Paradise Papers Indian Names, Paradise Papers Leak India: Foreign Company Invested in Veerappa Moily's Son Harsha Moily Companies Moksha-Yug Access - पैराडाइज़ पेपर्स: जब मनमोहन सरकार में मंत्री थे वीरप्पा मोइली, तब बेटे की कंपनी में विदेशी फर्म ने लगाया था पैसा - Jansatta
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पैराडाइज़ पेपर्स: जब मनमोहन सरकार में मंत्री थे वीरप्पा मोइली, तब बेटे की कंपनी में विदेशी फर्म ने लगाया था पैसा

Paradise Papers Leak India: इंडियन एक्सप्रेस आईसीआईजे का सदस्य है और उसने कर चोरों के स्वर्ग माने जाने वाले देशों की कंपनियों से मिले एक करोड़ 34 लाख दस्तावेज में भारत से संबंधित दस्तावेज की पड़ताल की है।

Author November 6, 2017 1:48 PM
पैराडाइज पेपर्स में पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली के बेटे हर्ष मोइली की कंपनी का नाम आया है। (तस्वीर- वीरप्पा मोइली का रेखांकन, इंडियन एक्सप्रेस)

कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में मंत्री थे तब उनके बेटे हर्ष मोइली ने यूनिटस ग्रुप की सहयोगी कंपनियों से निवेश हासिल करके एक कंपनी शुरू की थी। यूनिटस ग्रुप सिएटल और बेंगलुरु स्थिति अपनी इकाइयों यूनिटस लैब, यूनिटस इक्विटी फंड, यूनिटस कैपिटल, यूनिटस सीड फंड और यूनिटस इम्पैक्ट इत्यादि के माध्यम से निवेश करता है। ऐपलबी दस्तावेज से पता चलता है कि मारिशस स्थित यूनिटस इम्पैक्ट पीसीसी को ऐपलबी ने प्रोटेक्टेड सेल कंपनी के तौर पर फरवरी 2012 में शामिल किया था और इसमें केवल एक शेयर धारक यूनिटस इम्पैक्ट पार्टनर एलएलसी।

पीसीसी की दो मुखौटा कंपनियां हैं: एक, किनारा यूनिटस इम्पैक्ट पार्टनर, इसने साल 2014 तक वित्तीय लेनदेन नहीं शुरू किया था और न ही इसके शेयर लिए गये थे। दूसरी, हर्ष मोइली की कंपनी मोक्ष-युग एक्सेस प्राइवेट लिमिटेड में निवेश करने वाली एमवाईए यूनिटस इम्पैक्ट पार्टनर्स। ऐपलबी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस मुखौटा कंपनी के एक मात्र शेयर धारक यूआईपी एमआईए एलएलसी थी। ऐपलबी ने मार्च 2012 में “क्लाइंट स्क्रीनिंग चेक” की अपनी रिपोर्ट में हर्ष मोइली को “राजनीतिक संंबंध वाला आदमी” बताया था कि क्योंकि उनके पिता (उस समय) भारत सरकार में कार्पोरेट अफेयर्स मंत्री थे

क्या है पैराडाइज पेपर्स?- जर्मन अखबार Süddeutsche Zeitung को बरमूडा की कंपनी ऐपलबी, सिंगापुर की कंपनी एसियासिटी ट्रस्ट और कर चोरों के स्वर्ग समझे जाने वाले 19 देशों में कराई गई कार्पोरेट रजिस्ट्रियों से जुड़े करीब एक करोड़ 34 लाख दस्तावेज मिले। जर्मन अखबार ने ये दस्तावेज इंटरनेशनल कॉन्सार्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आईसीआईजे) के साथ साझा किया। इंडिया एक्सप्रेस आईसीआईजे का सदस्य हैं और उसने भारत से जुड़े हुए सभी दस्तावेजों की पड़ताल की है।

ऐपलबी के पंजीकृत दस्तावेज के अनुसार साल 2012 में हर्ष मोइली के पास मोक्ष-युग एक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमेटेड के 37.24 प्रतिशत शेयर, मारिशस यूनिटस कॉर्पोरेशन के पास 26.33 प्रतिशत शेयर, विनोद खोसला के पास 17.37 प्रतिशत शेयर और एमवाईए एम्प्लाई स्टॉक ट्रस्ट के पास 7.29 प्रतिशत शेयर थे। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार कंपनी में निवेश करने वालों में हर्ष मोइली के अलावा यूनिटस इक्विटी फंड (यूनिटस इंक के इक्विटी फंड से जुड़ी कंपनी), खोसला इम्पैक्ट फंड (विनोद खोसला और मार्क स्ट्राब द्वारा स्थापित) और यूनिटस इम्पैक्ट (कामगार गरीब तबके लिए काम करने वाली संस्थाओं में निवेश करने वाली कंपनी) शामिल हैं। ऐपलबी के दस्तावेज के अनुसार मोक्ष-युग एक्सेस प्राइवेट लिमिटेड ग्रामीण इलाकों में सप्लाइ चेन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करती है। इस जानकारी के अनुसार कंपनी जमीनी उत्पादकों को बाजा से जोड़ती है।

