PANDORA PAPERS: दिवालिया बता भारत में पचा लिए बैंकों के 88000 करोड़ रुपए, विदेश में करोड़ों का निवेश

पेंडोरा पेपर्स में ये बात सामने आई है कि ऐसे कई केस हैं, जिसमें लोन डिफॉल्टर्स ने खुद को दिवालिया घोषित किया है। इनमें से कई को गिरफ्तार भी किया गया लेकिन इन लोगों के पास विदेश में अरबों की संपत्ति है।

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इसमें रियल एस्टेट क्षेत्र में मुंबई स्थित व्यवसायियों का एक समूह भी शामिल है, जिन पर भारतीय बैंकों का 88,000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है।

पैंडोरा पेपर्स मामले में दिग्गज बिजनेसमैन अनिल अंबानी और मशहूर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का नाम सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। अनिल अंबानी अकेले ऐसे बिजनेसमैन नहीं है, जिन्होंने खुद को दिवालिया घोषित किया और विदेशों में संपत्ति बना रखी है।

बल्कि द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जांचे गए पेंडोरा पेपर्स में ये बात सामने आई है कि ऐसे कई केस हैं, जिसमें लोन डिफॉल्टर्स ने खुद को दिवालिया घोषित किया है। इनमें से कई को गिरफ्तार भी किया गया लेकिन इन लोगों के पास विदेश में अरबों की संपत्ति है।

इसमें रियल एस्टेट क्षेत्र में मुंबई स्थित व्यवसायियों का एक समूह भी शामिल है, जिन पर भारतीय बैंकों का 88,000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है।

ये व्यवसायी 2007 के बाद से जेल में हैं और पेंडोरा के कागजात से पता चला है कि उन्होंने बीवीआई और बहामास में संपत्ति बनाने के लिए कंपनियों को स्थापित किया।

पेंडोरा के कागजात से पता चला है कि हाउसिंग सेक्टर में और 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में नामित दिल्ली के एक व्यवसायी ने अपनी पत्नी के साथ दो बीवीआई कंपनियों और एक पारिवारिक ट्रस्ट की स्थापना की।

उनकी कंपनी ने भारत में रियल्टी प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए क्रेडिट सुइस से 210 मिलियन डॉलर का लोन लिया था, जिसे उन्होंने नहीं चुकाया। इस समय वह घर खरीददारों को कथित तौर पर ठगने के आरोप में जेल में भी हैं।

तीन साल पहले, जब जांचकर्ता 2.1 अरब डॉलर से अधिक की कथित बैंक लोन धोखाधड़ी के आपराधिक मामलों की जांच में व्यस्त थे, तब एक प्रमुख भारतीय व्यवसायी भारत से भाग गया और उसने नाइजीरियाई बैंकों और सॉलिसिटरों से चरित्र प्रमाण पत्र जमा करने में खुद को व्यस्त कर लिया, जिससे तेल व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए बीवीआई में कंपनियों की एक स्ट्रिंग का विस्तार किया जा सके।

इसके अलावा मुंबई स्थित एक ज्वैलर्स भी हैं, जिसकी फर्म ने 19 भारतीय बैंकों के लोन चुकाने के नाम पर 500 करोड़ रुपए की चूक की। जबकि रिकॉर्ड दिखाते हैं कि संपत्ति बनाने के लिए सऊदी के व्यापारी से लिंक बनाए गए थे।

द पेंडोरा पेपर्स के रिकॉर्ड से पता चलता है कि एक कोलकाता के भी व्यवसायी हैं, जिन्हें 7,220 करोड़ रुपए का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) का नोटिस मिला है, उन्होंने ट्राइडेंट ट्रस्ट कंपनी के माध्यम से बीवीआई में ऑफशोर फर्में खोली हैं।

भारत से काम करने वालों के अलावा, कई प्रमुख एनआरआई भी हैं, जिन्होंने भारतीय बैंकों से भारी लोन लिया और वसूली और कुर्की की कार्यवाही के बावजूद, उन्होंने बाहर मौजूद संपत्ति और ऑफशोर कंपनियों का खुलासा नहीं किया।

ऐसे ही एक व्यवसायी हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात से कंट्रोल करते हैं, लेकिन उन्हें पिछले साल भारत की यात्रा के दौरान हिरासत में लिया गया था। उन पर भारतीय बैंकों का 2,800 करोड़ रुपए बकाया था। उनके बैंक लोन चूक मामलों की सुनवाई करने वाले जजों ने भी ये प्वाइंट देखा कि इन्होंने भी अपनी अन्य संपत्तियों का खुलासा नहीं किया।

पेंडोरा रिकॉर्ड से पता चलता है कि इन संपत्तियों में ऑफशोर कंपनियों का एक चक्रव्यूह है, जो ज्यादातर द ट्राइडेंट ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया है, जिसमें उनके परिवार के सदस्य शेयरधारक हैं।

क्या है पैंडोरा पेपर्स?
लगभग 12 मिलियन लीक दस्तावेजों की जांच पर आधारित पैंडोरा पेपर्स यह खुलासा करता है कि कैसे दुनिया के कई अमीर और शक्तिशाली लोग अपनी संपत्ति छिपा रहे हैं। इस सूची में 380 भारतीयों के नाम भी हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने इस सूची में से 60 प्रमुख कंपनियों और लोगों के नाम की पुष्टि की है। 117 देशों में 600 से अधिक पत्रकारों ने पैंडोरा पेपर्स के दस्तावेजों की महीनों तक जांच की है। पेंडोरा पेपर्स खुलासे में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने 14 सोर्स से दस्तावेज प्राप्त किए हैं।

पनामा पेपर्स नाम से हुए खुलासे के बाद अब पैंडोरा पेपर्स (Pandora Papers) दूसरा बड़ा खुलासा है। इसमें पता चला है कि दुनिया के कई अमीर और शक्तिशाली लोग सरकारों की नजर से अपनी संपत्ति को छुपाने और टैक्स से बचने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा ले रहें हैं।

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