लोकसभा में बजट सत्र के दूसरे हिस्से के दूसरे दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। बता दें कि करीब 40 सालों में किसी स्पीकर के खिलाफ ये पहला अविश्वास प्रस्ताव है। हालांकि नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास बहुमत होने के कारण यह प्रस्ताव केवल विरोध तक ही सीमित रहा। कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने स्पीकर ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओम बिरला सदन के सभी वर्गों का विश्वास जीतने के लिए जरूरी निष्पक्षता बनाए रखने में नाकाम रहे हैं।

जगदंबिका पाल ने निभाई पीठासीन सभापति की भूमिका

सत्र की शुरुआत में ही इस बात पर तुरंत टकराव हो गया कि बहस के दौरान पीठासीन सभापति की भूमिका कौन निभाएगा। स्पीकर ओम बिरला की जगह बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने पीठासीन सभापति की कुर्सी संभाली। विपक्ष ने इस बात पर सवाल उठाए कि यह फैसला कैसे किया गया कि चर्चा के दौरान जगदंबिका पाल ही पीठासीन सभापति की कुर्सी पर बैठेंगे।

गौरव गोगोई ने बिरला पर साधा निशाना

सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने अपने भाषण की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के ‘नबम रेबिया’ फैसले का हवाला देते हुए की। उन्होंने कहा कि स्पीकर से उच्च स्तर की स्वतंत्रता की उम्मीद की जाती है और उन्हें निष्पक्षता के साथ रहना चाहिए।

स्पीकर सरकार की आवाज नहीं हैं- गौरव गोगोई

गौरव गोगोई ने कहा, “हम इस प्रस्ताव को लेकर बहुत खुश नहीं हैं। निजी तौर पर ओम बिरला के सभी के साथ अच्छे संबंध हैं। इसीलिए हमें दुख है कि हमें उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओम बिरला पर निजी तौर पर हमला नहीं करना चाहती। गौरव गोगोई ने कहा, “हम इसे भारतीय गणराज्य के लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए ला रहे हैं। अंबेडकर ने कहा था कि संवैधानिक नैतिकता के लिए निष्पक्षता जरूरी है। स्पीकर सरकार की आवाज नहीं, बल्कि पूरे सदन के अधिकारों के संरक्षक होते हैं।”

गौरव गोगोई ने फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब के दौरान सदन की कार्यवाही का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी बोलना चाहते थे, तो उन्हें 20 बार टोका गया। उन्होंने कहा, “स्पीकर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ सदस्य गृह मंत्री, रक्षा मंत्री- सभी ने मिलकर एक सुनियोजित तरीके से ऐसा किया। सिर्फ इसलिए कि वह यह कहना चाहते थे कि जब देश के मुखिया की सबसे ज़्यादा जरूरत थी, तो उन्होंने कहा तुम्हें जो ठीक लगे, वह करो’। हमारे पास कोई सैन्य नेतृत्व नहीं है। हमारी सेना राजनीतिक नेतृत्व के निर्देशों का इंतज़ार करती है।”

गौरव गोगोई नेता विपक्ष राहुल गांधी के उस बयान का ज़िक्र कर रहे थे, जब उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र किया था। उस समय सरकार ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए उन्हें कई बार टोका था।

गौरव गोगोई ने अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते पर भी बात की और कहा, “विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते का भी ज़िक्र किया। ऐसे समझौते को करने में इतनी जल्दबाज़ी क्यों थी, जो भारत के हित में भी नहीं है? कृषि क्षेत्र में अमेरिका को रियायतें दी गईं। विपक्ष के नेता ने कहा कि न्याय विभाग में एक उद्योगपति के खिलाफ चल रही जांच के कारण ऐसा हुआ और फाइलों में और भी नाम शामिल हैं।” पढ़ें राष्ट्रपति और राज्यपाल के मुद्दे पर टीएमसी-बीजेपी आमने-सामने