ऐपलबी के दस्तावेज के अनुसार जहां एमवाईए यूनिटस इम्पैक्ट की पार्टनर कंपनी में केवल एक शेयर धारक यूआईपी एमवाईए एलएलसी है वहीं उसका यूनिटस इम्पैक्ट पीसीसी से शेयर सब्सक्रिप्शन को लेकर साझीदारी है। एमआईए हर्ष मोइली की कंपनी मोक्ष-युग एक्सेस का संक्षिप्त रूप है और ध्यान देने की बात है कि यूनिटस इम्पैक्ट पीसीस से जुड़ी सभी कंपनियों में एमवाईए जुड़ा हुए है। ऐपलबी के दस्तावेज के अनुसार यूनिटस इम्पैक्ट पीसीसी ने मोक्ष-युग एक्सेस के शेयरों में निवेश करने के लिए एक सेल-1 अकाउंट बनाया था। 15 मार्च 2012 को किए गए एक समझौते के अनुसार यूनिटस इम्पैक्ट एमवाईए एलएलसी ने 7,36,270 डॉलर में शेयर खरीदे थे। यूनिटस इम्पैक्ट एमवाईए एलएलसी में कुल 14 शेयर धारक हैं लेकिन जुलाई 2014 की एक पड़ताल रिपोर्ट के अनुसार कंपनी में शेयरधारकों का हिस्सा बहुत है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के ज्यादातर शेयर किसी अज्ञात व्यक्ति या संस्था के पास हैं। दस्तावेज के अनुसार ये पैसे भारत में निवेश किए जाने थे लेकिन कम्प्लायंस रिपोर्ट में कंपनी को प्रमोटरों से हलफनामा लिया गया कि यूनिटस इम्पैक्ट पीसीसी भारत से मिले पैसे का उपयोग नहीं करेगी।

हर्ष मोइली के जवाब का संपादित अंश- एमवाईए की स्थापना और 2005 में उसकी शुरुआत से सीईओ के तौर पर उसका नेतृत्व करते हुए मैं इसके विकास का गवाह रहा हूं और मैंने ग्रामीण भारत में इम्पैक्ट बिजनेस चलाने की चुनौतियों का सामना किया है। द डेयरी/एग्री सेक्टर काफी उठापटक वाला है लेकिन ग्रामीण भारत के लिए ये काफी अहम है। हमने अपने बिजनेस मॉडल को सफल बनाने की पूरी कोशिश की। एमवाईए की नीति रही है कि किसान पहली प्राथमिकता हैं, और हमारा लक्ष्य  था कि हमारे डेयरी किसान गाय के दूध के उत्पादन (गुणवत्ता और मात्रा दोनो में) दुनिया के सर्वोत्तम में एक रहें…इसी बुनियादी मकसद से हमने यूनिटस इम्पैक्ट पीसीसी एमवाईए यूआईपी समेत कई से निवेश लिया…ये ध्यान रखें कि हमने कई अ्य पेशेवर संस्थानों और निवेशकों से भी पैसा लिया था, मसलन यूनिटस इक्विटी फंड और खोसला इम्पैक्ट ( दोनों ने साल 2008 में निवेश किया था)। एमवाईए में इनमें से कई निवेशकों ने मेरे पिता वीरप्पा मोइली के यूपीए-2 में मंत्री बनने के पहले से ही निवेश शुरू किया था।

एमवाईए  में सभी निवेशकों के निवेश और मेरी हिस्सेदारी पब्लिक डोमेन (सार्वजनिक) में है।  कंपनी रजिस्ट्रार के कार्यालय और रिजर्व बैंक में सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए जाते रहे हैं। एमवाईए अपना सालाना टैक्स रिटर्न भी भरता रहा है। ये जानकारी भी पब्लिक डोमेन में है।

…मेरे पिता एमवाईए के प्रबंधन या संचालन से कभी भी नहीं जुड़े रहे हैं। एमवाईए पेशेवर ढंग से चलने वाली एक कंपनी है जो कार्पोरेट प्रशासन और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप चलती है।

…मेरे पिता साल 2012 में केंद्रीय मंत्री थे इसका एमवाईए में किए गये यूनिटस इम्पैक्ट के निवेश का कोई लेना-देना नहीं है। यूनिटस इम्पैक्ट ने (दूसरे निवेशकों ने भी) ये निवेश अपने मूल्यांकन के बाद किया था।

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