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जानिए सीमा-एलओसी पर तैनात जवानों को नाश्ते, लंच और डिनर में क्या मिलता है?

ठंड के मौसम में या दुर्गम इलाकों में तैनाती के दौरान सेना सीएपीएफ के जवानों को डिब्बाबंद राशन उपलब्ध कराती है। जवान डिब्बाबंद खाने को लेकर अक्सर शिकायत करते हैं कि वो सूखा हुआ और मुश्किल से खाने लायक होता है।

बीएसएफ के एक जवान ने फेसबुक पर वीडियो पोस्ट करके खराब खाना दिए जाने की शिकायत की थी। (फाइल फोटो)

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान तेज बहादुर यादव द्वारा फेसबुक पर खराब खाने की शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ये मुद्दा सुर्खियों में है। आइए हम आपको बताते हैं कि इन जवानों को खाने में नियमतः क्या मिलना चाहिए और उन्हें ये खाना देने की जिम्मेदारी किसकी है। बीएसएफ, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) इत्यादि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के अंतगर्त आते हैं। इन सुरक्षा बलों को पैरामिलिट्री (अर्धसैनिक बल) भी कहते हैं। सीेएपीएफ गृह मंत्रालय के अधीन है। भारत में अर्धसैनिक बलों की संख्या करीब सात लाख 20 हजार है।

आम तौर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी करती है और भारतीय सेना नियंत्रण रेखा (एलओसी) की लेकिन कुछेक जगहों पर बीएसएफ को एलओसी पर भी तैनात किया जाता है। इनमें से एक पोस्ट खेत है जहां वीडियो में शिकायत करने वाले तेज बहादुर यादव तैनात थे। बीएसएफ को ऐसी पोस्ट में सेना के संग बेहतर तालमेल विकसित करने के लिए तैनात किया जाता है। ऐसी पोस्टों पर बीएसएफ सेना के मातहत काम करती है और बीएसएफ के जवानों को सेना के जवानों जैसा ही खाना मिलता है।

गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, “सीएपीएफ के जवान सेना के साथ या अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण रेखा या सेना के ऑपरेशनल कमांड पर तैनाती के दौरान सेना ही की तरह 3850 कैलोरी राशन के लिए राशन मनी अलावैंस (आरएमए) पाने के हकदार होंगे।” मंत्रालय के आदेश के अनुसार जब सेना और अर्धसैनिक बल एक साथ तैनात होंगे तो दोनों का मेस अलग-अलग चलना चाहिए। हालांकि अर्धसैनिक बलों के मेस के लिए भी राशन आर्मी सप्लाई डीपो से आएगा लेकिन उसका व्यय सीएपीएफ का वहन करना होगा।

ठंड के मौसम में या दुर्गम इलाकों में तैनाती के दौरान सेना सीएपीएफ के जवानों को डिब्बाबंद राशन उपलब्ध कराती है। जवान डिब्बाबंद खाने को लेकर अक्सर शिकायत करते हैं कि वो सूखा हुआ और खाने लायक नहीं होता। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर साल 2013 में तैनात रहे बीएसएफ के जवान राम शंकर कहते हैं, “जब हम डिब्बा खोलते हैं तो सूखा हुआ मीट और सूखा हुआ प्याज मिलता है…उस मौसम में कुछ भी स्वादिष्ट नहीं लगता।”

राशन मनी अलावैंस (आरएमए) के तौर पर अर्धसैनिक बलों को 2905 रुपये हर महीने या 95.52 रुपये प्रति दिन मिलते हैं। ज्यादा ऊंचाई पर तैनात सुरक्षा बलों को आरएमए के अलावा प्रति दिन 191.04 रुपये का अतिरिक्त भत्ता मिलता है।

अर्धसैनिक बल गृह मंत्रालय के तहत आते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार अर्धसैनिक बलों के राशन भत्ते में साल 2014 में संशोधन किया गया था। 1980 में ये 106 रुपये, 1995 में 450 रुपये और साल 2000 में 892 रुपये था।

प्रति जवान निर्धारित कैलोरी- अर्धसैनिक बल- 3850, सेना (मैदानी इलाके में)- 3906, सेना (ऊंचाई के इलाके में)- 4664, नागरिकों को मिलने वाला औसत- 2300, अमेरिकी नागरिकों का औसत- 3770, अमेरिकी सैनिकों का औसत- 4000-5000

अर्धसैनिक बलों को मिलने वाला खाना- नाश्ते में- दो परांठे, एक अंडा, अचार, सब्जी, फल। लंच में- चावल, चार रोटी, 25 ग्राम दाल, 80 ग्राम पालक पनीर या 100 ग्राम चिकन करी और सलाद। डिनर में- चावल, चार रोटी, दाल, सब्जी, खीर और सलाद।

देखें अर्धसैनिक बलों को क्या राशन मिलता है-

paramilitary ration chart अर्धसैनिक बलों को मिलने वाला राशन। (इंडियन एक्सप्रेस)

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