ताज़ा खबर
 

मोदी सरकार से किसानों को लोन पर मिलने वाली सब्सिडी नहीं देने की सिफारिश

कृषि क्षेत्र के लिए नौ लाख करोड़ रुपए की ऋण योजना के बेहतर तरीके से क्रियान्वयन पर सुझाव देने के लिए गठित सरकारी समिति ने सुझाव दिया है कि तीन लाख रुपए से अधिक के अल्पकालिक ऋण पर ब्याज छूट नहीं दी जानी चाहिए।

Author नई दिल्ली | April 24, 2016 2:28 PM
Nabard, Crop Loan, Agricultural Ministry, V C Sarangi, Agriculture Secretary, Shobhana K Patnaik, MODI GOVERNMENT, नाबॉर्ड, मोदीस सरकार, कृषि ऋण, किसानों की आत्महत्या, सूखा, किसानमध्य प्रदेश के किसान आय घटने से संकट का सामना कर रहे हैं। ऋणग्रस्तता के कारण किसान द्वारा आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। (FILE PHOTO)

कृषि क्षेत्र के लिए नौ लाख करोड़ रुपए की ऋण योजना के बेहतर तरीके से क्रियान्वयन पर सुझाव देने के लिए गठित सरकारी समिति ने सुझाव दिया है कि तीन लाख रुपए से अधिक के अल्पकालिक ऋण पर ब्याज छूट नहीं दी जानी चाहिए। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सब्सिडी पूरी भुगतान अवधि के लिए दी जानी चाहिए न कि सिर्फ एक साल के लिए।

कृषि मंत्रालय ने नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन वी सी सारंगी की अध्यक्षता में फसल ऋण जरूरतमंद छोटे तथा सीमांत किसानों तक पहुंचाने और ब्याज छूट योजना का बेहतरीन उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नौ सदस्यों की एक समिति का गठन किया है। ब्याज छूट की योजना के तहत किसानों को फिलहाल एक साल तक के लिए तीन लाख रुपए तक का अल्पकालिक ऋण सात प्रतिशत के ब्याज पर मिलता है। जो किसान इसे समय पर चुका देते हैं उन्हें यह ऋण चार प्रतिशत ब्याज पर मिलता है। सरकार ने इस साल के बजट में कृषि ऋण लक्ष्य बढ़ाकर नौ लाख करोड़ रुपए कर दिया और चालू वित्त वर्ष में ब्याज सब्सिडी के लिए 15,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

समिति ने हाल में सौंपी गई रपट में कहा कि 2006-07 में ब्याज सब्सिडी योजना पेश करने के बाद कृषि ऋण प्रवाह बढ़ा है। हालांकि, समिति ने इस कार्यक्रम को लक्षित समूह तक पहुंचाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इस रपट के आधार पर मंत्रालय कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है।
सारंगी समिति ने अपने प्रमुख सिफारिशों में कहा कि ब्याज छूट योजना तीन लाख रुपए प्रति किसान की अल्पकालिक फसल ऋण आवंटन सीमा के साथ बरकरार रखनी चाहिए। इसमें कहा गया, ‘‘यह सुविधा उन स्थितियों में उपलब्ध नहीं हो सकती जबकि फसल ऋण आवंटन तीन लाख रुपए से अधिक हो।’’

सूत्रों ने बताया कि फिलहाल यदि आवंटित ऋण की राशि तीन लाख रुपए से अधिक है तो इस योजना के तहत किसानों को सिर्फ तीन लाख रुपए तक के ऋण पर ब्याज छूट मिलेगी। समिति ने सुझाव दिया है कि उन किसानों को ब्याज सब्सिडी प्रदान न की जाए जिन्हें तीन लाख रुपए से अधिक का ऋण लेते हैं। ऋण के बोझ से दबे कृषि क्षेत्र के संकट को कम करने के लिए समिति ने सुझाव दिया कि तय तरीख तक 12 महीने के बाद भी फसल ऋण पर ब्याज सब्सिडी मुहैया कराई जाए ताकि किसानों को कर्ज चुकाने के लिए साहूकारों से कर्ज न लेना पड़े।

समिति ने कहा कि गन्ना और केले जैसी फसले हैं जो लंबी अवधि वाली फसल है इसलिए किसानों को साल भर के भीतर ऋण भुगतान में मुश्किल होती है। ये सुझाव ऐसे वक्त आए हैं जबकि किसान संकट का सामना कर रहे हैं और देश के विभिन्न भागों में लगातार दो साल सूखे की स्थिति के कारण आय कम होने तथा ऋणग्रस्तता के कारण किसानों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 पीएम मोदी के सामने भावुक हो गए देश के चीफ जस्‍टिस टीएस ठाकुर, जजों पर काम के बोझ का किया जिक्र
2 खुर्शीद ने मोदी सरकार पर निशाना, भाषणों से काम नहीं चलेगा, चीन की मानसिकता समझने की जरूरत
ये पढ़ा क्या?
X