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चौथे दिन भी संसद ठप: प्रधानमंत्री ने लोस में जताया खेद, लेकिन विपक्ष पर असर नहीं

केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी संसद में गतिरोध जारी रहा। संसद में मौजूदा गतिरोध तोड़ने के मकसद से सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले बयानों की निंदा संबंधी प्रस्ताव पारित करने की नौ विपक्षी दलों की पेशकश को सरकार ने खारिज कर दिया। राज्यसभा में इस […]

मोदी सरकार संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली को धता बताते हुए बड़े पूंजी मालिकों के हित में जारी किए गए अनेक अध्यादेशों को पारित करवाने का वही दंभ दिखा रही है जो कांग्रेस ने लोकपाल के बाबत दिखाया था। (फोटो-पीटीआई)

केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी संसद में गतिरोध जारी रहा। संसद में मौजूदा गतिरोध तोड़ने के मकसद से सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले बयानों की निंदा संबंधी प्रस्ताव पारित करने की नौ विपक्षी दलों की पेशकश को सरकार ने खारिज कर दिया। राज्यसभा में इस मुद्दे पर पहले ही बयान दे चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लोकसभा में साध्वी के बयान को कड़े स्वरों में खारिज करते हुए विपक्ष से मामले को खत्म करने की अपील की। लेकिन विपक्ष ने उनकी अपील को अनदेखा करते हुए सदन की कार्यवाही का बायकाट किया।

गतिरोध तोड़ने के लिए नौ विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान में संबंधित मंत्री का नाम लिए बिना सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले बयानों की निंदा संबंधी प्रस्ताव की मांग की, जो सरकार को मंजूर नहीं है। राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण शुक्रवार को चार बार के स्थगन के बाद बैठक को करीब सवा तीन बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। हंगामे के बीच ही उपपसभापति पीजे कुरियन ने सरकार को विपक्ष के साथ बातचीत कर इस मुद्दे का सोमवार तक हल निकालने का सुझाव दिया। उधर लोकसभा में प्रधानमंत्री के बयान पर असंतोष जताते हुए लगभग समूचे विपक्ष ने पूरे दिन के लिए सदन से वाकआउट किया।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में दिए अपने बयान में साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणी को खारिज करने के साथ विपक्ष से आग्रह किया कि मंत्री के माफी मांग लेने पर सदन को चलने देना चाहिए। मोदी ने कहा- जिस बयान को लेकर विवाद चल रहा है, जब इस बयान के विषय में मुझे जानकारी मिली, उसी दिन सुबह मेरी पार्टी की बैठक थी। संसद सदस्यों की बैठक थी। उसमें मैंने बहुत कठोरता से इस तरह की भाषा को नामंजूर किया। और मैंने यह भी कहा कि हम सबको इन चीजों से बचना चाहिए। ऐसे शब्दों को कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता।

प्रधानमंत्री के बयान के बाद सदन में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री को मालूम है कि यह विषय किस संदर्भ में उठाया गया है। यह बात उनके संज्ञान में लाना जरूरी थी। हम किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं हैं, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। उन्होंने कहा कि आपके मंत्रिगण ऐसे बयान दे रहे हंै जिससे देश में दूसरे तरह का माहौल बन रहा है। प्रधानमंत्री के बयान से असंतोष जताते हुए अपने मुंह पर काली पट्टी बांधे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत उनकी पार्टी व तृणमूल कांग्रेस, सपा, वामदल समेत कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।

इसी मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने सदन के बाहर कहा कि निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणियों पर किया जा रहा विरोध विपक्ष पर भारी पड़ेगा। उन्होंने साध्वी के इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए विपक्ष पर बार-बार रुख बदलने का आरोप लगाया। राज्यसभा में शुक्रवार को कांगे्रस के उपनेता आनंद शर्मा, माकपा नेता सीताराम येचुरी, जद (एकी) नेता केसी त्यागी और तृणमूल कांगे्रस के डेरेक ओ ब्रायन ने सरकार से कहा कि वह सदन में एक ऐसा प्रस्ताव पारित करे जिसमें सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले बयानों को संविधान विरोधी करार देते हुए उनकी भर्त्सना की जाए।

विपक्ष के नेताओं ने कहा कि उन्होंने मंत्री को बर्खास्त करने की अपनी मांग को नर्म करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित करने की पेशकश की है और अब गतिरोध को दूर करने की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रस्ताव पारित करने की नौ विपक्षी दलों की पेशकश को मान लेना चाहिए। संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उच्च सदन में विपक्ष की इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्ताव लाने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि जब मंत्री ने माफी मांग ली है तो मामला खुद खत्म हो जाता है।

