देशभर में पेपर लीक के विभिन्न मामलों को लेकर हंगामा मचा हुआ है। एक के बाद एक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से युवाओं में खासा नाराजगी है। इन मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की लगातार मांग उठ रही है। हालांकि, बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक मामलों के बावजूद परीक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई के उदाहरण बेहद कम हैं।
2002 से 2025 के बीच सामने आए 45 बड़े पेपर लीक मामलों की ‘एक्सप्रेस पड़ताल’ में पता चला कि केवल कुछ अधिकारियों को पद से हटाया गया, निलंबित किया गया या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई। कई मामलों में जांच और मुकदमे अब भी जारी है। इनमें एक मामले में अदालत से सजा भी हुई। जबकि कुछ अधिकारी बाद में बहाल भी कर दिए गए।
पेपर लीक के प्रमुख मामले इस प्रकार हैं –
2024 UGC-NET
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया और लगभग चार महीने तक अनिवार्य प्रतीक्षा (Compulsory Wait) पर रखा गया। बाद में उन्हें इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया और फिर उनके मूल कैडर छत्तीसगढ़ वापस भेज दिया गया। सिंह ने इस मामले पर बातचीत करने से इनकार किया।
2024 UPPSC
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी को समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) प्रारंभिक परीक्षा में कथित लापरवाही के आरोपों के बीच हटा दिया गया। पुलिस ने जुलाई 2024 में 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामले की जांच शुरू की। जून से सितंबर 2024 के बीच 12 गिरफ्तार आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली। मामला प्रयागराज की अदालत में लंबित है। इस संबंध में अजय ने टिप्पणी करने से इनकार किया।
2024 यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष रेणुका मिश्रा, जो 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और डीजीपी रैंक की हैं, उनको पेपर लीक के बाद पद से हटा दिया गया और कुछ समय के लिए अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश डीजीपी कार्यालय से संबद्ध हैं। रेणुका मिश्रा ने कहा कि वह इस मामले पर बात नहीं करना चाहतीं।
2023 बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती
पुलिस ने सेवानिवृत्त डीजी संजीव कुमार सिंघल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की। वे सेवानिवृत्ति के बाद केंद्रीय सिपाही चयन बोर्ड (CSBC) के प्रमुख थे। पेपर लीक के बाद उन पर कथित लापरवाही के आरोप लगे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एसके सिंघल ने कहा कि वह “उचित समय पर” इस बारे में बात करेंगे।
2022 RPSC
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य बाबूलाल कटारा को वरिष्ठ अध्यापक भर्ती से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया और जनवरी 2024 में निलंबित कर दिया गया। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन शिकायत दायर की है। फिलहाल कटारा न्यायिक हिरासत में हैं और मुकदमा भी जारी है।
2021 REET लेवल-2
तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के अध्यक्ष डी.पी. जारोली को शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) पेपर लीक मामले में पद से हटा दिया था। आरबीएसई सचिव अरविंद कुमार सेंगवा को निलंबित किया गया, लेकिन बाद में बहाल कर नवंबर 2022 में फिर से पदस्थापित किया गया। ईडी मामले की जांच कर रही है। डी.पी. जारोली ने कहा, “मुझे राजनीतिक साजिश के तहत हटाया गया। सेंगवा के साथ भी अन्याय हुआ।”
2021 UKSSSC
आईएएस अधिकारी एस. राजू ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के अध्यक्ष पद से 5 अगस्त 2022 को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में “नैतिक जिम्मेदारी” लेते हुए यह कदम उठाया। 1984 बैच के सेवानिवृत्त अधिकारी राजू सितंबर 2016 से आयोग के अध्यक्ष थे। मामला अदालत में विचाराधीन है।
राजू ने कहा कि इस्तीफा उनका व्यक्तिगत निर्णय था। उन्होंने एसटीएफ को ऐसे अभ्यर्थियों की सूची सौंपी थी जिनके पिछले परीक्षा परिणाम और लीक हुई परीक्षा के अंक संदिग्ध थे, जिससे मामले का खुलासा करने में मदद मिली। उन्होंने कहा, “मैंने नकल विरोधी कानून का मसौदा तैयार किया था, जिसे सरकार ने लागू किया।”
2021 UPTET
उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार उपाध्याय पर यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) पेपर लीक मामले में मुकदमा दर्ज हुआ, उन्हें निलंबित किया गया और गिरफ्तार भी किया गया। बाद में उनका निलंबन रद्द कर दिया गया और उन्हें संयुक्त निदेशक के पद पर प्रमोट किया गया। पुलिस ने 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है और मुकदमा जारी है। संजय ने कहा, “विभागीय जांच में मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ।”
2021 RPSC
आरपीएससी सदस्य रामूराम राइका को सब-इंस्पेक्टर भर्ती मामले में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
2018 यूपी शिक्षक भर्ती
UPPSC की परीक्षा नियंत्रक अंजू लता कटियार को कथित लापरवाही के आरोप में पद से हटाया गया और गिरफ्तार किया गया। 2019 से अब तक इस मुकदमे में कम से कम 202 बार सुनवाई की तारीख लग चुकी है। अंजू को बाद में बहाल कर राज्य राजस्व परिषद में तैनात किया गया। अंजू ने आरोपों को “निराधार” बताया और न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि त्वरित सुनवाई से “सच्चाई सामने आएगी और न्याय होगा।”
2015 UPPSC
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2015 में UPPSC अध्यक्ष अनिल यादव की नियुक्ति रद्द कर दी थी। अनिल ने किसी भी गलत काम से इनकार करते हुए आरोपों को “प्रचार” बताया और कहा कि इन्हें “किसी अदालत में साबित नहीं किया गया है।”
2013 RPSC
तत्कालीन आरपीएससी अध्यक्ष हबीब खान गौरण ने राजस्थान न्यायिक सेवा भर्ती मामले में इस्तीफा दिया, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्होंने आत्मसमर्पण किया और बाद में जमानत प्राप्त की। मामला अभी भी विचाराधीन है। हबीब ने कहा कि उनके खिलाफ “कोई सबूत नहीं है” और वे फिलहाल जमानत पर हैं।
2010 रेलवे भर्ती
रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) मुंबई के पूर्व अध्यक्ष सतेन्द्र मोहन शर्मा और नौ अन्य लोगों को 30 जनवरी 2024 को हैदराबाद की सीबीआई अदालत ने सहायक लोको पायलट और सहायक स्टेशन मास्टर भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के मामले में दोषी ठहराया। उन्हें पांच वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके बाद 2 फरवरी 2024 को तेलंगाना हाईकोर्ट ने सतेन्द्र को जमानत दे दी। उनसे टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका।
