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सांसद ने पूछा- लॉकडाउन में ऑटो सेक्टर में कितनी नौकरियां गईं? सरकार बोली- नहीं पता

सरकार से संसद में पूछा गया कि लॉकडाउन के दौरान ऑटो सेक्टर में कितनी नौकरियां गईं हैं? इसपर सरकार का कहना था कि उनके पास इसका कोई आधिकारिक डेटा नहीं है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 21, 2020 11:57 AM
jobs in indian auto industries, job loss in auto sector, jolt for modi govt,Coronavirus, COVID-19, central government, data of healthcare staff, healthcare staff died of Covid, PM Garib Kalyan Insurance Package, parliament, no jobs, jansatta भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय वर्तमान में केबिनेट मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के उत्तरदायित्व में है।

कोरोना संकट के दौरान किए गए लॉकडाउन से अलग-अलग सैक्टर में हजारों लोगों ने अपनी नौकरियां गवां दी हैं। इससे जुड़ा एक सवाल सरकार से संसद में मानसून सत्र के दौरान पूछा गया। सरकार से संसद में पूछा गया कि लॉकडाउन के दौरान ऑटो सेक्टर में कितनी नौकरियां गईं हैं? इसपर सरकार का कहना था कि उनके पास इसका कोई आधिकारिक डेटा नहीं है।

संसद में यह सवाल भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय से पूछा गया था। यह मंत्रालय वर्तमान में केबिनेट मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के उत्तरदायित्व में है। यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने लॉकडाउन से जुड़े किसी भी डेटा के ना होने की बात है। इससे पहले जब सरकार से कोरोना के चलते मारे और संक्रमित हुए हेल्थ केयर स्टाफ या प्रवासी मजदूरों की मौत के आंकड़ों की जानकारी मांगी गई थी। तब भी सरकार की ओर से यही जवाब आया था।

एनडीटीवी के पत्रकार संकेत उपाध्याय ने एक डॉक्यूमेंट शेयर किया है जिसमें कांग्रेस नेता सुरेश नारायण धानोरकर और भारतीय संघ मुस्लिम लीग के नेता के नवसकानी ने संसद में भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय से सवाल पूछा कि क्या कोरोना संकट के दौरान ऑटो सेक्टर में लाखों नौकरियां गई हैं? अगर हां तो किस कंपनी और किस स्टेट में कितनी नौकरियां गईं हैं इसका आंकड़ा क्या है? और सरकार ने बेरोजगार हुए इन लोगों को वापस रोजगार देने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

इसपर मंत्रालय की ओर से कहा गया कि इस पर सरकार के पास कोई स्थायी डेटा नहीं है। इससे पहले केंद्रीय श्रम मंत्रालय से लोकसभा में मजदूरों की मौत से जुड़े आंकड़े मांगे गए तो मंत्रालय ने कहा कि सरकार के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है, ऐसे में मुआवजा देने का ‘सवाल नहीं उठता है।

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले और जान गंवाने वाले हेल्थ केयर स्टाफ जैसे डॉक्टर, नर्स और आशा वर्कर आदि का डेटा नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में दिए अपने लिखित बयान में कहा था कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। इस तरह का डाटा केंद्रीय स्तर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय नहीं रखता है। हालांकि जो ऐसे जो लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण इंश्योरेंस पैकेज के तहत राहत मांग रहे हैं उनका डेटाबेस राष्ट्रीय स्तर पर रखा जा रहा है।

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