मानसून सत्र के तीन हफ्ते पूरे होने के बाद (10 अगस्त तक) लोकसभा अपने तय समय का सिर्फ 16% और राज्यसभा 31% समय ही काम कर पाई। पीआरएस लेजेस्टिव रिसर्च के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 2009 से संसद के सत्रों के आंकड़ों से पता चलता है कि पहले भी ऐसे मौके आए हैं, जब लोकसभा या राज्यसभा का काम इससे भी ज्यादा समय तक बाधित रहा है।
यूपीए सरकार का कार्यकाल
साल 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार दूसरी बार सत्ता में थी और बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल थी। उस समय शीतकालीन सत्र पूरी तरह से निष्फल रहा था। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा सत्र में अपने निर्धारित समय के केवल 5% और राज्यसभा मात्र 2% ही काम कर पाई। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के कारण यह सत्र पूरी तरह निष्फल रहा। विपक्ष ने जेपीसी द्वारा जांच की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि पीएसी भी यही काम कर सकती है।
2014 के लोकसभा चुनावों से पहले 2013 के शीतकालीन सत्र में भी संसद का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर मजबूत हुई बीजेपी ने टेलीकॉम लाइसेंस आवंटन पर जेपीसी की ड्राफ्ट रिपोर्ट को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।
तत्कालीन लोकसभा सांसद पीसी चाको के नेतृत्व वाली जेपीसी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को क्लीन चिट दे दी थी, जबकि पूर्व संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए राजा पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया था। विपक्ष ने इसे मामले को दबाने का प्रयास करार दिया था।
तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर आंध्र प्रदेश के सांसदों और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद विस्थापित हुए लोगों की दुर्दशा को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों ने सत्र को और भी बाधित कर दिया। इस सत्र में लोकसभा अपने निर्धारित समय के केवल 6% और राज्यसभा 19% ही काम कर पाई।
2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आयोजित अंतरिम बजट सत्र भी लगभग पूरी तरह विफल रहा, क्योंकि चुनाव प्रचार से पहले यूपीए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। लोकसभा अपने निर्धारित समय के 21% और राज्यसभा 27% ही काम कर पाई।
एनडीए सरकार का कार्यकाल
नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद 2015 का मानसून सत्र निराशाजनक रहा। लोकसभा अपने निर्धारित समय के 46% समय तक ही चली और राज्यसभा केवल 9% समय तक। विपक्ष ने ललित मोदी विवाद को लेकर संसद को बाधित किया था। इसमें तत्कालीन केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को बर्खास्त करने की मांग की गई थी। उन पर मोदी के लिए ब्रिटिश ट्रेवल डॉक्यूमेंट हासिल करने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल का आरोप था। विपक्ष ने बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में प्रवेश और भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े व्यापम घोटाले का भी विरोध किया था।
इसके बाद लोकसभा में कांग्रेस के 44 सांसदों में से 25 को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया, जिसके चलते कई विपक्षी दलों ने निलंबित सांसदों के समर्थन में कार्यवाही का बहिष्कार किया। राज्यसभा में पूरे सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं हो सका, हालांकि लोकसभा में कुछ दिनों तक प्रश्नकाल हुआ और विपक्षी दलों की अनुपस्थिति में कुछ विधायी कार्य भी पूरे हुए।
2016 का शीतकालीन सत्र भी नोटबंदी को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच लगभग पूरी तरह से निष्फल रहा, जिसमें लोकसभा अपने निर्धारित समय के केवल 15% और राज्यसभा 18% समय तक ही काम कर पाई।
2018 के बजट सत्र में भी काफी बाधा देखने को मिली। इसमें लोकसभा केवल 21% और राज्यसभा महज 27% ही काम कर पाई। सत्र को बाधित करने वाले और कई विधेयकों को लंबित छोड़ने वाले मुद्दों में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच कावेरी नदी के जल बंटवारे की मांग और पंजाब नेशनल बैंक में कथित धोखाधड़ी के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन आदि शामिल थे।
2021 के मानसून सत्र में लोकसभा केवल 21% और राज्यसभा 29% तक ही काम कर पाई। इस सत्र में पेगासस और तीन कृषि कानूनों को लेकर बाधा पैदा हुई थी।
2023 के बजट सत्र में निचले सदन ने निर्धारित समय का 33% और ऊपरी सदन ने 24% काम किया। इस बार गतिरोध की वजहें थीं, विपक्ष की ओर से अडानी ग्रुप पर स्टॉक में हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए संसदीय समिति की मांग। विदेश में राहुल गांधी का यह बयान कि भारतीय लोकतंत्र खतरे में है। साथ ही सूरत की एक अदालत की ओर से राहुल गांधी को दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी सदस्यता रद्द होना।
संसद का यह सत्र भी हुआ बाधित
बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही में फिर से रुकावट आने के बाद पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर चर्चा की संभावना काफी कम हो गई। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस बात पर बयान की मांग की कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया था। सरकार आखिरकार इस बात पर सहमत हो गई कि इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होनी चाहिए और शाह बुधवार को ही इसका जवाब देंगे। लेकिन, विरोध-प्रदर्शन जारी रहने के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। विरोध-प्रदर्शनों और हंगामे के कारण संसद में कोई खास विधायी कामकाज नहीं हो सका; कुछ बिल तो बिना बहस के ही ध्वनि मत से पारित कर दिए गए।
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संसद के मानसून सत्र में इस बार सांसदों के समय की ज्यादा बर्बादी हुई है। सत्र में नीट परीक्षा, छात्रों पर हुई बर्बरता और राम मंदिर के चंदा चोरी के गूंज हर दिन सुनाई दी है और सदन बार- बार बाधित होता रहा है। सरकार ने इसी हंगामे में सरकारी कामकाज को चंद मिनटों निपटा लिया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
