जावेद अख्तर के ‘जश्न-ए-रिवाज’ बयान पर बोले संबित पात्रा, फरहान का नाम आनंद क्यों नहीं रख दिया?

टीवी डिबेट में तसलीम रहमानी ने कहा कि दीये जलाने से भाजपा को वोट नहीं मिलेंगे।

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अयोध्या में बुधवार, 3 नवंबर, 2021 को दीपोत्सव समारोह के दौरान सरयू नदी के तट पर मिट्टी के दीपक जलाते श्रद्धालु। (पीटीआई फोटो)

दिवाली पर अयोध्या में 12 लाख दीये जलाने पर राजनीतिक दलों में बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग इसे पैसे की बर्बादी बता रहे हैं तो कुछ दूसरे लोग इसे गरीबों के साथ मजाक कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने इस तरह के आयोजन के पीछे यूपी के चुनाव में अपर कास्ट के वोट को बड़ा कारण बता रहे हैं। हालांकि दिवाली पर इस तरह का आयोजन पिछले साल भी हुआ था। टीवी चैनल न्यूज-18 इंडिया पर इस मुद्दे पर हुए डिबेट में भी इसको लेकर कई तरह की बातें कही गईं।

डिबेट के दौरान दिवाली का नाम ‘जश्न-ए-रिवाज’ बोले जाने पर चर्चा हुई। जावेद अख्तर ने इस मुद्दे को लेकर बयान दिया था कि ‘जश्न-ए-रिवाज’ का मतलब सेलेब्रेशन ऑफ ट्रेडिशन है और दिवाली भी ट्रेडिशन है। इससे फर्क क्या पड़ता है? भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस पर ऐतराज जताते हुए कहा कि “अगर दिवाली को ‘जश्न-ए-रिवाज’ कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता है तो जावेद अख्तर साहब अपने बेटे का नाम फरहान अख्तर की जगह आनंद क्यों नहीं रख लेते। फरहान का मतलब खुशी, आनंद और उत्साह होता है।” पूछा कि उन्होंने फरहान ही क्यों रखा?

डिबेट में एंकर अमिश देवगन ने कहा कि दिवाली और ईद को लेकर ऐसी बातें क्यों की जा रही हैं? 12 लाख दिया जलाने से लोगों को क्यों एतराज है। इस पर तसलीम रहमानी ने कहा कि “मुझे वो दौर वापस चाहिए जिसमें मैं दिवाली भी मना सकूँ और ईद भी मना सकूं।” बीजेपी नफरत की राजनीति करती है, आप हिन्दू मुस्लिम ना करें। इस पर अमिश देवगन ने कहा किसने कहा कि दिवाली और ईद मनाने भी रोक है। ईद को कौन खत्म कर रहा है। देश में हर जगह ईद मनाई जाती है।

अयोध्या में छोटी दिवाली पर 12 लाख दीये जलाए जाने पर सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने कमेंट किए हैं। पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने प्रदेश सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, “12 लाख दीये, 36 हजार लीटर तेल, गरीब प्रदेश में 30 प्रतिशत को रोटी नसीब नहीं। आज श्रीराम अयोध्या अवश्य पधारे होंगे।”

उनके इस ट्वीट पर भी कई लोगों ने जवाब दिए हैं और इसे गरीबों के साथ अन्याय की बात कही है। लोगों का कहना है कि जितना पैसा दीये जलाने पर खर्च किए गए, उतने पैसे से लाखों गरीबों के घर में भोजन बनते और भूखे लोगों की भूख मिटती। इसको लेकर बहसबाजी जारी है।

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