इसी मुद्दे पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार ने विपक्ष की बात को हमेशा माना है। विपक्ष की मांग के आधार पर ही प्रधानमंत्री का सदन में बयान हुआ। जिसमें उन्होंने मंत्री के बयान को कड़ाई से नामंजूर किया। बसपा अध्यक्ष मायावती ने साध्वी मुद्दे भाजपा पर ‘दलित कार्ड’ खेलने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री इस समुदाय की नहीं हैं। सदन के बाहर दिए बयान में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील पर भी आपत्ति जताई कि केंद्रीय मंत्री की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए उनकी माफी स्वीकार कर ली जानी चाहिए। मायावती ने कहा कि यह सही नहीं है क्योंकि इसका मतलब एक समुदाय के खिलाफ आरोप लगाना है।

साध्वी निरंजन ज्योति के विवादास्पद बयान के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपने मुंह पर काली पट्टी बांधकर शुक्रवार को संसद भवन परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया और मंत्री के इस्तीफे की मांग की। धरना देने वालों में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे। गांधी प्रतिमा के पास धरना देने वालों में तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, राजद, सपा और आम आदमी पार्टी के सांसद शामिल थे। हालांकि माकपा सदस्य अपनी प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस की मौजूदगी का हवाला देते हुए धरना स्थल से दूर रहे। हालांकि उसने साफ किया कि वे इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ है।

कांग्रेस सदस्यों के वहां से हटते ही पांच केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा के सांसदों ने गांधीजी की प्रसिद्ध ‘रामधुन’ की तर्ज पर विपक्ष को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना के लिए यह भजन गुनगुनाया, ‘रघुपति राघव राजा राम, कांग्रेस को सन्मति दे भगवान।’ केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा, अनंत कुमार, थावर चंद गहलोत, रामविलास पासवान और मुख्तार अब्बास नकवी ने भी भजन गाया। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर संसद में पिछले चार दिनों से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री ने गुरुवार को राज्यसभा में और शुक्रवार को लोकसभा में बयान दिया। लेकिन विपक्ष इस तरह के बयानों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव के अपने रुख पर अड़ा रहा। जबकि साध्वी निरंजन ज्योति पहले ही मंगलवार को अपने बयान पर दोनों सदनों में खेद जता चुकी हैं। उन्होंने राज्यसभा में यह भी कहा था कि अगर सदन को लगता है तो वे माफी मांगने को तैयार हैं।
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा

मैं मानता हूं कि क्षमा मांगने के बाद, इस सदन में इतने वरिष्ठ लोग बैठे हैं, इतने अनुभवी लोग बैठे हैं कि क्षमा के प्रति उनका क्या भाव है, हम भलीभांति परिचित हैं। यह विषय सदन में उठने से पहले मैंने हमारे सभी सांसदों के सामने रखा था। उसी के तहत मंत्री जी, जो कि नई हैं, सदन में पहली बार आई हैं, उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) से हम सभी परिचित हैं, उन्होंने क्षमा मांगी है। मैं सदन से आग्रह करूंगा कि हम देश हित में अपने कार्य को और आगे बढ़ाएं।
बर्खास्तगी पर नरम

विपक्ष के नेताओं ने कहा कि उन्होंने मंत्री को बर्खास्त करने की अपनी मांग को नरम करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित करने की पेशकश की है और अब गतिरोध दूर करने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार को नौ विपक्षी दलों की पेशकश मान लेनी चाहिए। संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उच्च सदन में विपक्ष की इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्ताव लाने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि जब मंत्री ने माफी मांग ली है तो मामला खुद खत्म हो जाता है।

साध्वी के बहाने दलित कार्ड

बसपा प्रमुख मायावती ने प्रधानमंत्री की इस अपील पर आपत्ति जताई कि केंद्रीय मंत्री की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए उनकी माफी स्वीकार कर ली जानी चाहिए। मायावती ने कहा कि भाजपा कहती है कि वे दलित महिला हैं। मंत्री न तो दलित समुदाय की हैं और न अनुसूचित जाति की। वे पिछड़ी निषाद जाति की हैं। पूरे निषाद समुदाय को इस मामले में लाना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा पर दलित कार्ड खेलने का आरोप लगाया।

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