संसद के बजट सत्र में इन दिनों पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर विवाद छिड़ा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देते हुए बोलने की अनुमति नहीं देने पर यह विवाद उठा है। इस मुद्दे पर सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सदस्यों को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया। इस बीच राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री अगर लोकसभा में आये तो मैं उन्हें पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब भेंट करूंगा।
राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे का अप्रकाशित संस्मरण संसद परिसर में मीडियाकर्मियों को दिखाया और उसके अंश उद्धृत किये। राहुल ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री आज लोकसभा में आने की हिम्मत करेंगे क्योंकि अगर वे आए तो मैं उन्हें यह किताब सौंप दूंगा। अगर प्रधानमंत्री आते हैं तो मैं स्वयं जाकर उन्हें यह किताब दूंगा ताकि वे इसे पढ़ सकें और देश को सच्चाई का पता चल सके।”
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “भारत के हर युवा को यह किताब देखनी चाहिए। यह एम एम नरवणे की किताब है। उन्होंने इसमें लद्दाख का पूरा ब्योरा दिया है। मुझे बताया गया है कि मैं इस किताब से उद्धरण नहीं दे सकता। मुख्य बात वही है जो प्रधानमंत्री ने कही थी, ‘जो उचित समझो वो करो।’ जब (पूर्व) सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने राजनाथ सिंह जी को फोन किया और कहा कि चीनी टैंक कैलाश रिज तक पहुंच गए हैं, तो हमें क्या करना चाहिए? पहले तो राजनाथ सिंह ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने जयशंकर जी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राजनाथ सिंह से पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर उन्होंने राजनाथ सिंह को दोबारा फोन किया। राजनाथ सिंह ने उनसे कहा कि वे ‘टॉप’ से पूछेंगे।”
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नरेंद्र मोदी ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया- राहुल गांधी
राहुल ने बताया, “टॉप का स्थायी आदेश था कि अगर चीनी सेना आती है तो हमें बिना अनुमति के उन पर गोली नहीं चलानी चाहिए। नरवणे जी और हमारी सेना उन टैंकों पर गोली चलाना चाहती थी क्योंकि वे हमारे क्षेत्र में घुस आए थे। नरेंद्र मोदी जी ने संदेश दिया कि जो उचित समझो वो करो। इसका मतलब है कि नरेंद्र मोदी ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया, उन्होंने सेना प्रमुख को जो चाहे करने को कहा क्योंकि मेरे बस की नहीं है। नरवणे जी लिखते हैं, “मुझे सचमुच अकेलापन महसूस हुआ, मुझे पूरी व्यवस्था ने त्याग दिया था।”
राहुल और रवनीत सिंह बिट्टू के बीच नोकझोंक
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच नोकझोंक देखने को मिली जब संसद परिसर में कांग्रेस नेता ने उन्हें ‘गद्दार’ कहकर संबोधित किया और उसके जवाब में बिट्टू ने कांग्रेस नेताओं को ‘देश के दुश्मन’ बताया। यह घटना संसद के मकर द्वार के निकट घटी, जब वहां वर्तमान बजट सत्र की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे।
कांग्रेस के नेता रह चुके बिट्टू संसद भवन में प्रवेश कर रहे थे और वह टिप्पणी करते सुने गए कि ये (प्रदर्शन कर रहे सांसद) जंग जीतकर आए हैं। इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ”देखिए यहां एक गद्दार चला आ रहा है, मेरे गद्दार मित्र, चिंता मत करो, वापस आ जाओ।” इस पर बिट्टू ने कहा कि ये देश के दुश्मन हैं।’ राहुल गांधी ने केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बिट्टू से हाथ मिलाने का प्रयास किया, हालांकि भाजपा नेता ने हाथ नहीं मिलाया और सीधे संसद भवन के अंदर चले गए।
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(भाषा के इनपुट के साथ)
