Ministers Removal Bill in JPC: संविधान के 13वें संशोधन विधेयक का प्रस्ताव संसद की संयुक्त समिति यानी जेपीसी के पास है। इसमें मंत्रियों को हिरासत में लिए जाने पर, 30 दिन बाद उन्हें पद से हटाने का प्रावधान भी है। 17 जुलाई को जेपीसी की कमेटी इस प्रस्ताव पर रिपोर्ट पारित कर सकती है। सूत्र बताते हैं कि जेपीसी की रिपोर्ट में, सबसे विवादित प्रावधान को बरकरार रखे जाने की संभावना है।
जेपीसी के पास भेजे गए इस प्रस्ताव के विवादित खंड में यह प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य मंत्रियों को गंभीर अपराधों के लिए गिरफ्तार किए जाता है या हिरासत में लिया जाता है, तो दिन तक हिरासत में रहने के चलते उन्हें स्वतः पद से हटा दिया जाएगा। जेपीसी राजनीतिक प्रतिशोध के लिए कानून के दुरुपयोग से बचने के लिए कुछ सतर्क सुझाव भी शामिल कर सकती है।
मानसून सत्र में पारित कराने की तैयारी में सरकार
सूत्रों के अनुसार, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। सरकार की योजना इसी सत्र में ही विधेयक पर चर्चा के साथ ही इसे पारित कराने की भी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल अगस्त में यह विधेयक पेश किया था और इसकी जांच के लिए अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय जेपीसी का गठन किया गया था।
विपक्षी दलों ने किया था जेपीसी का बहिष्कार
कांग्रेस समेत विपक्ष के इंडिया ब्लॉक के अधिकांश सदस्यों ने जेपीसी का बहिष्कार किया था। उनका तर्क था कि समिति में भाग लेना व्यर्थ है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी विपक्ष की चिंताओं को आसानी से नजरअंदाज कर देगी। हालांकि, सत्तारूढ़ एनडीए के सदस्यों ने विपक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया है कि प्रस्तावित कानून में प्रावधान अलोकतांत्रिक, संघीय विरोधी और प्राकृतिक न्याय के मूलभूत सिद्धांत के विपरीत हैं।
ऐसा अनुमान है कि सत्ता पक्ष की तरफ से यह तर्क दिया है कि कम से कम तीन बार जमानत मांगने के लिए 30 दिन पर्याप्त हैं, इसलिए यह प्रस्ताव प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता है।
दुरुपयोग के लिए सिफारिशों पर सभी सहमत
हालांकि, सूत्रों के अनुसार सत्ताधारी गठबंधन के सांसदों, विपक्ष और यहां तक कि तटस्थ सदस्यों को भी यह विश्वास था कि विधेयक के मसौदे में कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रावधान जोड़े जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि यह सुझाव सिफारिशों का हिस्सा होगा। समिति द्वारा यह सिफारिश किए जाने की भी संभावना है कि कानून के दायरे को व्यापक बनाए रखने के बजाय, प्रस्तावित कानून के प्रावधानों का उपयोग करने के लिए अपराध की प्रकृति पर कुछ प्रतिबंध लगाए जाएं।
सूत्रों बताते हैं कि जेपीसी में विपक्षी सांसद रिपोर्ट पर असहमति जता सकते हैं। हालांकि, इस समिति में बीजेपी और एनडीए के सहयोगी दलों का दबदबा है। हालांकि, इसमें AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले भी सदस्य हैं। इसके अलावा YSRCP के निरंजन रेड्डी सिरगापुर (राज्यसभा सांसद) भी 31 सदस्यीय समिति का हिस्सा हैं।
संविधान के 130वें संशोधन विधेयक, 2025 में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी मंत्री पर पांच वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा वाले अपराध का आरोप है और उसे लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार करके हिरासत में रखा गया है, तो उसे पद से हटाया जा सकता है। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा या फिर हिरासत के 31वें दिन स्वतः ही उसे पद से हटाया जा सकता है।
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