Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में इस बार सांसदों के समय की ज्यादा बर्बादी हुई है। सत्र में नीट परीक्षा, छात्रों पर हुई बर्बरता और राम मंदिर के चंदा चोरी के गूंज हर दिन सुनाई दी है और सदन बार- बार बाधित होता रहा है। सरकार ने इसी हंगामे में सरकारी कामकाज को चंद मिनटों निपटा लिया।

ये हालत निचले सदन और उच्च सदन में बीते दस दिन में देखने को मिली है। तय कार्यक्रम के मुताबिक आगामी गुरुवार तक अब संसद को चलना है। निचले सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला लगातार सांसदों सदन के कामकाज को बाधित नहीं करने और सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त समय का आश्वासन देते नजर आए थे।

सदन तक नहीं पहुंच पाई समिति में बनी सहमति

हर बार कार्य मंत्रणा समिति में प्रश्नकाल और विशेष उल्लेख के तहत सदन में उठाने की सहमति बनी थी, वे मुद्दे तक भी सदन तक नहीं पहुंच पाए। इसके अतिरिक्त सरकार ने जरूरी विधेयकों को भी दो से तीन मिनट के अंदर ही पारित किया है। सत्र में बीते 10 दिन के आंकड़े बताते हैं कि संसद में लोकसभा से ज्यादा काम राज्यसभा में हुआ है। इस सत्र की शुरुआत 27 जुलाई से शुरू हुई थी और सात अगस्त तक ऐसा ही नजारा रहा। अब तक निचले सदन में कुल 188.03 मिनट ही कामकाज हुआ है।

लोकसभा में सबसे अधिक कामकाज का दिन 28 जुलाई रहा था। इस दिन सदन में 12.02 यानी 721.2 मिनट तक सदन ने काम किया था। यदि सदन ने 28 जुलाई की तरह ही कामकाज किया होता, तो इन दस दिन में 7212 मिनट सांसदों द्वारा काम किया जा सकता था। इस प्रकार बीते दस दिन में केवल लोकसभा के अंदर 7023 मिनट बर्बाद हुए हैं। हर दिन संसद में औसत 702.37 मिनट बर्बाद हुए हैं।

राज्यसभा में अधिक हुआ काम

वहीं दूसरी ओर, इस मामले में राज्यसभा के सांसदों ने दस दिन में अधिक काम किया है और अधिक समय राज्यसभा में बिताया है। राज्यसभा ने इस दौरान 1046 मिनट काम किया है। सत्र के दौरान एक दिन में अधिकतम काम करने का समय 446 मिनट रहा है। इस दिन के हिसाब से सांसदों ने काम किया होता, तो 10 दिन में सदन के पास 4960 मिनट दिन का समय था।

इस समय का पूरा इस्तेमाल किया जाता तो सदन में और भी अधिक काम हो सकता था। सदन ने अब तक सत्र के दौरान औसतन 3914 मिनट का समय बर्बाद किया है। आगामी गुरुवार को संसद सत्र का आखिरी दिन है ओर अब केवल चार दिन शेष हैं।

खुद पीठासीन अधिकारी ने भी की थी टिप्पणी

हंगामे के बीच संसद में होने वाले समय की बर्बादी पर सदन में पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने भी टिप्पणी की थी। उनका कहना था कि संसद प्रतिदिन 360 मिनट चलती है। संसद चलाने में हर मिनट लगभग 2.5 लाख रुपए खर्च होते हैं। जो कि एक दिन में करीब नौ करोड़ रुपए बनते हैं। इसलिए सदस्य हंगामा न करें, सीट पर जाएं और संसदीय कार्यवाही में शामिल है।

केरल का नाम बदलने का बिल पेश करेंगे गृह मंत्री अमित शाह

लगातार चल रहे हंगामे के बीच सोमवार को केंद्र सरकार संसद के निचले सदन में चार नए विधेयक पेश करने जा रही है। इन विधेयकों में केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने से संबंधित विधेयक भी शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस विधेयक को सदन में पेश करेंगे।

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नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत रोजगार सृजन में जुलाई में पिछले साल के मुकाबले 49.94 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सरकार ने 1 जुलाई से करीब 20 साल पुरानी मनरेगा की जगह नई योजना ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ लागू की है। पढ़िए पूरी खबर…