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लोकसभा में बोलीं स्‍पीकर- आप सदन भी नहीं चलने देंगे और आरोप भी लगाएंगे, ये नहीं चलेगा

लोक सभा और राज्य सभा दोनों में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा महात्मा गांधी की तुलना दीन दयाल उपाध्याय से करने को लेकर हंगामा हुआ।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन। (पीटीआई फाइल फोटो)

बुधवार (26 जुलाई) को संसद के मॉनसून सत्र में लोक सभा और राज्य सभा की कार्रवाई शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। सदन के दोनों सदनों में कांग्रेसी नेता मंगलवार (25 जुलाई) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अपने पहले संबोधन में राष्ट्रपति महात्मा गांधी की तुलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेता दीन दयाल उपाध्याय से किए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। लोक सभा में हंगामे के बीच जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इराक के मोसुल में लापता 39 भारतीयों के मुद्दे पर जवाब देने के लिए खड़ी हुईं तो विपक्ष नारेबाजी करने लगा। विपक्ष द्वारा नारेबाजी से नाराज लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने विपक्ष से कहा, “आप सदन भी नहीं चलने देंगे और आरोप भी लगाएंगे ये नहीं चलेगा।” महाजन ने कहा कि सुषमा स्वराज कल शाम भी बोलना चाहतीं थी लेकिन आप लोगों के हंगामे के कारण नहीं बोल पाईं।

सुषमा स्वराज ने मोसुल में फंसे भारतीयों पर सोमवार (24 जुलाई) को बयान दिया था। विपक्ष ने सुषमा के बयान को भ्रामक बताया था। जब बुधवार को विपक्ष के कुछ सांसदों ने यही आरोप लगाया तो सुषमा स्वराज ने कहा कि वो उनकी सवालों का जवाब ही देना चाहते हैं। सुषमा स्वराज ने कहा कि ये बहुत ही गंभीर मसला है और पूरी गंभीरता से इसका जवाब देना चाहती हैं। लेकिन विपक्ष ने हंगामा बंद नहीं किया।हंगामे के बीच ही विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष मोसुल के मसले पर सरकार से ज्यादा चिंतित है लेकिन सरकार उन मुद्दों पर बहस नहीं करना चाहती है जिन पर विपक्ष बहस चाहता है। राज्य सभा में कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा ने महात्मा गांधी और दीन दयाल उपाध्याय की कथित तुलना का मुद्दा उठाया।

रामनाथ कोविंद ने पद की शपथ लेने के बाद अपने भाषण में कहा था, “….हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा। एक ऐसा समाज जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीन दयाल उपाध्याय जी ने की थी। ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। ये हमारे सपनों का भारत होगा। एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा। ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा।”

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