘बहुत अच्छी तरह’ गुजरेगा। नायडू के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सभी मुद्दों को लेने के लिए तैयार है। सामूहिक विवेक से, सभी दलों के मुद्दों को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस बैठक में 26 दलों के 40 नेताओं ने हिस्सा लिया। तृणमूल कांग्रेस और सपा नेता बैठक में मौजूद नहीं थे।

वाम दलों, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (एकी), राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी और बसपा ने बीमा विधेयक के विरोध का साझा मुद्दा बनाने का निर्णय किया है और व्यापक विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस से उन्हें समर्थन देने को कहा है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीमा विधेयक पर विपक्ष की मुहिम को समर्थन देने के बारे में कहा कि पार्टी पहले यह देखेगी कि सरकार किस तरह का संशोधन लाती है।

नायडू ने विपक्ष की मुहिम को तवज्जो न देते हुए उम्मीद जताई कि ये दल देश के मूड और जनादेश की भावना को समझेंगे और सरकार का सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी विधेयक हमारी प्राथमिकता हैं। विकास के राष्ट्रीय एजंडे को शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है। निवेश, अर्थव्यवस्था में सुधार और जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना प्राथमिकता है। बीमा विधेयक उसी दिशा में एक कदम है। नायडू ने कहा कि बीमा विधेयक को लगभग अंतिम रूप दिया जा चुका है। नायडू ने इन खबरों को भी खारिज किया कि तृणमूल कांग्रेस को इस बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। नायडू ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पार्टी के नेता से बात की थी जबकि संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने बैठक के बारे में पार्टी को सूचित किया था।

एक महीने तक चलने वाले इस शीतकालीन सत्र में कुल 22 बैठकें होंगी जिसमें चार दिन गैरसरकारी कामकाज के लिए रखे गए हैं।
बैठक के बाद जद (एकी) के नेता केसी त्यागी ने सत्तारूढ़ पार्टी पर विदेशों में जमा कालाधन वापस लाने के चुनाव से पूर्व किए गए अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया और कहा कि माकपा, जद (सेकु), सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस बीमा विधेयक का विरोध करेंगी। उन्होंने कहा कि व्यापक विपक्षी एकता की खातिर कांग्रेस को समर्थन करना चाहिए। त्यागी ने कहा कि हम भूमि अधिग्रहण विधेयक में संशोधन और मनरेगा कानून में बदलाव का कड़ा विरोध करेंगे।

शिवसेना ने यह घोषणा कर सरकार को राहत दी कि वह संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार का समर्थन करेगी। शिवसेना नेता संजय राउत ने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम का केंद्र में भाजपा और शिवसेना के संबंधों पर असर नहीं होगा।

संसदीय कार्य मंत्री नायडू ने उन 37 विधेयकों का ब्योरा दिया जिसे सरकार पेश करना चाहती है और लंबित विधेयकों को विचार और पारित करने के लिए लेना चाहती है। बैठक में सरकार की तरफ से गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान, संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और राजीव प्रताप रूड़ी ने हिस्सा लिया।

विपक्ष की तरफ से कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, बीजद के भर्तृहरि महताब, बसपा के एससी मिश्रा, जद (एकी) के केसी त्यागी, राकांपा के तारिक अनवर, द्रमुक की कनिमोड़ी, भाकपा के डी राजा, आइयूएमएल के ई अहमद, आम आदमी पार्टी के धर्मवीर गांधी, वाईएसआर कांग्रेस के एम राजामोहन रेड्डी के अलावा अन्नाद्रमुक के पी वेणुगोपाल, तदेपा के टी नरसिम्हा, शिवसेना के संजय राउत, अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा और नेशनल पीपुल्स पार्टी के पीए संगमा ने हिस्सा लिया।

संसद का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब एक हफ्ते पहले ही पुराने जनता परिवार से जुड़े विभिन्न दलों ने एक मंच पर आने और संसद के दोनों सदनों में संयुक्त रणनीति अपनाने की योजना की घोषणा की है।

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